बागपत में 2027 का सियासी गणित किस करवट बैठेगा?
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में बागपत का नाम आते ही गन्ना, किसान और जाट राजनीति की चर्चा शुरू हो जाती है। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव में बागपत की तस्वीर सिर्फ जातीय समीकरणों से तय होगी या गठबंधन की रणनीति भी बड़ा असर डालेगी?
एक तरफ बीजेपी 2017 और 2022 में लगातार दो बार बागपत विधानसभा सीट जीत चुकी है। दूसरी तरफ राष्ट्रीय लोक दल यानी RLD का इस इलाके से पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है। ऐसे में 2027 को लेकर कई सवाल अभी से चर्चा में हैं।
हम बात कर रहे हैं बागपत विधानसभा सीट, नंबर 52 की।
बागपत की राजनीति में गन्ना और किसान मुद्दे
बागपत पश्चिमी उत्तर प्रदेश का महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र है। यहां गन्ने का भुगतान, किसानों से जुड़े मुद्दे, रोजगार, स्थानीय विकास और सामाजिक समीकरण चुनावी राजनीति में चर्चा के प्रमुख विषय रहे हैं।
हाल के विधानसभा चुनावों के आंकड़ों पर नजर डालें तो तस्वीर लगातार बदलती दिखाई देती है। 2017 और 2022 में बीजेपी के योगेश धामा ने जीत दर्ज की, लेकिन दोनों चुनावों के बीच जीत का अंतर काफी बदल गया।
2027 के लिए उम्मीदवारों और गठबंधनों की अंतिम तस्वीर अभी सामने नहीं है। इसलिए फिलहाल चुनावी समीकरणों को संभावित परिस्थितियों के रूप में ही देखा जा सकता है।
2022 में कांटे की टक्कर
2022 के विधानसभा चुनाव में बागपत में बीजेपी और RLD के बीच करीबी मुकाबला देखने को मिला।
विजेता: योगेश धामा — बीजेपी: 1,01,420 वोट
उपविजेता: मोहम्मद अहमद हमीद — RLD: 94,687 वोट
जीत का अंतर: 6,733 वोट
2022 में RLD और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन था। चुनाव में अहमद हमीद RLD के उम्मीदवार थे। योगेश धामा ने 6,733 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।
यानी 2022 में बीजेपी की जीत बरकरार रही, लेकिन 2017 के मुकाबले मुकाबला काफी करीबी हो गया।
2017 में बीजेपी की बड़ी जीत
2017 का चुनाव बागपत के लिए अलग तस्वीर लेकर आया था। बीजेपी के योगेश धामा ने 92,566 वोट हासिल किए और बीएसपी के अहमद हमीद को 31,360 वोटों से हराया।
अहमद हमीद को 61,206 वोट मिले, जबकि RLD के करतार सिंह भड़ाना 21,751 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इस चुनाव में बीजेपी को करीब 46.6 फीसदी वोट मिले थे, जबकि दूसरे स्थान पर रहे अहमद हमीद को करीब 30.8 फीसदी वोट मिले।
2012 में तस्वीर बिल्कुल अलग थी
अगर 2012 के चुनाव परिणाम देखें तो बागपत की राजनीतिक तस्वीर आज के मुकाबले काफी अलग नजर आती है।
उस समय बीएसपी की हेमलता चौधरी ने 56,957 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। RLD के कौकब हमीद खान 49,294 वोटों के साथ दूसरे स्थान पर रहे, जबकि समाजवादी पार्टी के साहब सिंह को 41,584 वोट मिले।
बीजेपी के उम्मीदवार को उस चुनाव में सिर्फ 4,916 वोट मिले और पार्टी पांचवें स्थान पर रही।
हेमलता चौधरी की जीत का अंतर 7,663 वोट था।
यानी सिर्फ 2012, 2017 और 2022 के नतीजों को देखें तो बागपत में राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव दिखाई देता है।
2024 लोकसभा चुनाव ने बढ़ाई RLD की चर्चा
बागपत की राजनीति में RLD के महत्व को समझने के लिए 2024 का लोकसभा चुनाव भी महत्वपूर्ण है।
2024 में बीजेपी और RLD के बीच गठबंधन हुआ और बागपत लोकसभा सीट RLD के खाते में गई। RLD के राजकुमार सांगवान ने यहां 4,88,967 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि समाजवादी पार्टी के अमरपाल को 3,29,508 वोट मिले।
बागपत लोकसभा सीट पर RLD की जीत ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की राजनीतिक मौजूदगी को लेकर चर्चा को फिर तेज किया।
हालांकि, लोकसभा सीट का सीट-बंटवारा अपने आप में 2027 विधानसभा सीट के लिए कोई तय फैसला नहीं है। विधानसभा चुनाव में सीटों का बंटवारा अलग राजनीतिक बातचीत और उस समय के गठबंधन पर निर्भर करेगा।
जातीय समीकरण पर कितनी निर्भर होगी राजनीति?
