आज से IPC, CrPC, साक्ष्य अधिनियम समाप्त, जानें नए आपराधिक कानूनों में क्या है खास

आज से IPC, CrPC, साक्ष्य अधिनियम समाप्त, जानें नए आपराधिक कानूनों में क्या है खास

आज से IPC, CrPC, साक्ष्य अधिनियम समाप्त, जानें नए आपराधिक कानूनों में क्या है खास

तीन नए आपराधिक कानून– भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए)– 1 जुलाई से लागू होंगे। ये कानून ब्रिटिश काल के भारतीय दंड संहिता (आईपीसी), दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की जगह लेंगे। आपराधिक न्याय प्रणाली में किए गए बदलावों का उद्देश्य अधिक सुव्यवस्थित और पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना है। कानून में कुछ बदलावों में शामिल हैं:

1- आपराधिक मामलों की जांच को मजबूत करने के लिए किसी भी पुलिस स्टेशन पर एफआईआर दर्ज करने या जीरो एफआईआर और जघन्य अपराधों के लिए अपराध स्थलों की अनिवार्य वीडियोग्राफी जैसे प्रावधान।

2- नए कानूनों में अनिवार्य किया गया है कि आपराधिक मामलों में फैसला सुनवाई पूरी होने के 45 दिनों के भीतर सुनाया जाना चाहिए और पहली सुनवाई के 60 दिनों के भीतर आरोप तय किए जाने चाहिए।

3- पीड़ितों को 90 दिनों के भीतर जांच की प्रगति के बारे में सूचित करने का भी प्रावधान है। इसमें ऑनलाइन शिकायत दर्ज करना, SMS के जरिए इलेक्ट्रॉनिक समन भेजना और साक्ष्यों को तेजी से साझा करना भी शामिल है।

4- भारतीय न्याय संहिता के तहत 83 अपराधों में जुर्माने की राशि बढ़ाई गई है और 23 अपराधों में अनिवार्य न्यूनतम सजा की शुरुआत की गई है।

5- यौन अपराधों से निपटने के लिए बीएनएस में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों पर एक नया अध्याय है।

6- सामूहिक बलात्कार के सभी मामलों में 20 साल की कैद या आजीवन कारावास का प्रावधान है और 18 साल से कम उम्र की महिला के साथ सामूहिक बलात्कार को नई अपराध श्रेणी में रखा गया है।

7- भारतीय न्याय संहिता में शादी का झूठा वादा, भीड़ द्वारा हत्या और चेन स्नेचिंग जैसे अपराधों को भी शामिल किया गया है, जिनका उल्लेख आईपीसी में नहीं था।

8- भारतीय न्याय संहिता की धारा 113.(1) में आतंकवाद को भी परिभाषित किया गया है। बीएनएस के अनुसार, आतंकवादी कृत्यों के लिए मृत्युदंड या पैरोल के बिना आजीवन कारावास की सजा हो सकती है।

9- बीएनएस धारा 113. (1) में उल्लेख किया गया है कि, “जो कोई भी भारत की एकता, अखंडता, संप्रभुता, सुरक्षा या आर्थिक सुरक्षा या संप्रभुता को खतरे में डालने या खतरे में डालने की मंशा से या भारत में या किसी विदेशी देश में जनता या जनता के किसी वर्ग के बीच आतंक फैलाने या फैलाने के इरादे से, किसी व्यक्ति या व्यक्तियों की मौत, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या मुद्रा का निर्माण या तस्करी करने के इरादे से बम, डायनामाइट, विस्फोटक पदार्थ, जहरीली गैसों, परमाणु का उपयोग करके कोई कार्य करता है, तो वह आतंकवादी कृत्य करता है”।

10- यह भी उल्लेख किया गया है कि सार्वजनिक सुविधाओं या निजी संपत्ति को नष्ट करना एक अपराध है। ऐसे कार्य जो ‘महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान या विनाश के कारण व्यापक नुकसान’ का कारण बनते हैं, उन्हें भी इस धारा में शामिल किया गया है।