साहिबाबाद: यूपी की सबसे बड़ी विधानसभा सीट का पूरा चुनावी गणित
दिल्ली से सटी साहिबाबाद विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित और बड़े मतदाता आधार वाली सीटों में शामिल है। गाजियाबाद जिले की इस सीट पर 2012 में पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ। इसके बाद 2017 और 2022 के चुनावों में बीजेपी के सुनील कुमार शर्मा ने लगातार जीत दर्ज की।
साहिबाबाद की चुनावी कहानी इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि यहां अब तक हुए तीन विधानसभा चुनावों में दो अलग-अलग तस्वीरें देखने को मिलीं। 2012 में बीएसपी ने जीत हासिल की, जबकि 2017 और 2022 में बीजेपी ने बड़े अंतर से चुनाव जीता।
2012 में पहली बार हुआ साहिबाबाद का विधानसभा चुनाव
परिसीमन के बाद साहिबाबाद विधानसभा सीट अस्तित्व में आई और 2012 में यहां पहली बार चुनाव हुआ। उस चुनाव में बीएसपी के अमरपाल शर्मा ने बीजेपी के सुनील कुमार शर्मा को हराया।
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
|---|---|---|
| अमरपाल शर्मा | बीएसपी | 1,24,332 |
| सुनील कुमार शर्मा | बीजेपी | 99,984 |
| सतीश चंद्र त्यागी | कांग्रेस | 51,195 |
| प्रल्हाद शर्मा | सपा | 36,266 |
अमरपाल शर्मा ने करीब 24 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। इस चुनाव में बीएसपी और बीजेपी के बीच मुख्य मुकाबला देखने को मिला।
2017 में बदला पूरा चुनावी समीकरण
2017 तक उत्तर प्रदेश की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। साहिबाबाद में बीजेपी के सुनील कुमार शर्मा और कांग्रेस के अमरपाल शर्मा के बीच मुकाबला हुआ।
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
|---|---|---|
| सुनील कुमार शर्मा | बीजेपी | 2,62,741 |
| अमरपाल शर्मा | कांग्रेस | 1,12,056 |
| जलालुद्दीन | बीएसपी | 41,654 |
सुनील कुमार शर्मा ने 1,50,685 वोटों के अंतर से बड़ी जीत दर्ज की। खास बात यह रही कि 2012 में बीएसपी के टिकट पर चुनाव जीतने वाले अमरपाल शर्मा इस बार कांग्रेस के टिकट पर मैदान में थे।
2022 में और बढ़ा जीत का अंतर
2022 में एक बार फिर सुनील कुमार शर्मा और अमरपाल शर्मा आमने-सामने थे। इस बार अमरपाल शर्मा समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे।
| प्रत्याशी | पार्टी | वोट |
|---|---|---|
| सुनील कुमार शर्मा | बीजेपी | 3,22,882 |
| अमरपाल शर्मा | सपा | 1,08,047 |
| अजीत कुमार पाल | बीएसपी | 24,136 |
| संगीता त्यागी | कांग्रेस | 10,273 |
सुनील कुमार शर्मा ने 2,14,835 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें योगी आदित्यनाथ सरकार के दूसरे कार्यकाल में मंत्री बनाया गया।
तीन चुनाव और बदलती तस्वीर
| चुनाव वर्ष | विजेता | पार्टी | जीत का अंतर |
|---|---|---|---|
| 2012 | अमरपाल शर्मा | बीएसपी | 24,348 |
| 2017 | सुनील कुमार शर्मा | बीजेपी | 1,50,685 |
| 2022 | सुनील कुमार शर्मा | बीजेपी | 2,14,835 |
इन तीन चुनावों के आंकड़ों से साहिबाबाद में जीत के अंतर में बड़ा बदलाव साफ दिखाई देता है। 2012 में मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी था, जबकि 2017 और 2022 में बीजेपी ने काफी बड़े अंतर से जीत दर्ज की।
साहिबाबाद की सामाजिक और भौगोलिक तस्वीर
साहिबाबाद की राजनीति को समझने के लिए इसके शहरी स्वरूप को देखना जरूरी है। वैशाली, कौशांबी, वसुंधरा और इंदिरापुरम जैसे बड़े आवासीय इलाके इस विधानसभा क्षेत्र की पहचान हैं। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र और घनी आबादी वाले पुराने इलाकों का भी यहां महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वहीं खोड़ा, साहिबाबाद गांव और पसोंडा जैसे इलाकों की स्थानीय समस्याएं भी चुनावी मुद्दों का हिस्सा बनती हैं।
साहिबाबाद के जातीय और समुदायवार मतदाताओं को लेकर अलग-अलग अनुमान सामने आते हैं, लेकिन ऐसे आंकड़ों को आधिकारिक मतदाता आंकड़ा नहीं माना जा सकता। इसलिए यहां के सामाजिक समीकरण को समझते समय इन अनुमानों को सावधानी से देखना जरूरी है।
2027 में किन मुद्दों पर रहेगी नजर?
2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी अंतिम तस्वीर सामने नहीं है। उम्मीदवारों की घोषणा, राजनीतिक गठबंधन और स्थानीय मुद्दे चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।
साहिबाबाद जैसे बड़े शहरी विधानसभा क्षेत्र में सड़क, ट्रैफिक, प्रदूषण, आवासीय सोसाइटियों से जुड़े मुद्दे, रोजगार, बिजली-पानी, सार्वजनिक परिवहन और स्थानीय विकास जैसे सवाल महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
सुनील शर्मा के सामने क्या चुनौती होगी?
सुनील कुमार शर्मा 2017 और 2022 में लगातार दो बार साहिबाबाद से जीत चुके हैं। 2022 में उनकी जीत का अंतर 2,14,835 वोट रहा था। ऐसे में 2027 में बीजेपी की ओर से उम्मीदवार को लेकर फैसला और विपक्ष की ओर से प्रत्याशी चयन पर नजर रहेगी।
विपक्ष के सामने क्या चुनौती है?
सपा, कांग्रेस और बीएसपी के लिए साहिबाबाद में पिछले चुनावों के आंकड़े बड़ी चुनौती दिखाते हैं। खासकर 2022 में बीजेपी और दूसरे स्थान पर रही सपा के बीच वोटों का अंतर 2 लाख से अधिक था।
हालांकि अगला चुनाव नए उम्मीदवारों, गठबंधन और स्थानीय मुद्दों के आधार पर अलग समीकरण पैदा कर सकता है।
साहिबाबाद का चुनावी गणित क्या बताता है?
2012 से 2022 तक के चुनाव परिणामों को देखें तो साहिबाबाद में तीन चुनावों में दो अलग राजनीतिक तस्वीरें सामने आईं। 2012 में बीएसपी ने जीत दर्ज की, जबकि 2017 और 2022 में बीजेपी ने लगातार दो बार बड़ी बढ़त के साथ चुनाव जीता।
अब 2027 में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पिछले चुनावों जैसा ही पैटर्न जारी रहता है या उम्मीदवार, गठबंधन और स्थानीय मुद्दों के आधार पर साहिबाबाद में नया राजनीतिक समीकरण बनता है।