दिवाली 2026: जानिए इस त्योहार का इतिहास, परंपराएं और भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसे मनाने का तरीका

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दिवाली भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। हर साल कार्तिक महीने की अमावस्या को मनाए जाने वाले इस पर्व पर देशभर में रोशनी, सजावट और खुशियों का माहौल देखने को मिलता है। लोग अपने घरों की सफाई करते हैं, बाजारों से खरीदारी करते हैं और अपने परिवार के साथ समय बिताते हैं। हालांकि, दिवाली का महत्व केवल सजावट और आतिशबाजी तक सीमित नहीं है। भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में इस त्योहार से जुड़ी अलग-अलग ऐतिहासिक और सांस्कृतिक परंपराएं हैं।

दिवाली को आमतौर पर अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। उत्तर भारत में इस त्योहार को श्रीराम के 14 साल के वनवास के बाद अयोध्या लौटने की परंपरा से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि अयोध्या के लोगों ने उनके स्वागत में दीप जलाए थे। वहीं, देश के कई अन्य हिस्सों में यह पर्व नई शुरुआत, व्यापार और पारिवारिक खुशियों से जुड़ा हुआ है।

दिवाली के अवसर पर लोग अपने घरों को दीयों और रंग-बिरंगी लाइटों से सजाते हैं। बाजारों में मिठाइयों, कपड़ों, सजावट के सामान और उपहारों की खरीदारी बढ़ जाती है। कई जगहों पर सामुदायिक कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन और मेलों का भी आयोजन किया जाता है।

भारत के अलग-अलग राज्यों में दिवाली मनाने के तरीके अलग-अलग हैं। उत्तर भारत में घरों और बाजारों की सजावट प्रमुख आकर्षण होती है। पश्चिम बंगाल में इसी समय काली पूजा का विशेष आयोजन होता है। गुजरात में दिवाली को नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से भी जोड़ा जाता है। वहीं, दक्षिण भारत के कई हिस्सों में नरक चतुर्दशी को विशेष महत्व दिया जाता है।

दिवाली से जुड़े पांच दिनों के उत्सव में धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन पूजा और भाई दूज शामिल हैं। इन दिनों के दौरान बाजारों में रौनक रहती है और परिवारों के बीच मिलने-जुलने का सिलसिला चलता है।

दिवाली का सामाजिक और आर्थिक महत्व भी काफी बड़ा है। इस दौरान छोटे दुकानदारों, कुम्हारों, मिठाई विक्रेताओं, हस्तशिल्प कारीगरों और स्थानीय कारोबारियों को रोजगार और कमाई के अवसर मिलते हैं। मिट्टी के दीये बनाने वाले कारीगरों के लिए यह साल का एक महत्वपूर्ण समय होता है।

हालांकि, त्योहार के दौरान पटाखों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है। पटाखों के धुएं से हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है और बच्चों, बुजुर्गों तथा सांस संबंधी परेशानी वाले लोगों को दिक्कत हो सकती है। इसलिए पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाते हुए सुरक्षित और प्रदूषण कम करने वाले तरीके अपनाना जरूरी है। दिवाली भारत की सांस्कृतिक विविधता, बाजारों की रौनक, पारिवारिक मेल-मिलाप और स्थानीय परंपराओं से जुड़ा एक बड़ा त्योहार है।