Chitra Tripathi और Ragini Nayak के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस, क्या है पूरा मामला

Chitra Tripathi और Ragini Nayak के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस, क्या है पूरा मामला
Chitra Tripathi और Ragini Nayak के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस, क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली: हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पत्रकार चित्रा त्रिपाठी और कांग्रेस प्रवक्ता रागिनी नायक के बीच एक तीखी बहस छिड़ गई है, जो अब ‘एंटरटेनमेंट विद पॉलिटिक्स’ का रूप ले चुकी है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब रागिनी नायक ने चित्रा त्रिपाठी पर भाजपा का एजेंडा सेट करने का आरोप लगाते हुए एक पुराना वीडियो शेयर किया।

विवाद की शुरुआत

24 अगस्त 2025 को रागिनी नायक ने ‘X’ पर एक पुराना वीडियो पोस्ट किया, जिसमें चित्रा त्रिपाठी को भाजपा का समर्थन करने और डिबेट में भाजपा के पक्ष को मजबूती से रखने के आरोपों का सामना करना पड़ा। रागिनी ने यह भी आरोप लगाया कि चित्रा त्रिपाठी ने भाजपा को कवर फायर देने का काम किया है। इस वीडियो को लेकर उन्होंने चित्रा को निशाना बनाते हुए यह आरोप लगाए कि वह भाजपा के एजेंडे के तहत काम कर रही हैं।

चित्रा त्रिपाठी का पलटवार

रागिनी के आरोपों के बाद, चित्रा त्रिपाठी ने अगले ही दिन 25 अगस्त 2025 को अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा, “आपके कितने बुरे दिन आ गए हैं रागिनी जी, मुझे ट्रोल करने के लिए अब सालों पुराना वीडियो निकालना पड़ रहा है। मैं तो रोज डिबेट करती हूँ, तो क्या आप मुझे रोज ट्रोल करेंगे?” चित्रा का यह बयान साफ तौर पर रागिनी नायक के आरोपों पर पलटवार था।

रागिनी नायक का जवाब

रागिनी नायक ने भी पलटवार करते हुए कहा, “भाजपा के चरणचुंबक पत्रकारों को अब जनता खुद ही ट्रोल कर रही है।” इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि वह चित्रा त्रिपाठी की डिबेट में बार-बार आकर उनके संघी एजेंडे को उजागर करती रहेंगी।

राजनीति और चुनाव का ज़िक्र

यह बहस यहीं पर खत्म नहीं हुई। 27 अगस्त 2025 को चित्रा त्रिपाठी ने रागिनी नायक पर तंज कसते हुए लिखा कि ट्रोलर्स के कारण ही रागिनी नायक को वज़ीरपुर विधानसभा चुनाव में केवल 6,000 वोट मिले थे और उनकी जमानत जब्त हो गई थी। इस तंज के साथ चित्रा ने रागिनी के चुनावी प्रदर्शन पर भी सवाल उठाया।

न्यूज डिबेट से सोशल मीडिया शो तक

यह विवाद अब सिर्फ एक राजनीतिक बहस नहीं बल्कि एक सोशल मीडिया शो बन गया है। दोनों नेता सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर लगातार तंज कसते हुए अपनी-अपनी बात रख रहे हैं, और अभी तक किसी ने भी इस बहस को खत्म करने का संकेत नहीं दिया है।

इस बहस ने एक बार फिर से यह साबित कर दिया कि सोशल मीडिया अब केवल राजनीतिक बयानबाजी का मंच नहीं है, बल्कि सार्वजनिक बहस और चुनावी रणनीतियों के लिए भी एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म बन चुका है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद और किस मोड़ पर जाता है और क्या इससे दोनों के राजनीतिक दृष्टिकोण पर कोई असर पड़ेगा।