यूपी 2027: दादरी और नोएडा में BJP का दबदबा, क्या SP बदल पाएगी चुनावी तस्वीर?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में पश्चिमी यूपी की विधानसभा सीटों का अपना अलग महत्व है। इनमें गौतमबुद्ध नगर जिले की दादरी और नोएडा विधानसभा सीटें भी खास हैं। दोनों सीटों के चुनावी नतीजे पिछले कुछ चुनावों में बीजेपी के मजबूत प्रदर्शन की तस्वीर दिखाते हैं। 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अब सवाल यही है कि क्या यह चुनावी पैटर्न आगे भी जारी रहेगा या विपक्ष इन सीटों पर अपनी स्थिति बदलने में कामयाब होगा?

दादरी विधानसभा सीट पर 2022 में बीजेपी के तेजपाल सिंह नागर ने समाजवादी पार्टी के राजकुमार भाटी को 1,38,218 वोटों के अंतर से हराया था। वहीं नोएडा सीट पर बीजेपी के पंकज सिंह ने सपा के सुनील चौधरी को 1,81,513 वोटों के बड़े अंतर से हराया।

इन दोनों सीटों की राजनीति को समझने के लिए पिछले तीन विधानसभा चुनावों के नतीजों पर नजर डालना जरूरी है।

दादरी: बीजेपी और बसपा के बीच मुकाबले से BJP की मजबूत पकड़ तक

दादरी विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी पुराना और दिलचस्प रहा है। पूर्व विधायक महेंद्र सिंह भाटी 1985, 1989 और 1991 में दादरी से विधायक चुने गए थे। 13 सितंबर 1992 को उनकी हत्या कर दी गई थी। इस मामले की जांच बाद में सीबीआई को सौंपी गई और लंबे समय तक यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में चर्चा में रहा।

हाल के चुनावों में दादरी की राजनीति में बीजेपी और बसपा का प्रभाव देखने को मिला। 2007 और 2012 में बसपा ने जीत दर्ज की, जबकि 2017 और 2022 में बीजेपी के तेजपाल सिंह नागर ने लगातार दो चुनाव जीते। उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड के मुताबिक 2002 और 1996 में भी बीजेपी के नवाब सिंह नागर यहां से विधायक रहे थे।

दादरी विधानसभा चुनाव 2012

2012 में दादरी सीट से बसपा के सतवीर सिंह गुर्जर विजयी हुए थे। उन्हें 81,137 वोट मिले, जबकि बीजेपी के नवाब सिंह नागर को 43,840 वोट मिले। जीत का अंतर 37,297 वोट रहा। कांग्रेस के समीर भाटी 37,764 वोटों के साथ तीसरे और सपा के राजकुमार भाटी 23,191 वोटों के साथ चौथे स्थान पर रहे।

क्रमप्रत्याशीपार्टीवोट
1सतवीर सिंह गुर्जरBSP81,137
2नवाब सिंह नागरBJP43,840
3समीर भाटीINC37,764
4राजकुमार भाटीSP23,191

जीत का अंतर: 37,297 वोट

दादरी विधानसभा चुनाव 2017

2017 में तस्वीर बदल गई। बीजेपी के तेजपाल सिंह नागर ने 1,41,226 वोट हासिल किए और बसपा के सतवीर सिंह गुर्जर को 80,177 वोटों से हराया। कांग्रेस के समीर भाटी तीसरे स्थान पर रहे।

क्रमप्रत्याशीपार्टीवोट
1तेजपाल सिंह नागरBJP1,41,226
2सतवीर सिंह गुर्जरBSP61,049
3समीर भाटीINC39,975
4रविंद्र सिंह भाटीRLD10,373

जीत का अंतर: 80,177 वोट

दादरी विधानसभा चुनाव 2022

2022 में बीजेपी ने दादरी में अपनी बढ़त और मजबूत की। तेजपाल सिंह नागर को 2,18,068 वोट मिले, जबकि सपा के राजकुमार भाटी को 79,850 वोट मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 1,38,218 वोट रहा। बसपा के मनबीर सिंह 40,456 वोटों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।

क्रमप्रत्याशीपार्टीवोट
1तेजपाल सिंह नागरBJP2,18,068
2राजकुमार भाटीSP79,850
3मनबीर सिंहBSP40,456
4दीपक कुमार भाटी चोटीवालाINC5,392

जीत का अंतर: 1,38,218 वोट

तीन चुनावों के आंकड़े बताते हैं कि दादरी में 2012 से 2022 के बीच चुनावी तस्वीर में बड़ा बदलाव आया। 2012 में जहां बसपा ने बीजेपी को हराया था, वहीं 2017 और 2022 में बीजेपी ने लगातार दो बड़ी जीत दर्ज कीं।

दादरी के चुनावी समीकरण में गुर्जर समाज की राजनीतिक भूमिका अक्सर चर्चा में रहती है। हालांकि अलग-अलग स्रोतों में जातिवार मतदाताओं की संख्या को लेकर अलग-अलग अनुमान मिलते हैं, इसलिए किसी एक आंकड़े को आधिकारिक मतदाता संख्या मानना उचित नहीं होगा। चुनावी स्तर पर इतना जरूर कहा जा सकता है कि उम्मीदवार की जातीय पहचान, स्थानीय संगठन और अलग-अलग सामाजिक समूहों का समर्थन यहां चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकता है।

