नई दिल्ली: देश में एक बार फिर कोरोना वायरस ने दस्तक दे दी है। बीते कुछ दिनों में संक्रमण के मामलों में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई है। हालांकि इस बार स्थिति उतनी गंभीर नहीं मानी जा रही जितनी पहले और दूसरी लहर के दौरान देखी गई थी। इसके बावजूद केंद्र और राज्य सरकारें सतर्क हो गई हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
नए सब-वेरिएंट JN.1 और LF.7 की पुष्टि
भारत में जो नए मामले सामने आ रहे हैं, उनमें से कई में कोरोना के सब-वेरिएंट JN.1 और LF.7 की पुष्टि हुई है। ये दोनों ओमिक्रॉन वेरिएंट के उप-रूप हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये वेरिएंट तेजी से फैलने वाले तो हैं, लेकिन इनसे संक्रमित लोगों में गंभीर लक्षण या उच्च मृत्यु दर देखने को नहीं मिल रही।
क्या फिर से लगेगा लॉकडाउन?
लॉकडाउन को सरकारें अंतिम उपाय के रूप में देखती हैं। जब संक्रमण नियंत्रण से बाहर हो जाए और मृत्यु दर खतरनाक स्तर पर पहुंच जाए, तभी इस तरह का सख्त कदम उठाया जाता है। फिलहाल सरकार की ओर से लॉकडाउन लागू करने की कोई योजना नहीं है। लेकिन मास्क अनिवार्यता, भीड़-भाड़ वाले आयोजनों पर रोक, और सार्वजनिक स्थलों पर सख्ती जैसे कदम भविष्य में उठाए जा सकते हैं।
सरकार ने सभी राज्यों को हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत रखने, ऑक्सीजन सप्लाई सुनिश्चित करने, और संभावित हालात के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। साथ ही, RT-PCR टेस्टिंग बढ़ाने और जीनोम सीक्वेंसिंग तेज करने की बात कही गई है ताकि वेरिएंट पर निगरानी बनी रहे।
डर नहीं, सतर्कता जरूरी
विशेषज्ञों और डॉक्टरों की राय में घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन लापरवाही से बचना बेहद जरूरी है। अधिकांश आबादी को टीके और बूस्टर डोज़ मिल चुके हैं, जिससे गंभीर संक्रमण की संभावना कम हो गई है। ऐसे में लोगों से अपील की जा रही है कि वे:
- सार्वजनिक स्थानों पर मास्क पहनें
- बार-बार हाथ धोएं या सैनिटाइज़र का प्रयोग करें
- भीड़-भाड़ से बचें
- सर्दी, खांसी या बुखार होने पर खुद को अलग रखें और जांच कराएं
भारत में कोरोना का यह नया दौर सतर्कता की मांग करता है, डर की नहीं। सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और आम जनता से सहयोग की अपेक्षा कर रही है। यदि हम सभी मिलकर कोविड प्रोटोकॉल का पालन करें, तो इस बार महामारी को बड़े पैमाने पर फैलने से रोका जा सकता है।