स्टारलिंक विवाद: मित्तल बोले “मैं कतार में सबसे आगे”, राहुल गांधी भी मस्क के समर्थन में उतरे थे

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नई दिल्ली: भारत में एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक की एंट्री को लेकर विवाद तेज हो गया है। भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने कहा है कि उनका सैटेलाइट कारोबार मंजूरी की कतार में स्टारलिंक से काफी आगे है। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी स्टारलिंक को भारत में मंजूरी मिलने में हो रही देरी के मुद्दे पर मस्क का समर्थन करते नजर आए थे।

यह विवाद ऐसे समय में बढ़ा है, जब मस्क ने आरोप लगाया है कि भारत में कुछ बड़े कारोबारी अपने बाजार पर पकड़ बनाए रखने के लिए स्टारलिंक की एंट्री में बाधा डाल रहे हैं। हालांकि, सरकार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी कंपनियों के लिए नियम एक जैसे हैं।

मित्तल ने क्या कहा?

बुधवार, 14 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम के दौरान सुनील भारती मित्तल से स्टारलिंक को लेकर चल रहे विवाद पर सवाल पूछा गया। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनका सैटेलाइट कारोबार मंजूरी की प्रक्रिया में मस्क की कंपनी से काफी आगे है, क्योंकि उन्होंने करीब पांच साल पहले आवेदन किया था।

मित्तल के मुताबिक, उनका ग्राउंड नेटवर्क पिछले तीन साल से तैयार है और उनके सैटेलाइट भी पिछले पांच साल से भारत के ऊपर मौजूद हैं। इसके बावजूद उनकी कंपनी को सेवाएं शुरू करने के लिए अंतिम अनुमति का इंतजार है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी कंपनी को स्टारलिंक से कुछ दिन पहले मंजूरी मिल जाए, तो उन्हें खुशी होगी।

मित्तल का यह बयान इस बहस को नया मोड़ देता है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है और क्या इसमें कंपनियों के बीच कोई अंतर किया जा रहा है। हालांकि, मित्तल का बयान अपने आप में किसी कंपनी के साथ भेदभाव होने या न होने का निर्णायक सबूत नहीं है।

मस्क ने किस पर लगाए आरोप?

स्टारलिंक के संस्थापक एलन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आरोप लगाया था कि भारत में कुछ प्रभावशाली कारोबारी अपने एकाधिकार को बनाए रखने के लिए उनकी कंपनी की एंट्री रोक रहे हैं।

मस्क ने यह भी सवाल उठाया था कि जब स्टारलिंक को 165 से अधिक देशों में लाइसेंस मिल चुका है और कंपनी भारतीय नियमों का पालन करने का दावा करती है, तो उसे भारत में व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने की अनुमति क्यों नहीं मिल रही है।

एक अन्य पोस्ट में उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी का जिक्र करते हुए सवाल किया था कि क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं।

हालांकि, मस्क ने अपने आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई निर्णायक सबूत पेश नहीं किया है, जिससे यह साबित हो कि किसी कारोबारी ने सरकारी प्रक्रिया को प्रभावित करके स्टारलिंक की एंट्री रुकवाई है।

राहुल गांधी ने कैसे दिया जवाब?

मस्क के बयान के बाद राहुल गांधी ने X पर लिखा, “Welcome to India, Elon. Wait till you discover the other guy.”
राहुल की इस टिप्पणी को मस्क के आरोपों के समर्थन के तौर पर देखा गया। इसके जवाब में मस्क ने राहुल गांधी को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह स्थिति चिंताजनक है।
इस तरह सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को लेकर शुरू हुई बहस में राजनीतिक रंग भी जुड़ गया। एक तरफ मस्क ने कारोबारी हितों और बाजार में प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठाए, तो दूसरी तरफ सरकार ने किसी भी तरह के पक्षपात के आरोपों को खारिज किया।

सरकार ने क्या सफाई दी?

संचार मंत्रालय ने कहा है कि भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को मंजूरी देने की प्रक्रिया में किसी कंपनी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है। मंत्रालय के अनुसार, स्टारलिंक, रिलायंस जियो की सैटेलाइट इकाई और भारती समर्थित यूटेलसैट वनवेब को सैटेलाइट संचार सेवाओं के लिए लाइसेंस मिल चुके हैं।

सरकार का कहना है कि तीनों कंपनियां लगभग एक ही नियामकीय चरण में हैं। वहीं, व्यावसायिक सेवाएं शुरू करने के लिए सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम से जुड़ी शर्तों का पूरा होना भी जरूरी है। केंद्रीय संचार राज्य मंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने भी कहा था कि सेवाएं शुरू होने में देरी सुरक्षा मंजूरी से जुड़ी प्रक्रिया के कारण है, न कि किसी एक कंपनी के खिलाफ अपनाए गए रवैये की वजह से। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार जानबूझकर स्टारलिंक को रोक रही है। इसी तरह, केवल सरकार के बयान के आधार पर भी पूरी प्रक्रिया में किसी तरह की संभावित असमानता पर उठने वाले सवालों को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता।
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By Ahmad Samir