यूपी 2027: इन 4 जिलों में 2022 में BJP का खाता नहीं खुला, क्या बदलेगा सियासी गणित?

उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो चुकी हैं। बीजेपी और समाजवादी पार्टी समेत प्रमुख राजनीतिक दल संगठन को मजबूत करने और उन इलाकों पर फोकस करने में जुटे हैं, जहां पिछले चुनावों में उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली थी। पूर्वांचल और मध्य-पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ जिले इस लिहाज से खास महत्व रखते हैं।

गाजीपुर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर और कौशांबी ऐसे ही चार जिले हैं, जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी एक भी सीट नहीं जीत सकी थी। इन चार जिलों में कुल 25 विधानसभा सीटें हैं। 2022 में गाजीपुर की सभी 7 सीटें सपा और उसकी सहयोगी सुभासपा के खाते में गई थीं, जबकि आजमगढ़ की सभी 10, अंबेडकरनगर की सभी 5 और कौशांबी की सभी 3 सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी।

अब 2027 के चुनाव से पहले इन जिलों का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यहां कई महत्वपूर्ण सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की। गाजीपुर से अफजाल अंसारी, आजमगढ़ से धर्मेंद्र यादव, अंबेडकरनगर से लालजी वर्मा और कौशांबी से पुष्पेंद्र सरोज ने जीत दर्ज की।

गाजीपुर: 7 में से 7 सीटों पर विपक्षी गठबंधन की जीत

सबसे पहले बात गाजीपुर की। 2022 में जिले की सातों विधानसभा सीटों पर सपा और सुभासपा के उम्मीदवार विजयी रहे। उस समय ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में थी। जखनियां और जहूराबाद सीट सुभासपा के खाते में गईं, जबकि बाकी पांच सीटों पर सपा ने जीत दर्ज की।

इन नतीजों में सबसे बड़ा अंतर जहूराबाद में रहा, जहां ओम प्रकाश राजभर ने 45,632 वोटों से जीत दर्ज की। जखनियां में जीत का अंतर 36,865 और सैदपुर में 36,635 वोट रहा। जंगीपुर में अंतर 35,063 वोट था। वहीं गाजीपुर सदर सीट पर मुकाबला काफी करीबी रहा और सपा उम्मीदवार ने 1,692 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की। मोहम्मदाबाद और जमानिया में भी सपा उम्मीदवारों ने क्रमशः 18,759 और 22,456 वोटों के अंतर से जीत हासिल की।

2024 में भी गाजीपुर लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के अफजाल अंसारी ने जीत दर्ज की। ऐसे में 2027 से पहले यह जिला दोनों प्रमुख दलों के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र बना हुआ है।

हालांकि 2022 और 2027 के बीच एक बड़ा राजनीतिक बदलाव हो चुका है। ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा अब बीजेपी के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है। राजभर 2027 को लेकर एनडीए के पक्ष में दावे भी कर चुके हैं। ऐसे में गाजीपुर में 2022 के गठबंधन समीकरण और मौजूदा गठबंधन व्यवस्था के बीच अंतर देखना महत्वपूर्ण होगा।

आजमगढ़: 10 सीटों पर सपा की क्लीन स्वीप

गाजीपुर के बाद नजर आजमगढ़ पर जाती है। 2022 में जिले की सभी 10 विधानसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी। इन सीटों पर जीत का अंतर भी अधिकांश मामलों में काफी बड़ा रहा।

अतरौलिया में सपा की जीत का अंतर 17,247 वोट रहा, जबकि गोपालपुर में 24,307 और सगड़ी में 22,515 वोट का अंतर था। मुबारकपुर में सपा ने 29,103 वोटों से जीत हासिल की। आजमगढ़ सदर में अंतर 16,036 वोट रहा।

निजामाबाद में सपा उम्मीदवार ने 34,187 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि फूलपुर-पवई में अंतर 25,306 वोट रहा। दीदारगंज में 13,561, लालगंज में 14,733 और मेहनगर में 14,149 वोटों से सपा उम्मीदवार विजयी रहे।

आजमगढ़ की तस्वीर 2024 के लोकसभा चुनाव में भी सपा के पक्ष में रही। समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव ने बीजेपी के दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ को हराकर लोकसभा सीट जीती। धर्मेंद्र यादव को 5,08,239 वोट मिले, जबकि निरहुआ को 3,47,204 वोट प्राप्त हुए। जीत का अंतर 1,61,035 वोट रहा।

