जामिया में छात्रों की ऐतिहासिक जीत: 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव का रास्ता साफ, 18 दिन की भूख हड़ताल के बाद प्रशासन ने मानी मांगें

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नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 2026: दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में करीब 20 साल से बंद छात्रसंघ चुनाव की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। 18 दिनों की भूख हड़ताल और लगातार विरोध प्रदर्शन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रों की प्रमुख मांगों को स्वीकार करते हुए छात्रसंघ चुनाव कराने की लिखित समयसीमा जारी कर दी है। खास बात यह है कि यह ऐतिहासिक फैसला 29 अक्टूबर को जामिया के 106वें स्थापना दिवस पर आया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने 15 मई 2027 तक छात्रसंघ का संविधान लागू करने और अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई भी वापस लेने का फैसला हुआ है।

2006 से बंद थे छात्रसंघ चुनाव, 18 दिनों तक चला आंदोलन

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रसंघ 2006 से निष्क्रिय था। उस समय कैंपस में हुई हिंसा के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्रसंघ को भंग कर दिया था। इसके बाद से छात्रों को विश्वविद्यालय स्तर पर चुना हुआ छात्रसंघ नहीं मिला। छात्रसंघ की बहाली को लेकर 12 अक्टूबर 2026 को छात्रों ने आंदोलन और भूख हड़ताल शुरू की। छात्रों की मांग थी कि विश्वविद्यालय में लोकतांत्रिक तरीके से छात्रसंघ चुनाव कराए जाएं, चुनाव की निश्चित तारीख घोषित हो और प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ की गई कार्रवाई वापस ली जाए।

आंदोलन के दौरान कैंपस में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। पढ़ाई और परीक्षाएं ऑनलाइन कर दी गई थीं और परिसर में प्रवेश को लेकर भी पाबंदियां लगाई गई थीं। 26 अक्टूबर को प्रशासन ने छात्रसंघ चुनाव कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन संविधान लागू करने की निश्चित समयसीमा नहीं दी थी। छात्रों ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया और अपना आंदोलन जारी रखा। आखिरकार 29 अक्टूबर को प्रशासन ने लिखित आदेश जारी कर चुनाव की प्रक्रिया के लिए समयसीमा तय कर दी।

106वें स्थापना दिवस पर जश्न में बदला आंदोलन

29 अक्टूबर 1920 को स्थापित जामिया मिल्लिया इस्लामिया ने इस साल अपने 106 साल पूरे किए। हालांकि छात्र आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्थापना दिवस के आधिकारिक कार्यक्रम और तालीमी मेले को रद्द कर दिया था। इसके बावजूद छात्रों ने गुलिस्तान-ए-गालिब परिसर में खुद स्थापना दिवस मनाया। तिरंगा फहराया गया, राष्ट्रगान हुआ और छात्रों ने अपने संघर्ष को जारी रखने का संकल्प दोहराया। इसी दिन विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। देर रात जब रजिस्ट्रार प्रोफेसर महताब आलम रिजवी का आदेश सामने आया, तो छात्रों में खुशी की लहर दौड़ गई। 18 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। छात्रों ने नारे लगाए, ढोल बजाए और कैंपस में जीत का जश्न मनाया। कानून के छात्र एबिन बेसिल भी भूख हड़ताल करने वालों में शामिल थे।

अब अगस्त 2027 तक चुनाव की उम्मीद, लेकिन कुछ सवाल बाकी

29 अक्टूबर को जारी आदेश के मुताबिक, 15 मई 2027 तक जामिया मिल्लिया इस्लामिया स्टूडेंट्स यूनियन का संविधान मंजूर कर लागू किया जाएगा। इसके बाद लिंगदोह कमेटी की गाइडलाइंस के अनुसार चुनाव की अधिसूचना जारी होगी। अगला शैक्षणिक सत्र 16 जुलाई 2027 के आसपास शुरू होना है। प्रशासन ने इसके छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराने की बात कही है। ऐसे में अगस्त 2027 के आखिर तक छात्रसंघ चुनाव होने की उम्मीद है। प्रशासन ने आंदोलन से जुड़े कारण बताओ नोटिस, निलंबन, निष्कासन और कैंपस बैन वापस लेने का भी आदेश दिया है। हालांकि प्रदर्शनकारी छात्र संविधान को 20 दिसंबर 2026 तक मंजूरी दिलाने की मांग कर रहे थे, जबकि प्रशासन ने इसके लिए मई 2027 तक का समय रखा है।

इस आंदोलन के दौरान छात्रों को कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात किया गया और कई छात्रों को हिरासत में भी लिया गया। दिल्ली पुलिस ने कैंपस में तोड़फोड़ के आरोपों को लेकर दो FIR भी दर्ज की हैं। हालांकि विश्वविद्यालय प्रशासन ने आंदोलन में शामिल छात्रों के खिलाफ जारी नोटिस, सस्पेंशन और कैंपस बैन वापस लेने का आदेश दिया है, लेकिन पुलिस से जुड़े मामलों पर इसका सीधा असर नहीं पड़ेगा।

जामिया के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि यहां आखिरी बार 2006 में छात्रसंघ था। उसके बाद करीब 20 साल तक छात्रों को अपना चुना हुआ छात्रसंघ नहीं मिला। इस बार 12 अक्टूबर से शुरू हुए आंदोलन में छात्रों ने 18 दिनों तक भूख हड़ताल की। कई बार प्रशासन से बातचीत हुई, लेकिन छात्र बिना लिखित समयसीमा के आंदोलन खत्म करने को तैयार नहीं थे। आखिरकार 29 अक्टूबर को जामिया के 106वें स्थापना दिवस पर प्रशासन को चुनाव कराने की समयसीमा जारी करनी पड़ी।
अब प्रशासन ने 15 मई 2027 तक छात्रसंघ का संविधान लागू करने और अगले शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के छह सप्ताह के भीतर चुनाव कराने का वादा किया है। वहीं, जल्द ही जामिया कैंपस में ऑफलाइन क्लास और परीक्षाएं भी दोबारा शुरू होंगी।
फिलहाल छात्रों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया है, लेकिन असली परीक्षा अब विश्वविद्यालय प्रशासन की है। क्योंकि 20 साल बाद छात्रसंघ चुनाव कराने का वादा तो हो गया है, लेकिन चुनाव अभी बाकी हैं। अगर तय समय पर चुनाव होते हैं, तो यह जामिया के इतिहास में एक बड़ा बदलाव होगा और छात्रों को एक बार फिर अपनी बात रखने के लिए चुना हुआ प्रतिनिधित्व मिल सकेगा।

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By Ahmad Samir