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Hariyali Teej: हरीयाली तीज पर हरी चूड़ियों का खास महत्व, जानें त्यौहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक झलक

Hariyali Teej: हरीयाली तीज पर हरी चूड़ियों का खास महत्व, जानें त्यौहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक झलक
Hariyali Teej: हरीयाली तीज पर हरी चूड़ियों का खास महत्व, जानें त्यौहार की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक झलक

नई दिल्ली: उत्तर भारत में महिलाओं द्वारा बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाने वाला पर्व हरीयाली तीज इस बार रविवार, 27 जुलाई 2025 को धूमधाम से मनाया जाएगा। यह त्योहार मानसून के मौसम में आता है और भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक माना जाता है। इस अवसर पर महिलाएं हरी चूड़ियां पहनती हैं, हरे रंग के वस्त्र धारण करती हैं और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करती हैं।

हरीयाली तीज विवाह में प्रेम, आशा और खुशियों का प्रतीक है। अविवाहित महिलाएं अच्छे जीवनसाथी की कामना करती हैं, जबकि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और स्वास्थ्य की प्रार्थना करती हैं। इस दिन पारंपरिक मिठाइयां बनती हैं, झूलों की सजा होती है और लोक गीतों तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से त्योहार की रौनक बढ़ाई जाती है।

हरी चूड़ियों का महत्व

हरी चूड़ियां पहनने का तीज पर्व में विशेष महत्व है। हरा रंग नई शुरुआत और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है। मानसून के मौसम में हरीयाली प्रकृति की ताजगी और जीवन की नवीनता दर्शाती है। इस रंग का पहनावा जीवन में खुशियों, प्रेम और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देता है।

शादीशुदा महिलाएं हरी चूड़ियां अपने पति की दीर्घायु और खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना से पहनती हैं, वहीं अविवाहित लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए प्रार्थना करती हैं। यह पर्व माता पार्वती की भक्ति और प्रेम को भी सम्मानित करता है। हरा रंग उनके धैर्य और स्नेह की प्रतीक्षा को दर्शाता है।

आध्यात्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से भी हरे रंग का विशेष महत्व है। इसे शांति, एकता और परिवार में मेलजोल बढ़ाने वाला माना जाता है। यही कारण है कि तीज के दिन हरे रंग का विशेष महत्व होता है।

तीज के पारंपरिक अनुष्ठान

तीज के दिन महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, यानी पूरे दिन पानी नहीं पीतीं। वे सुंदर श्रृंगार करती हैं, जिसमें सोलह श्रृंगार शामिल होते हैं, मेहंदी लगाती हैं और हरे रंग की साड़ी पहनती हैं। परिवार के सदस्य उन्हें सिधारा के रूप में कपड़े, मिठाइयां और चूड़ियां भेंट करते हैं।

हरीयाली तीज न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह महिलाओं की सांस्कृतिक एकता और प्रेम की भावना को भी सुदृढ़ करता है। इस त्योहार के माध्यम से महिलाएं जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और सुख की कामना करती हैं।

Bhavishya
एक विचारशील लेखक, जो समाज की नब्ज को समझता है और उसी के आधार पर शब्दों को पंख देता है। लिखता है वो, केवल किताबों तक ही नहीं, बल्कि इंसानों की कहानियों, उनकी संघर्षों और उनकी उम्मीदों को भी। पढ़ना उसका जुनून है, क्योंकि उसे सिर्फ शब्दों का संसार ही नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगियों का हर पहलू भी समझने की इच्छा है।