RSS को विदेश से मिले ₹233 करोड़? अमेरिकी फंडिंग पर Bellingcat का बड़ा खुलासा, उठे गंभीर सवाल

WhatsApp Image 2026-10-23 at 6.07.40 PM (1)

RSS Foreign Funding News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से कथित संबंध रखने वाली अमेरिकी संस्थाओं की विदेशी फंडिंग को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। खोजी पत्रकारिता करने वाली वेबसाइट Bellingcat की एक रिपोर्ट ने अमेरिका से भारत आने वाले करोड़ों रुपये के चंदे पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की संस्था Sewa USA ने साल 2020 से 2024 के बीच करीब 29.7 मिलियन डॉलर यानी लगभग 233 करोड़ रुपये भारत समेत दक्षिण एशिया के संगठनों को ग्रांट के तौर पर दिए। हालांकि, यह साबित नहीं हुआ है कि पूरी रकम सीधे RSS को मिली।

अमेरिका से कैसे आए करोड़ों रुपये, रिपोर्ट में क्या हुआ खुलासा?

6 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित Bellingcat की रिपोर्ट में अमेरिका की दो संस्थाओं Sewa International USA और Ekal Vidyalaya Foundation of USA की फंडिंग की जांच की गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इन दोनों संस्थाओं को 2020 से 2024 के बीच करीब 117.8 मिलियन डॉलर का चंदा और ग्रांट मिला। इसमें से कम से कम 24.4 मिलियन डॉलर यानी करीब 192 करोड़ रुपये 34 ऐसी संस्थाओं से मिले जो Donor-Advised Funds (DAF) का संचालन करती हैं। DAF अमेरिका में चंदा देने का एक कानूनी तरीका है, जिसमें दान देने वाला व्यक्ति अपनी पहचान सार्वजनिक किए बिना किसी संस्था को आर्थिक मदद पहुंचाने की सिफारिश कर सकता है। जांच में यह भी सामने आया कि Sewa USA ने पांच साल में करीब 29.7 मिलियन डॉलर दक्षिण एशिया के संगठनों को दिए। वहीं Ekal USA ने भारत में शिक्षा से जुड़े प्रोजेक्ट्स के लिए करीब 33.7 मिलियन डॉलर की विदेशी ग्रांट देने की जानकारी दी। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद सवाल उठ रहा है कि इतनी बड़ी रकम किन संस्थाओं तक पहुंची और इसका इस्तेमाल किन कामों में किया गया।

RSS से क्या है इन अमेरिकी संस्थाओं का कनेक्शन और क्या सीधे मिले ₹233 करोड़?

Bellingcat ने अपनी जांच में दावा किया है कि इन अमेरिकी संस्थाओं के RSS या उससे जुड़े संगठनों के साथ पुराने और मौजूदा संबंधों के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि Sewa USA ने साल 2014 में भारत की सेवा भारती संस्था को अपनी सहयोगी संस्था बताया था। वहीं 2022 में भी सेवा भारती की पूर्वांचल इकाई को पार्टनर संगठन के तौर पर पेश किया गया था। सेवा भारती का जिक्र RSS की वेबसाइट और उसकी पुरानी रिपोर्ट में भी मिलता है। हालांकि, Sewa USA ने RSS की शाखा या सहयोगी संस्था होने से इनकार किया है। संस्था की उपाध्यक्ष राखी इसरानी ने Bellingcat को बताया कि उनका संगठन किसी राजनीतिक गतिविधि में हिस्सा नहीं लेता। उनके मुताबिक, भारत में सहयोगी संस्थाओं को दी जाने वाली ग्रांट शिक्षा, स्वास्थ्य और आपदा राहत जैसे कामों के लिए होती है। इन प्रोजेक्ट्स का ऑडिट भी किया जाता है।

इस पूरे खुलासे के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अमेरिका से भेजे गए 233 करोड़ रुपये सीधे RSS तक पहुंचे?

Bellingcat की रिपोर्ट में इसका कोई पक्का सबूत नहीं मिला है। रिपोर्ट में साफ किया गया है कि Donor-Advised Funds से मिला पैसा सीधे RSS को दिया गया, ऐसा साबित नहीं हुआ है। अमेरिकी टैक्स रिकॉर्ड में यह भी स्पष्ट नहीं है कि Sewa USA ने 2020 से 2024 के बीच सेवा भारती को कितनी रकम दी, या दी भी थी या नहीं। लेकिन इस जांच ने एक बड़ी बहस जरूर छेड़ दी है। सवाल यह है कि अमेरिका से भारत आने वाले करोड़ों रुपये के चंदे के असली दानदाताओं की पहचान कितनी पारदर्शी है और इन पैसों के इस्तेमाल की निगरानी किस तरह होती है।

अब देखना होगा कि इस रिपोर्ट के बाद विदेशी फंडिंग और उससे जुड़े संगठनों की जवाबदेही को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

स्रोत: Bellingcat की 6 अक्टूबर 2026 की जांच रिपोर्ट और अमेरिकी गैर-लाभकारी संस्थाओं के Form 990 टैक्स रिकॉर्ड।