भारत-पाक संघर्ष में चीन की भूमिका पर जयशंकर की प्रतिक्रिया, कहा- “सीज़फायर के लिए भारतीय सेना का धन्यवाद बनता है”

भारत-पाक संघर्ष में चीन की भूमिका पर जयशंकर की प्रतिक्रिया, कहा- "सीज़फायर के लिए भारतीय सेना का धन्यवाद बनता है"

भारत-पाक संघर्ष में चीन की भूमिका पर जयशंकर की प्रतिक्रिया, कहा- "सीज़फायर के लिए भारतीय सेना का धन्यवाद बनता है"

बर्लिन: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच वर्तमान संघर्षविराम की पहल पाकिस्तानी पक्ष की ओर से 10 मई को की गई थी और इसके लिए भारतीय सशस्त्र बलों का धन्यवाद बनता है। जर्मनी के प्रमुख समाचार पत्र ‘एफएजेड’ को दिए एक साक्षात्कार में जयशंकर ने कहा कि यह समझौता भारत और पाकिस्तान के सैन्य कमांडरों के बीच “सीधे संपर्क” के माध्यम से हुआ।

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस संघर्षविराम का श्रेय अमेरिका को जाता है, तो उन्होंने स्पष्ट कहा, “तो मैं संघर्षविराम के लिए किसका धन्यवाद करूं? मैं भारतीय सेना का धन्यवाद करता हूं, क्योंकि यही भारतीय सैन्य कार्रवाई थी जिसने पाकिस्तान को यह कहने पर मजबूर किया कि हम अब रुकने को तैयार हैं।”

जयशंकर ने बताया कि भारत ने पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस और वायु रक्षा प्रणालियों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर दिया था, जिसके कारण पाकिस्तान को युद्धविराम की पहल करनी पड़ी।

चीन की भूमिका पर क्या बोले जयशंकर?

जब जयशंकर से पूछा गया कि क्या चीन ने भारत-पाक संघर्ष में कोई भूमिका निभाई, तो उन्होंने केवल पाकिस्तान की सैन्य प्रणाली में चीनी हथियारों की उपस्थिति का जिक्र किया।
उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के पास जो हथियार प्रणाली है, उनमें से कई चीनी मूल के हैं और दोनों देश आपस में बहुत घनिष्ठ हैं। आप इससे खुद निष्कर्ष निकाल सकते हैं।”

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत की प्रतिक्रिया

पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत की प्रतिक्रिया पर जयशंकर ने कहा कि नई दिल्ली ने आतंकवादियों को स्पष्ट संदेश दिया है कि इस प्रकार के हमलों की कीमत चुकानी पड़ेगी।

भारत-पाक परमाणु संघर्ष से “बहुत दूर”

भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा दिए गए “परमाणु संघर्ष की आशंका” के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए जयशंकर ने कहा कि दोनों देश “परमाणु संघर्ष से बहुत, बहुत दूर” थे। उन्होंने कहा, “किसी भी समय पर परमाणु स्तर की कोई बात नहीं थी। एक ऐसा नैरेटिव बनाया जा रहा है कि हमारे क्षेत्र में जो भी होता है, वह सीधे परमाणु संकट में बदल जाता है। यह मुझे बहुत परेशान करता है, क्योंकि इससे आतंकवाद जैसी भयानक गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।” गौरतलब है कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर तीन देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में जर्मनी के बर्लिन में थे। इससे पहले वे नीदरलैंड और डेनमार्क की यात्रा पर गए थे।

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