UP Politics: उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) को लेकर विपक्षी दलों पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि UCC का विरोध मुस्लिम वोट बैंक की राजनीति के चलते किया जा रहा है। मौर्य ने यह भी कहा कि समान नागरिक संहिता भारतीय जनता पार्टी का पुराना वैचारिक मुद्दा है।
UCC को लेकर केशव मौर्य का बयान
केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि UCC को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के पीछे वोट बैंक की राजनीति है। उनके मुताबिक कुछ राजनीतिक दल मुस्लिम मतदाताओं को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता का विरोध कर रहे हैं।
मौर्य का यह बयान ऐसे समय आया है जब देश के कई राज्यों में UCC को लागू करने को लेकर राजनीतिक बहस तेज है। उत्तर प्रदेश में भी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यह मुद्दा राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बनता जा रहा है।
BJP का वैचारिक मुद्दा है UCC: मौर्य
इससे पहले आजमगढ़ में बोलते हुए केशव प्रसाद मौर्य ने UCC को बीजेपी का वैचारिक मुद्दा बताया था। उन्होंने कहा था कि बीजेपी और NDA शासित राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। उनके मुताबिक जिन राज्यों में फिलहाल बीजेपी या NDA की सरकार नहीं है, वहां भविष्य में सरकार बनने के बाद इसे लागू करने की दिशा में कदम उठाया जाएगा।
मौर्य ने UCC को भारतीय जनसंघ के समय से बीजेपी के वैचारिक मुद्दों का हिस्सा बताया।
UCC पर विपक्ष का क्या रुख है?
UCC को लेकर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से अलग-अलग आपत्तियां सामने आई हैं। AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने हालिया बयानों में UCC का विरोध करते हुए इसे मुस्लिम समुदाय के अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता से जोड़कर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बीजेपी और केंद्र सरकार पर UCC के जरिए मुस्लिम समुदाय को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
वहीं, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने भी UCC के विरोध में आंदोलन और कानूनी रास्ता अपनाने की बात कही है।
क्या है UCC?
Uniform Civil Code यानी समान नागरिक संहिता का उद्देश्य नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों से जुड़े कानूनों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इसके दायरे में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े विषय आ सकते हैं।
UCC को लेकर देश में लंबे समय से राजनीतिक और कानूनी बहस होती रही है। समर्थक इसे समान नागरिक अधिकारों और एकरूप कानूनी व्यवस्था से जोड़ते हैं, जबकि विरोध करने वाले पक्ष व्यक्तिगत कानूनों, धार्मिक स्वतंत्रता और विभिन्न समुदायों की परंपराओं से जुड़े सवाल उठाते हैं।
यूपी की राजनीति में क्यों अहम है UCC?
उत्तर प्रदेश देश का सबसे अधिक आबादी वाला राज्य है और यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में UCC जैसे मुद्दे का राजनीतिक महत्व बढ़ गया है।
बीजेपी की ओर से UCC को वैचारिक मुद्दे के तौर पर लगातार उठाया जा रहा है, जबकि विपक्षी दल और कुछ सामाजिक-धार्मिक संगठन इसके प्रावधानों और संभावित प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में UCC यूपी की चुनावी बहस में कितना प्रमुख मुद्दा बनता है, यह राजनीतिक दलों के रुख और राज्य में चल रही बहस पर निर्भर करेगा।
फिलहाल केशव प्रसाद मौर्य के बयान ने UCC को लेकर बीजेपी और विपक्ष के बीच चल रही राजनीतिक बहस को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।










