सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश में आवारा कुत्तों के लिए क्या क्या, पशु प्रेमी को जमा करने होंगे 2 लाख रुपये

सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश में आवारा कुत्तों के लिए क्या क्या, पशु प्रेमी को जमा करने होंगे 2 लाख रुपये
सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश में आवारा कुत्तों के लिए क्या क्या, पशु प्रेमी को जमा करने होंगे 2 लाख रुपये

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने आज अपने 11 अगस्त के उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र से पकड़े गए आवारा कुत्तों को वापस सड़कों पर छोड़ने से मना किया गया था। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट किया कि कुत्तों को नसबंदी, टीकाकरण और डीवॉर्मिंग के बाद उसी स्थान पर वापस छोड़ा जाएगा, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। हालांकि, जो कुत्ते रेबीज से संक्रमित हैं या आक्रामक व्यवहार दिखाते हैं, उन्हें शेल्टर में रखा जाएगा।

आज के फैसले की 10 अहम बातें इस प्रकार हैं:

  1. संशोधित रिहाई आदेश:
    केवल उन्हीं कुत्तों को छोड़ा जाएगा जो पूरी तरह से नसबंद, टीकाकरण और डीवॉर्मिंग प्रक्रिया से गुजर चुके हैं। आक्रामक या रेबीज संक्रमित कुत्तों को अलग शेल्टर में रखा जाएगा।
  2. सार्वजनिक स्थलों पर खाना खिलाने पर प्रतिबंध:
    अब पूरे देश में सार्वजनिक स्थानों और सड़कों पर आवारा कुत्तों को खाना खिलाने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
  3. निर्धारित फीडिंग ज़ोन:
    प्रत्येक नगर निगम वार्ड में कुत्तों को भोजन देने के लिए विशेष फीडिंग ज़ोन बनाए जाएंगे। इन स्थानों पर स्पष्ट साइनबोर्ड लगाए जाएंगे ताकि जनता को जानकारी मिल सके।
  4. हेल्पलाइन की व्यवस्था:
    नगर निकायों को एक हेल्पलाइन नंबर स्थापित करना होगा, जिस पर लोग आवारा कुत्तों के प्रबंधन या फीडिंग नियमों के उल्लंघन की शिकायत कर सकें।
  5. प्रशासनिक कार्य में बाधा डालना अपराध:
    अगर कोई व्यक्ति या संस्था नगर निकाय के कार्य में बाधा डालती है, तो उस पर कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
  6. याचिकाकर्ताओं से सुरक्षा जमा:
    जो पशु प्रेमी या एनजीओ इस मामले में याचिका दायर कर रहे हैं, उन्हें क्रमश: 25,000 रुपये और 2 लाख रुपये कोर्ट में जमा कराने होंगे, जो कुत्तों के लिए बुनियादी ढांचे को सुधारने में उपयोग किए जाएंगे।
  7. कुत्तों को गोद लेने की प्रक्रिया:
    अब नागरिक नगर निगम से आवारा कुत्तों को गोद लेने के लिए आवेदन कर सकते हैं। ऐसे कुत्तों को टैग किया जाएगा और उनकी निगरानी की जाएगी। गोद लिए गए कुत्ते दोबारा सड़कों पर नहीं छोड़े जा सकेंगे।
  8. कंप्लायंस पर हलफनामा:
    सभी नगर निगमों को यह बताने के लिए हलफनामा दायर करना होगा कि उनके पास कितने संसाधन हैं जैसे कुत्ता पकड़ने वाले कर्मचारी, पिंजरे, शेल्टर आदि।
  9. देशव्यापी विस्तार:
    सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को दिल्ली-एनसीआर से आगे बढ़ाकर पूरे देश में लागू करने का निर्देश दिया है। देश के सभी राज्य, केंद्रशासित प्रदेश और स्थानीय निकायों को अब एनीमल बर्थ कंट्रोल (ABC) नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
  10. सख्त निगरानी और रिपोर्टिंग:
    नगर निकायों को यह रिकॉर्ड रखना होगा कि कितने कुत्तों को पकड़ा गया, कितनों की नसबंदी, टीकाकरण हुआ, और कितनों को छोड़ा गया। ये आंकड़े कोर्ट में नियमित रूप से प्रस्तुत करने होंगे।

पृष्ठभूमि

यह मामला एक समाचार रिपोर्ट के बाद स्वतः संज्ञान में लिया गया था, जिसमें दिल्ली में आवारा कुत्तों से बच्चों को हो रहे खतरे को उजागर किया गया था। सुप्रीम कोर्ट की दो-न्यायाधीशीय पीठ ने 11 अगस्त को सभी आवारा कुत्तों को आठ सप्ताह में शेल्टर में भेजने का आदेश दिया था। इस फैसले के खिलाफ पशु अधिकार कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों ने आपत्ति जताई थी।

13 अगस्त को यह मामला तीन-न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा गया और अब कोर्ट ने आज का नया आदेश जारी किया है, जो कि अधिक संतुलित और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने वाला बताया जा रहा है।

यह निर्णय जन सुरक्षा और पशु कल्याण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।