पहली ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन के संचालन की तैयारी तेज़, बेंगलुरु में चलेगी बिना ड्राइवर की मेट्रो

पहली ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन के संचालन की तैयारी तेज़, बेंगलुरु में चलेगी बिना ड्राइवर की मेट्रो

पहली ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन के संचालन की तैयारी तेज़, बेंगलुरु में चलेगी बिना ड्राइवर की मेट्रो

बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) शहर की पहली ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन के संचालन की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ चुका है। अब केवल रेलवे मंत्रालय की अंतिम मंज़ूरी बाकी है, जिसके बाद यह तकनीकी प्रगति बेंगलुरु के सार्वजनिक परिवहन को नए स्तर पर ले जाएगी।

सीएमआरएस ने किया निरीक्षण

बीएमआरसीएल ने आधिकारिक बयान में बताया कि कमीशनर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) ने येलो लाइन पर ड्राइवरलेस ट्रेन का अनिवार्य निरीक्षण पूरा कर लिया है। यह लाइन आरवी रोड से बोम्मासंद्रा तक फैली हुई है। बीएमआरसीएल के अनुसार, “यह निरीक्षण नए रोलिंग स्टॉक के लिए रेलवे मंत्रालय से मंज़ूरी लेने से पहले की एक अनिवार्य प्रक्रिया है।”

अब रेलवे मंत्रालय को रोलिंग स्टॉक और सिग्नल परीक्षण को स्वीकृति देनी होगी, जिसके बाद सीएमआरएस येलो लाइन के पूरे आर-5 सेक्शन का अंतिम निरीक्षण करेगा। ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन का पहला सेट, जिसमें छह कोच शामिल हैं, 14 फरवरी 2024 को चीन से बेंगलुरु पहुंचा था।

येलो लाइन की विशेषताएं

नम्मा मेट्रो अप्रैल 2024 तक येलो लाइन को चार ट्रेनों के साथ शुरू करने की योजना बना रही है। यह लाइन लगभग 19 किलोमीटर लंबी होगी और इसमें 16 स्टेशन होंगे। यह बोम्मासंद्रा और अत्यधिक व्यस्त सेंट्रल सिल्क बोर्ड क्षेत्र के बीच यात्रा को सुगम बनाएगी और शहर में ट्रैफिक जाम को कम करने में मदद करेगी।

CRRC नानजिंग पुझेन कंपनी लिमिटेड को 216 कोचों की आपूर्ति का ठेका मिला था, जिसमें ड्राइवरलेस प्रोटोटाइप भी शामिल है। इसे चीन से बेंगलुरु लाया गया और इलेक्ट्रॉनिक्स सिटी में चीनी इंजीनियरों की देखरेख में असेंबल किया गया।

कई परीक्षणों से गुज़रेगी ट्रेन

बीएमआरसीएल ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि सेवा में आने से पहले ड्राइवरलेस ट्रेन को 37 विभिन्न परीक्षणों से गुज़रना होगा। इनमें असेंबली के बाद स्थैतिक और विद्युत सर्किट परीक्षण शामिल हैं। इसके बाद मुख्य पटरियों पर परीक्षण किए जाएंगे, जिससे ट्रेन की वास्तविक संचालन क्षमता का मूल्यांकन किया जा सके। सिस्टम इंटीग्रेशन परीक्षण भी किए जाएंगे, जिससे सिग्नलिंग, टेलीकॉम और पावर सप्लाई सिस्टम के साथ ट्रेन की समुचित कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जा सके।

संपूर्ण परीक्षण प्रक्रिया चार महीने तक चलेगी, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन की दक्षता की पुष्टि की जा सके। इसके बाद ही इसे यात्रियों के लिए खोला जाएगा।

बेंगलुरु में ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन की शुरुआत शहर के ट्रांसपोर्ट सिस्टम को स्मार्ट और आधुनिक बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।

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