नोएडा: 2012 से लगातार BJP की जीत

अब बात नोएडा विधानसभा सीट की। परिसीमन के बाद नोएडा एक अलग विधानसभा क्षेत्र के रूप में सामने आया और 2012 में यहां पहला विधानसभा चुनाव हुआ। उस चुनाव में बीजेपी के महेश कुमार शर्मा ने जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के 2012 के आंकड़ों के अनुसार उन्हें 77,319 वोट मिले, जबकि बसपा के ओमदत्त शर्मा को 49,643 वोट मिले।

2014 में महेश शर्मा के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद नोएडा सीट पर उपचुनाव हुआ। इसमें बीजेपी की विमला बाथम ने सपा की काजल शर्मा को हराकर सीट बीजेपी के पास बरकरार रखी।

नोएडा विधानसभा चुनाव 2012

क्रमप्रत्याशीपार्टीवोट
1महेश कुमार शर्माBJP77,319
2ओमदत्त शर्माBSP49,643
3सुनील चौधरीSP42,071

जीत का अंतर: 27,676 वोट

2014 उपचुनाव

क्रमप्रत्याशीपार्टीवोट
1विमला बाथमBJP1,00,433
2काजल शर्माSP41,481

जीत का अंतर: 58,952 वोट

नोएडा विधानसभा चुनाव 2017

2017 में बीजेपी ने पंकज सिंह को मैदान में उतारा। पंकज सिंह ने 1,62,417 वोट हासिल किए, जबकि सपा के सुनील चौधरी को 58,401 वोट मिले। जीत का अंतर 1,04,016 वोट रहा।

क्रमप्रत्याशीपार्टीवोट
1पंकज सिंहBJP1,62,417
2सुनील चौधरीSP58,401
3रविकांतBSP27,365

जीत का अंतर: 1,04,016 वोट

नोएडा विधानसभा चुनाव 2022

2022 में बीजेपी के पंकज सिंह ने अपने पिछले प्रदर्शन से भी बड़ी जीत दर्ज की। उन्हें 2,44,319 वोट मिले, जबकि सपा के सुनील चौधरी को 62,806 वोट मिले। जीत का अंतर 1,81,513 वोट रहा और बीजेपी का वोट शेयर करीब 70 प्रतिशत रहा।

क्रमप्रत्याशीपार्टीवोट
1पंकज सिंहBJP2,44,319
2सुनील चौधरीSP62,806
3कृपा राम शर्माBSP16,292
4पंखुड़ी पाठकINC13,494
5पंकज अवानाAAP6,551

जीत का अंतर: 1,81,513 वोट

दादरी और नोएडा के आंकड़े क्या बताते हैं?

अगर पिछले तीन विधानसभा चुनावों को एक साथ देखें तो दोनों सीटों की तस्वीर अलग-अलग तरीके से सामने आती है। दादरी में 2012 में बसपा की जीत हुई, लेकिन 2017 और 2022 में बीजेपी ने लगातार बड़े अंतर से जीत दर्ज की। नोएडा में 2012 से ही बीजेपी उम्मीदवारों की जीत का सिलसिला जारी है।

सीट2012 विजेता2017 विजेता2022 विजेता
दादरीBSP – सतवीर सिंह गुर्जरBJP – तेजपाल सिंह नागरBJP – तेजपाल सिंह नागर
नोएडाBJP – महेश कुमार शर्माBJP – पंकज सिंहBJP – पंकज सिंह

इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि 2022 में दोनों सीटों पर बीजेपी और सपा के बीच जीत का अंतर काफी बड़ा था। दादरी में अंतर 1.38 लाख से अधिक और नोएडा में 1.81 लाख से अधिक रहा।

2027 में क्या बदल सकता है समीकरण?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2027 में क्या दादरी और नोएडा का चुनावी गणित 2022 जैसा ही रहेगा?

सिर्फ पुराने चुनावी आंकड़ों के आधार पर इसका जवाब देना संभव नहीं है। विधानसभा चुनाव तक उम्मीदवारों, गठबंधनों, स्थानीय मुद्दों और राजनीतिक अभियानों में बदलाव हो सकते हैं। 2022 के बाद लोकसभा चुनाव भी हो चुके हैं और मतदाताओं का रुख विधानसभा तथा लोकसभा चुनावों में अलग-अलग परिस्थितियों में सामने आता है।

दादरी में जातीय और स्थानीय राजनीतिक समीकरण महत्वपूर्ण रह सकते हैं, जबकि नोएडा में शहरी मतदाता, विकास, बुनियादी सुविधाएं, रोजगार, ट्रैफिक, आवास और स्थानीय प्रशासन जैसे मुद्दे चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि इन मुद्दों का वास्तविक चुनावी प्रभाव 2027 के दौरान सामने आने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर करेगा।

समाजवादी पार्टी के लिए चुनौती यह होगी कि वह इन सीटों पर अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर स्थिति कैसे बनाती है। वहीं बीजेपी के सामने 2017 और 2022 में बने अपने मजबूत चुनावी आधार को बनाए रखने की चुनौती होगी।

फिलहाल चुनाव अभी दूर है और 2022 के आंकड़े सिर्फ पिछली चुनावी तस्वीर बताते हैं। 2027 में कौन-सा सामाजिक समीकरण कितना प्रभावी होगा, यह उम्मीदवारों, गठबंधन, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर निर्भर करेगा।

गौतमबुद्ध नगर की दादरी और नोएडा सीट इसलिए भी दिलचस्प रहेंगी क्योंकि एक तरफ दादरी में पिछले एक दशक में चुनावी समीकरण तेजी से बदले हैं, तो दूसरी तरफ नोएडा में बीजेपी लगातार मजबूत स्थिति में रही है। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव में इन दोनों सीटों पर होने वाला मुकाबला पश्चिमी यूपी की राजनीतिक तस्वीर को समझने के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

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