यही वजह है कि 2027 की तैयारियों में आजमगढ़ उन जिलों में शामिल है, जहां बीजेपी के लिए 2022 के प्रदर्शन में बदलाव लाना एक प्रमुख राजनीतिक चुनौती होगी। दूसरी ओर सपा के सामने अपने पुराने चुनावी आधार को बनाए रखने की चुनौती रहेगी।

अंबेडकरनगर: पांचों सीटों पर सपा की जीत

अंबेडकरनगर में भी 2022 का चुनाव समाजवादी पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहा। जिले की सभी पांच विधानसभा सीटों—कटेहरी, टांडा, आलापुर, जलालपुर और अकबरपुर—पर सपा उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।

कटेहरी में लालजी वर्मा ने 7,696 वोटों से जीत हासिल की। टांडा में जीत का अंतर 32,097 वोट रहा। आलापुर में सपा उम्मीदवार 9,383 वोटों से जीते, जबकि जलालपुर में जीत का अंतर 22,432 वोट रहा। अकबरपुर सीट पर राम अचल राजभर ने 12,336 वोटों से जीत दर्ज की।

अंबेडकरनगर की राजनीति में 2022 से पहले हुए दल-बदल भी चर्चा में रहे थे। लालजी वर्मा और राम अचल राजभर जैसे बसपा के प्रमुख नेता समाजवादी पार्टी में शामिल हुए थे। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी अंबेडकरनगर सीट से लालजी वर्मा ने जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार उनकी जीत का अंतर 1,37,247 वोट रहा।

2027 में इस जिले का समीकरण इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां उम्मीदवार, स्थानीय संगठन और सामाजिक गठजोड़ चुनावी मुकाबले को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक हो सकते हैं। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि 2022 जैसा परिणाम दोहराया जाएगा।

कौशांबी: सिराथू में हाई-प्रोफाइल मुकाबला

चौथा जिला है कौशांबी। यहां कुल तीन विधानसभा सीटें हैं और 2022 में तीनों सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार विजयी रहे थे।

सबसे ज्यादा चर्चा सिराथू विधानसभा सीट की हुई थी। यहां बीजेपी के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और सपा समर्थित उम्मीदवार डॉ. पल्लवी पटेल के बीच मुकाबला हुआ। पल्लवी पटेल ने 7,337 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

मंझनपुर में सपा के इंद्रजीत सरोज ने 23,878 वोटों से जीत हासिल की, जबकि चायल में पूजा पाल 13,209 वोटों के अंतर से विजयी रहीं। 2024 के लोकसभा चुनाव में कौशांबी लोकसभा सीट से भी समाजवादी पार्टी के पुष्पेंद्र सरोज ने जीत दर्ज की। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक उनकी जीत का अंतर 1,03,944 वोट था।

कौशांबी में 2027 से पहले एक और तथ्य चर्चा में है। 2022 में सपा के खाते में गई चायल सीट उन सीटों में शामिल है, जहां 2027 के लिए बीजेपी टिकट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां सामने आई हैं।

25 सीटों का आंकड़ा क्यों महत्वपूर्ण है?

गाजीपुर की 7, आजमगढ़ की 10, अंबेडकरनगर की 5 और कौशांबी की 3 विधानसभा सीटों को जोड़ें तो कुल 25 सीटें होती हैं। 2022 में इन सभी 25 सीटों पर बीजेपी का कोई उम्मीदवार विजयी नहीं हुआ था। यह आंकड़ा इन जिलों को 2027 की चुनावी रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाता है।

लेकिन सिर्फ 2022 के नतीजों के आधार पर 2027 का अनुमान लगाना सही नहीं होगा। पिछले चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में गठबंधन बदले हैं, कई नेताओं की राजनीतिक स्थिति बदली है और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी अलग-अलग क्षेत्रों में मतदाताओं का रुख देखने को मिला है।

बीजेपी 2027 के लिए बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने और स्थानीय नेताओं तथा कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय बढ़ाने पर जोर दे रही है। हाल के महीनों में पार्टी ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में संगठनात्मक बैठकों और चुनावी तैयारियों को तेज किया है।

वहीं समाजवादी पार्टी भी PDA यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक गठजोड़ को विस्तार देने की कोशिश कर रही है। पार्टी की ओर से बीजेपी के मजबूत इलाकों में भी कार्यक्रमों

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