
नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा लगाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने कहा है कि ऐसे अभद्र और भ्रामक शब्दों का उपयोग करना संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अपमान है।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने सोमवार को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि चुनाव आयोग को राजनीतिक उद्देश्यों के लिए निशाना बनाना भारत के मतदाताओं का अपमान है। उन्होंने कहा, “चुनाव आयोग मतदाताओं के साथ खड़ा है, न कि किसी पार्टी के साथ।”
“हमारे लिए सत्ताधारी और विपक्ष एक समान हैं” – ज्ञानेश कुमार
प्रेस वार्ता में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी के साथ मौजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ने स्पष्ट किया,
“हमारे लिए हर राजनीतिक पार्टी समान है। हम अपनी संवैधानिक जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटेंगे।”
यह बयान उस दिन आया जब राहुल गांधी ने बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत की और चुनाव आयोग पर सवाल उठाए।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर सफाई
मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि बिहार जैसे चुनावी राज्यों में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण राजनीतिक दलों की मांगों पर शुरू किया गया है ताकि डेटाबेस में सुधार किया जा सके।
उन्होंने कहा,
“ड्राफ्ट मतदाता सूची में आपत्तियां दर्ज करने के लिए एक महीने की खुली समय-सीमा है। हम सभी राजनीतिक दलों से अपील करते हैं कि यदि कोई गलती है, तो वे आयोग को सूचित करें। हमारे दरवाजे सभी के लिए समान रूप से खुले हैं।”
“जमीनी कार्यकर्ताओं की आवाज़ नहीं पहुंच रही नेतृत्व तक”
ज्ञानेश कुमार ने कहा कि बूथ लेवल अधिकारी, मतदाता, और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि पारदर्शिता से काम कर रहे हैं। उन्होंने चिंता जताई कि
“ऐसा लगता है कि इन प्रतिनिधियों की बात पार्टी नेतृत्व तक नहीं पहुंच रही, या फिर जानबूझकर ग़लत जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है।”
मुख्य चुनाव आयुक्त ने 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि
“मशीन-रीडेबल मतदाता सूची मतदाता की गोपनीयता का उल्लंघन कर सकती है। हाल ही में कई मतदाताओं की तस्वीरें बिना अनुमति के मीडिया में साझा की गईं। क्या चुनाव आयोग को किसी मतदाता की CCTV फुटेज साझा करनी चाहिए?”
राहुल गांधी की ओर से उठाए गए सवालों के बीच चुनाव आयोग ने न सिर्फ स्पष्ट जवाब दिया है, बल्कि यह भी संदेश दिया है कि वह अपनी निष्पक्षता और पारदर्शिता से पीछे नहीं हटेगा। आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से रचनात्मक सहयोग की अपील की है ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत किया जा सके।