ओलंपिक हॉकी ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और लिएंडर पेस के पिता डॉ. वेसे पेस का 80 वर्ष की उम्र में निधन

ओलंपिक हॉकी ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और लिएंडर पेस के पिता डॉ. वेसे पेस का 80 वर्ष की उम्र में निधन
ओलंपिक हॉकी ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और लिएंडर पेस के पिता डॉ. वेसे पेस का 80 वर्ष की उम्र में निधन

कोलकाता: भारतीय खेल जगत से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। ओलंपिक हॉकी ब्रॉन्ज मेडलिस्ट और टेनिस स्टार लिएंडर पेस के पिता, डॉ. वेसे पेस (Vece Paes) का बुधवार को निधन हो गया। वे 80 वर्ष के थे। डॉ. पेस को भारतीय हॉकी के साथ-साथ स्पोर्ट्स मेडिसिन (खेल चिकित्सा) के क्षेत्र में भी अग्रणी हस्ती माना जाता था।

खेलों के बहुआयामी सितारे थे डॉ. पेस

अप्रैल 1945 में गोवा में जन्मे डॉ. वेसे पेस हॉकी टीम के मिडफील्डर रहे, और उन्होंने 1972 म्यूनिख ओलंपिक में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाली टीम में अहम भूमिका निभाई।

हॉकी के अलावा वे क्रिकेट, फुटबॉल और रग्बी में भी माहिर थे। उन्होंने डिविज़नल क्रिकेट खेला और रग्बी से खास लगाव था। यही नहीं, वे 1996 से 2002 तक इंडियन रग्बी फुटबॉल यूनियन के अध्यक्ष भी रहे।

खेल चिकित्सा में भी अग्रणी

डॉ. पेस ने कोलकाता में मेडिसिन की पढ़ाई की और अपने मेडिकल ज्ञान को खेलों से जोड़ते हुए स्पोर्ट्स मेडिसिन के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया। उन्होंने एशियन क्रिकेट काउंसिल (ACC) और भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के साथ मिलकर एंटी-डोपिंग जागरूकता कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने 1966 में हैम्बर्ग इंटरनेशनल कप में भारत के लिए हॉकी में पदार्पण किया था। उनकी मेहनत और खेलों के प्रति समर्पण ने उन्हें खेलों और चिकित्सा दोनों में प्रेरणास्रोत बना दिया।

विराट खेल यात्रा में भावभीनी श्रद्धांजलि

पूर्व भारतीय हॉकी कप्तान वीरेन रस्कीन्हा ने डॉ. पेस के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा:

“डॉ. वेसे पेस के निधन की खबर सुनकर बेहद दुख हुआ। वे 1972 म्यूनिख ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के मिडफील्डर थे। जब मैंने 2004 एथेंस ओलंपिक खेला था, तब वे हमारे टीम डॉक्टर थे। वे एक अविश्वसनीय इंसान थे। RIP डॉ. पेस, आपके योगदान के लिए धन्यवाद।”

पूरा खेल जगत शोक में डूबा

डॉ. पेस का निधन न केवल हॉकी के लिए, बल्कि पूरा भारतीय खेल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। एक महान खिलाड़ी, कुशल चिकित्सक और खेलों के सच्चे सेवक के रूप में वे हमेशा याद किए जाएंगे। भारतीय हॉकी, क्रिकेट और रग्बी के इतिहास में उनका योगदान स्वर्ण अक्षरों में दर्ज रहेगा। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे और परिवार को इस कठिन समय में संबल प्रदान करे।