“मतदाता अधिकार यात्रा” में अखिलेश यादव का साथ, विपक्ष की एकजुटता को मिला नया बल

"मतदाता अधिकार यात्रा" में अखिलेश यादव का साथ, विपक्ष की एकजुटता को मिला नया बल

सारण (बिहार) उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को बिहार के सारण जिले में कांग्रेस द्वारा आयोजित ‘मतदाता अधिकार यात्रा’ में भाग लेकर विपक्षी एकता को मजबूत संदेश दिया। यह यात्रा चुनाव आयोग की विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कांग्रेस द्वारा शुरू की गई है।

कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर अखिलेश यादव की इस पहल का स्वागत करते हुए उन्हें “लोकतंत्र बचाने की लड़ाई में एक सच्चे साथी” बताया।

संविधान ही संकट का समाधान: अखिलेश यादव

यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने कहा,

“संविधान ही देश की चुनौतियों का समाधान है, जो हमें संकटों से उबारने के साथ-साथ लोगों के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करने के लिए तलवार बनकर सामने आता है।”

उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि मौजूदा सत्ता लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश कर रही है, जिसे हर हाल में रोका जाना चाहिए।

विपक्षी दलों की एकजुटता

के.सी. वेणुगोपाल ने कहा कि अखिलेश यादव की मौजूदगी इस आंदोलन को नई ताकत और विश्वसनीयता देती है।

“उन्होंने हमेशा गरीबों, वंचितों और हाशिए पर पड़े समुदायों की आवाज़ बुलंद की है — न केवल उत्तर प्रदेश में, बल्कि पूरे देश में,” वेणुगोपाल ने कहा।

इस यात्रा में कांग्रेस नेता राहुल गांधी, राजद नेता तेजस्वी यादव, और लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य भी शामिल रहीं। उल्लेखनीय है कि रोहिणी ने पिछले लोकसभा चुनाव में सारण से चुनाव लड़ा था, लेकिन सफलता नहीं मिली थी।

मतदाता अधिकार यात्रा: लोकतंत्र बचाने का अभियान

17 अगस्त को सासाराम से शुरू हुई इस यात्रा का उद्देश्य बिहार में चुनाव आयोग द्वारा किए जा रहे विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के खिलाफ जनजागरूकता फैलाना है। कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दलों के सहयोग से चल रही यह यात्रा 1 सितंबर को पटना में समाप्त होगी।

इस दौरान यात्रा ने गया, नवादा, शेखपुरा, लखीसराय, मुंगेर, कटिहार, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया, पश्चिम और पूर्व चंपारण, सिवान, गोपालगंज और सारण जैसे जिलों को कवर किया है।

अखिलेश यादव की भागीदारी से साफ है कि INDIA गठबंधन अब 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर और अधिक संगठित तथा हमलावर रुख अपना रहा है। विपक्षी दलों का यह साझा प्रयास देश में लोकतंत्र की रक्षा और चुनावी न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।