
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र में सोमवार को राज्यसभा में विपक्ष की गैरमौजूदगी में इंडियन पोर्ट्स बिल, 2025 को पारित कर दिया गया। विपक्षी दलों ने बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चर्चा की मांग को ठुकराए जाने पर सदन से वॉकआउट किया था।
राज्यसभा की कार्यवाही सुबह विपक्षी हंगामे के कारण दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई थी। उपसभापति हरिवंश द्वारा नियम 267 के तहत विपक्ष द्वारा दी गई नोटिसों को स्वीकार न करने के फैसले के खिलाफ विपक्षी सांसदों ने विरोध जताया।
बाद में जब कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, तो पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने इंडियन पोर्ट्स बिल, 2025 पर चर्चा का उत्तर देते हुए कहा कि यह विधेयक भारत को 2047 तक वैश्विक समुद्री शक्ति बनाने की दिशा में एक मजबूत आधारशिला रखेगा। उन्होंने बताया कि यह बिल पोर्ट संचालन में अनुशासन, सतत विकास, राज्य और केंद्र सरकारों के सहयोग और तेज़ विवाद निपटान तंत्र की स्थापना करेगा।
सदन में AIADMK सांसद थम्बीदुरई ने तमिलनाडु की DMK सरकार पर पोर्ट्स के माध्यम से नशीले पदार्थों की तस्करी का आरोप लगाया, जिससे सदन में कुछ समय के लिए हंगामा हुआ। DMK सांसद तिरुचि शिवा ने इस पर आपत्ति जताते हुए इसे असंगत और अपमानजनक बताया।
राज्यसभा की कार्यवाही अंततः शाम 4:21 पर स्थगित कर दी गई।
इधर, लोकसभा में भी विपक्षी सांसदों ने बिहार में मतदाता सूची संशोधन को लेकर विरोध जारी रखा। हालांकि, सदन में भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की अंतरिक्ष यात्रा पर एक विशेष चर्चा आयोजित की गई। स्पेस विभाग के MoS डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि कैसे शुक्ला का मिशन और उस दौरान किए गए तीन स्वदेशी प्रयोग भारत के अंतरिक्ष विज्ञान को आगे ले जाने में मददगार होंगे।
उन्होंने बताया कि शुक्ला की भागीदारी Axiom-4 मिशन में एक ऐतिहासिक क्षण था और देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि कम से कम अंतरिक्ष और विज्ञान के विषय पर राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर चर्चा में भाग लें।
लोकसभा में विपक्ष का विरोध तब और तेज हो गया जब राहुल गांधी और अन्य नेताओं द्वारा चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर ‘वोट चोरी’ की अनदेखी का आरोप लगाया गया। विपक्षी INDIA गठबंधन ने कहा है कि वे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने पर विचार कर रहे हैं।
इस बीच, लोकसभा में जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2025 और भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025 भी पेश किए गए। जन विश्वास विधेयक का उद्देश्य छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर सरकार में विश्वास बढ़ाना और ‘Ease of Living’ को बढ़ावा देना है।
इस प्रकार, संसद का मानसून सत्र विपक्ष के विरोध और सरकार द्वारा प्रमुख विधेयकों की पेशकश के बीच टकराव की स्थिति में जारी है।