नई दिल्ली: बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चुनाव आयोग की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने आयोग पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यादव ने चुनाव आयोग पर “कोरी बातों और ढिठाई” का आरोप लगाते हुए कहा कि आयोग ने विपक्ष द्वारा उठाए गए अहम सवालों को नजरअंदाज कर दिया।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने रविवार को दिल्ली में प्रेस वार्ता कर SIR का बचाव किया और कहा कि इसका उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग के लिए सभी राजनीतिक दल समान हैं और वह पक्षपात नहीं करता।
हालांकि, योगेंद्र यादव ने इस प्रेस वार्ता को “एक दिखावा” करार देते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव आयोग से स्पष्ट और पारदर्शी जवाबों की उम्मीद की थी, लेकिन आयोग ने केवल टालने वाले जवाब दिए। उन्होंने आयोग से 10 सवाल पूछे, जिनके उत्तर अब तक नहीं मिले हैं।
योगेंद्र यादव द्वारा उठाए गए प्रमुख सवाल इस प्रकार हैं:
- चुनाव आयोग ने SIR शुरू करने से पहले राजनीतिक दलों से परामर्श क्यों नहीं किया?
- आयोग की अपनी गाइडलाइन के अनुसार चुनावी वर्ष में गहन पुनरीक्षण नहीं किया जाना चाहिए, फिर बिहार में इसका उल्लंघन क्यों हुआ?
- बाढ़ जैसी स्थिति के बीच, बिना पूर्व सूचना और तैयारी के बिहार में SIR की इतनी जल्दी क्यों की गई?
- 25 जून से 25 जुलाई के बीच SIR के दौरान बिहार में कितने नए मतदाता जोड़े गए?
- कितने नामांकन फॉर्म बिना किसी दस्तावेज के दाखिल किए गए?
- कितने फॉर्म BLO द्वारा “अनुशंसित नहीं” के रूप में चिह्नित किए गए और किन आधारों पर?
- SIR के दौरान मतदाता सूची में कितने विदेशी पाए गए?
- राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद मतदाता सूची के प्रारूप में बदलाव क्यों किया गया?
- केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर से हलफनामा क्यों नहीं मांगा गया?
- पूर्व में दाखिल हलफनामों (जैसे समाजवादी पार्टी द्वारा) पर अब तक कोई जांच क्यों नहीं की गई?
योगेंद्र यादव ने कहा कि इन प्रश्नों का उत्तर न देना लोकतांत्रिक प्रक्रिया और मतदाताओं के भरोसे को कमजोर करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जवाबदेही से बच रहा है और पारदर्शिता के अपने दावों पर खरा नहीं उतर रहा।
यह बयान ऐसे समय आया है जब विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी 2024 लोकसभा चुनावों में बड़े पैमाने पर ‘वोट चोरी’ के आरोप लगाए हैं और बिहार में चल रही SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं। देश में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।