नोएडा बस अग्निकांड पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, नौ मौतों पर लिया स्वतः संज्ञान

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उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने से नौ यात्रियों की मौत के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया है। कोर्ट ने घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश में चल रही स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था और उनके संचालन को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर 2026 को होगी।

यह हादसा 23 सितंबर की रात यमुना एक्सप्रेसवे पर ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में हुआ था। दिल्ली से महोबा जा रही एसी स्लीपर बस में अचानक आग लग गई थी। हादसे में नौ यात्रियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य यात्रियों ने किसी तरह बस से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।

हाईकोर्ट ने अधिकारियों से मांगा जवाब

मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी की पीठ ने की। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और अपर मुख्य सचिव परिवहन को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश होने को कहा। अधिकारियों से बसों की सुरक्षा, परमिट और जांच व्यवस्था से जुड़ी जानकारी मांगी गई।

हाईकोर्ट ने राज्य में चल रही एसी स्लीपर बसों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए यह जानना चाहा कि इन बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की नियमित जांच किस तरह की जाती है। कोर्ट ने यह भी पूछा कि चालकों और परिचालकों को आपात स्थिति से निपटने के लिए उचित प्रशिक्षण दिया जाता है या नहीं।

स्लीपर बसों की सुरक्षा पर उठे सवाल

कोर्ट के सामने यह बात भी आई कि स्लीपर बसों में यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों का पालन जरूरी है। हाईकोर्ट ने राज्य में पहले हुई बस अग्निकांड की घटनाओं का भी उल्लेख किया।

कोर्ट ने जुलाई 2023 में रायबरेली-प्रयागराज-लखनऊ हाईवे, नवंबर 2024 में कन्नौज-लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे और दिसंबर 2025 में मथुरा-ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में हुए बस हादसों का जिक्र किया।

रिपोर्टों के मुताबिक, हाईकोर्ट ने स्लीपर बसों के परमिट, परमिट जारी करने से पहले होने वाली जांच, सुरक्षा निरीक्षण और नियमों के उल्लंघन पर की गई कार्रवाई का भी ब्योरा मांगा है।

हादसे की जांच में सामने आ रही सुरक्षा खामियां

बस अग्निकांड की पुलिस जांच में भी कई संभावित सुरक्षा खामियों की जांच की जा रही है। पुलिस के