बागपत की चुनावी चर्चा में जाट और मुस्लिम मतदाताओं के साथ-साथ त्यागी, गुर्जर, दलित, क्षत्रिय, वैश्य और अन्य सामाजिक समूहों के समीकरणों की चर्चा होती रही है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। निर्वाचन आयोग विधानसभा क्षेत्रों के लिए आधिकारिक जातिवार मतदाता आंकड़े जारी नहीं करता।
इसलिए मुस्लिम, जाट, त्यागी, दलित, गुर्जर या अन्य समुदायों की निश्चित संख्या के रूप में दिए जाने वाले आंकड़ों को आधिकारिक चुनावी आंकड़ा नहीं माना जा सकता।
इसी वजह से बागपत में अलग-अलग जातीय समूहों की संख्या को लेकर सामने आने वाले अनुमान को सावधानी के साथ देखना जरूरी है।
2027 में बागपत के सामने तीन बड़े सवाल
पहला सवाल—BJP और RLD का समीकरण क्या होगा?
2024 में बीजेपी और RLD साथ आए थे और बागपत लोकसभा सीट RLD ने जीती। लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव में गठबंधन की स्थिति और सीट बंटवारे का फॉर्मूला क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
अगर दोनों दल साथ रहते हैं तो बागपत विधानसभा सीट को लेकर भी सीट बंटवारे की चर्चा महत्वपूर्ण हो सकती है। लेकिन फिलहाल इसे संभावित राजनीतिक परिस्थिति के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
दूसरा सवाल—अहमद हमीद का फैक्टर
अहमद हमीद 2017 में बीएसपी और 2022 में RLD के उम्मीदवार के तौर पर बागपत विधानसभा सीट से दूसरे स्थान पर रहे।
2017 में उन्हें 61,206 वोट मिले थे, जबकि 2022 में उनका वोट आंकड़ा बढ़कर 94,687 हो गया।
ऐसे में 2027 में उम्मीदवारों की घोषणा के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बागपत में मुकाबला किन चेहरों के बीच बनता है।
तीसरा सवाल—SP और BSP की रणनीति
अगर बीजेपी और RLD के बीच गठबंधन जारी रहता है, तो समाजवादी पार्टी और बीएसपी की अलग-अलग चुनावी रणनीतियां भी बागपत के मुकाबले को प्रभावित कर सकती हैं।
2022 में RLD और SP साथ थे, जबकि 2017 में RLD और SP अलग-अलग मैदान में थे। 2012 में भी प्रमुख दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे थे।
इन चुनावों के नतीजे बताते हैं कि उम्मीदवारों और गठबंधन की स्थिति बदलने से वोटों का बंटवारा भी बदल सकता है।
अब असली सवाल 2027 का
बागपत की राजनीति को सिर्फ एक जातीय समीकरण या एक पार्टी के प्रदर्शन से समझना आसान नहीं है। 2012 में बीएसपी, 2017 में बीजेपी और 2022 में बीजेपी की जीत के बीच वोटों और मुकाबले का स्वरूप लगातार बदला है।
2024 के लोकसभा चुनाव में RLD की जीत ने भी बागपत की राजनीतिक चर्चा में एक नया संदर्भ जोड़ा है। लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनाव के समीकरण अलग हो सकते हैं।
अब 2027 में तस्वीर किन चीजों से बनेगी—उम्मीदवार, गठबंधन, स्थानीय मुद्दे या सामाजिक समीकरण?
इन सभी कारकों की भूमिका चुनावी मैदान में उम्मीदवारों और गठबंधनों की अंतिम तस्वीर सामने आने के बाद ज्यादा स्पष्ट होगी।