चम्पत राय, धर्मेंद्र प्रधान के बाद अब ज्ञानेश कुमार पर CJP का निशाना, SIR और वोटर लिस्ट को लेकर बढ़ा विवाद

राम मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों से लेकर पेपर लीक और अब चुनावी प्रक्रिया तक… Cockroach Janta Party यानी CJP ने एक बार फिर सरकार और संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध तेज कर दिया है। इस बार CJP के निशाने पर मुख्य चुनाव आयुक्त यानी CEC ज्ञानेश कुमार हैं। संगठन ने SIR यानी Special Intensive Revision और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है।

CJP ने 24 सितंबर को ज्ञानेश कुमार को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था। संगठन का कहना है कि अगर CEC इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। CJP ने अपने अभियान को ‘Election Commission Thik Karo’ नाम दिया है और इसे आगे देश के अलग-अलग शहरों तक ले जाने की बात कही है।

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ी है। SIR को लेकर विपक्षी दलों की ओर से लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। इसी बीच चुनाव आयोग के भीतर निर्णय प्रक्रिया को लेकर भी असहमति की रिपोर्ट सामने आई है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीने की अवधि में कम से कम 14 मौकों पर मतदाता सूची और SIR से जुड़े फैसलों पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में Form-6 में बदलाव, मतदाताओं के नाम जोड़ने और हटाने तथा चुनावी डेटा के केंद्रीकरण जैसे मुद्दों का उल्लेख है। हालांकि, चुनाव आयोग ने इन आपत्तियों को अपने निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बताया है और कहा है कि संबंधित फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे।

अब सवाल Form-6 को लेकर है। Form-6 का इस्तेमाल मतदाता सूची में नया नाम जुड़वाने के लिए किया जाता है। चुनाव आयोग का कहना है कि Form-6 में बदलाव नहीं किया गया है, बल्कि SIR के तहत इसके साथ एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई है। इस घोषणा में आवेदक से पुराने SIR में खुद या अपने माता-पिता अथवा दादा-दादी के नाम से जुड़ी जानकारी मांगी जाती है।

CJP ने इसी व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा है कि नए मतदाताओं के लिए इस तरह की अतिरिक्त जानकारी की जरूरत और इसे लागू करने की प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। संगठन ने दावा किया है कि इस व्यवस्था से पहली बार वोट देने वाले लोगों को परेशानी हो सकती है।

इसके बाद गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी चर्चा में आया। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR प्रक्रिया के दौरान इन मतदाताओं के नाम हटाए गए थे। बाद में जांच और सुनवाई के बाद संबंधित अधिकारियों ने उन्हें दोबारा शामिल करने योग्य माना, लेकिन अंतिम मतदाता सूची में उनके नाम शामिल नहीं हो पाए।

चुनाव आयोग के मुताबिक, इसका एक कारण सिस्टम में नाम हटाए जाने के बाद उसे उसी प्रक्रिया के तहत वापस बहाल करने के लिए ‘rollback’ सुविधा का उपलब्ध न होना था। आयोग ने कहा है कि संबंधित लोग Form-6 के जरिए दोबारा मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

CJP ने इस मामले को लेकर भी पारदर्शिता की मांग की है। संगठन का कहना है कि मतदाता के नाम जोड़ने, हटाने और दोबारा बहाल करने की प्रक्रिया के साथ-साथ चुनावी डेटा तक पहुंच और उसके इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।

इसी बीच 25 सितंबर को कांग्रेस ने भी CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन किया। दिल्ली, पटना, कोलकाता, चंडीगढ़ और कई अन्य शहरों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किया। कुछ जगहों पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग और पानी की बौछार का इस्तेमाल किया। कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है।

यानी अब एक ही मुद्दे पर अलग-अलग स्तरों से सवाल उठ रहे हैं। कांग्रेस जहां SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रही है, वहीं CJP ने 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए स्वतंत्र जांच और CEC के इस्तीफे की मांग की है।

CJP ने अपनी मांगों में SIR से जुड़े फैसलों की स्वतंत्र जांच, मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर रोक और संबंधित रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की मांग भी रखी है। संगठन ने चुनाव आयुक्तों की कथित आपत्तियों और उनके जवाबों को सार्वजनिक किए जाने की मांग की है, ताकि पूरे मामले की स्वतंत्र रूप से जांच हो सके।

हालांकि, यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि CJP और कांग्रेस की ओर से लगाए गए आरोप राजनीतिक और संगठनात्मक दावे हैं। इन्हें किसी स्वतंत्र जांच या न्यायिक प्रक्रिया में सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता। दूसरी तरफ चुनाव आयोग अपने स्तर पर SIR और मतदाता सूची की प्रक्रिया को निर्धारित नियमों के तहत बता रहा है।

अब सबसे बड़ा सवाल 2 अक्टूबर को लेकर है। CJP के मुताबिक, अगर 26 सितंबर तक ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो 2 अक्टूबर से मुंबई से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा और इसे दूसरे शहरों तक ले जाया जाएगा। संगठन ने इसे अपने पिछले आंदोलन की तर्ज पर ‘Jantar Mantar 2.0’ बताया है।

फिलहाल SIR, Form-6, 97 मतदाताओं और चुनाव आयोग के भीतर कथित आपत्तियों को लेकर बहस तेज है। आने वाले दिनों में चुनाव आयोग की ओर से इन सवालों पर क्या स्पष्टीकरण सामने आता है और CJP का प्रस्तावित आंदोलन किस रूप में आगे बढ़ता है, इस पर नजर रहेगी।