IDBI बैंक के निजीकरण के खिलाफ हल्द्वानी में कर्मचारियों की 36 घंटे की भूख हड़ताल, सरकार से बिक्री रोकने की मांग

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हल्द्वानी: उत्तराखंड के हल्द्वानी में IDBI बैंक के प्रस्तावित निजीकरण के विरोध में बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों ने 36 घंटे की भूख हड़ताल शुरू कर दी है। कर्मचारियों ने केंद्र सरकार से बैंक के निजीकरण की प्रक्रिया रोकने और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक के रूप में इसकी पहचान बनाए रखने की मांग की है। यह प्रदर्शन 2 और 3 नवंबर को आयोजित किया जा रहा है। हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में यूनाइटेड फोरम ऑफ IDBI ऑफिसर्स एंड एम्प्लॉइज के बैनर तले कर्मचारी इस आंदोलन में शामिल हुए।

बैंक कर्मचारियों का कहना है कि IDBI बैंक का निजीकरण केवल एक बैंक की हिस्सेदारी बेचने का मामला नहीं है, बल्कि इससे सार्वजनिक बैंकिंग व्यवस्था और कर्मचारियों के भविष्य पर भी असर पड़ सकता है। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के प्रस्तावित विनिवेश पर सवाल उठाते हुए कहा कि बैंक में सरकारी हिस्सेदारी बनाए रखना जरूरी है।

सरकार और LIC की हिस्सेदारी बनाए रखने की मांग

आंदोलन कर रहे कर्मचारियों की प्रमुख मांग है कि केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) IDBI बैंक की प्रस्तावित बिक्री पर रोक लगाएं। कर्मचारियों ने मांग की है कि बैंक में सरकार की कम से कम 51 प्रतिशत हिस्सेदारी बनी रहनी चाहिए। उनका कहना है कि बैंक की सार्वजनिक क्षेत्र की पहचान खत्म होने से इसके कामकाज और सामाजिक जिम्मेदारियों में बदलाव आ सकता है।

कर्मचारी संगठनों ने यह भी मांग उठाई है कि निजीकरण की स्थिति में कर्मचारियों की नौकरी, पेंशन, वेतन, सेवा शर्तों और अन्य कल्याणकारी सुविधाओं की सुरक्षा की लिखित गारंटी दी जाए। इसके साथ ही बैंक में सरकारी आरक्षण नीति और सार्वजनिक क्षेत्र की नियुक्तियों से जुड़े प्रावधानों को भी जारी रखने की मांग की गई है।

कर्मचारियों ने निजीकरण से होने वाले प्रभावों पर जताई चिंता

प्रदर्शन कर रहे बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आम लोगों, छोटे कारोबारियों और विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में IDBI बैंक का निजीकरण होने से बैंक की प्राथमिकताओं और सेवाओं के स्वरूप में बदलाव की आशंका है।

कर्मचारी संगठनों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जाता, तब तक निजीकरण के खिलाफ उनका विरोध जारी रहेगा। हल्द्वानी में आयोजित 36 घंटे की भूख हड़ताल के जरिए कर्मचारियों ने केंद्र सरकार तक अपनी मांग पहुंचाने की कोशिश की है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाएं कर्मचारियों की मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं।