नई दिल्ली: रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) में एक नई जीनव शक्ति का आगमन हुआ है। सरकार ने पूनम गुप्ता को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। पूनम गुप्ता की नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था और केंद्रीय बैंकिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह पद जनवरी में एम.डी. पटरा के रिटायरमेंट के बाद खाली हुआ था।
पूनम गुप्ता का शानदार करियर और योगदान
पूनम गुप्ता, जो वर्तमान में भारतीय नीति-निर्माण में एक प्रमुख नाम हैं, ने राष्ट्रीय आर्थिक नीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वह भारतीय नीति अनुसंधान केंद्र (NCAER) की निदेशक जनरल हैं और भारतीय प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य भी हैं। वह 2021 में NCAER से जुड़ीं और इसके पहले वह IMF और विश्व बैंक में करीब दो दशकों तक सीनियर पदों पर कार्यरत रही थीं।
पूनम गुप्ता ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स, विश्वविद्यालय ऑफ मैरीलैंड (अमेरिका) और आईएसआई दिल्ली में बतौर प्रोफेसर के तौर पर काम किया है। उन्होंने NIPFP में RBI चेयर प्रोफेसर के रूप में कार्य किया और ICRIER में भी प्रोफेसर के रूप में कार्य किया है।
समाज और अर्थव्यवस्था में उनका योगदान
पूनम गुप्ता वर्तमान में NIPFP और ग्लोबल डेवलपमेंट नेटवर्क (GDN) के बोर्ड में सदस्य हैं। साथ ही, वह विश्व बैंक के ‘गरीबी और समानता’ और ‘वर्ल्ड डेवलपमेंट रिपोर्ट’ के सलाहकार समूह की भी सदस्य हैं। NITI Aayog और FICCI की कार्यकारी समिति में भी उनका अहम योगदान है। भारत के G20 अध्यक्षता के दौरान, उन्होंने मैक्रोइकोनॉमिक्स और ट्रेड पर आधारित टास्क फोर्स की अध्यक्षता की।
NCAER में रहते हुए, उन्होंने आर्थिक विकास, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संरचना, केंद्रीय बैंकिंग, सार्वजनिक कर्ज, राज्य वित्त और मैक्रोइकोनॉमिक्स की दिशा में महत्वपूर्ण शोध कार्य किया है।
शैक्षिक पृष्ठभूमि और पुरस्कार
पूनम गुप्ता की शैक्षिक पृष्ठभूमि बेहद मजबूत है। उन्होंने अमेरिका के विश्वविद्यालय ऑफ मैरीलैंड से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री और पीएचडी की है। इसके अलावा, दिल्ली विश्वविद्यालय के दिल्ली स्कूल ऑफ इकॉनॉमिक्स से भी उन्होंने मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उन्हें 1998 में EXIM बैंक अवार्ड भी प्राप्त हुआ था, जो उनके अंतर्राष्ट्रीय अर्थशास्त्र पर किए गए शोध के लिए था।
आर्थिक नीति में गुप्ता का प्रभाव
पूनम गुप्ता की नियुक्ति से रिजर्व बैंक की नीतियों और योजनाओं पर सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद है। उनकी आर्थिक नीति और बैंकिंग क्षेत्र में गहरी समझ से RBI की रणनीतियों को नई दिशा मिल सकती है, खासकर केंद्रीय बैंकिंग, वित्तीय स्थिरता, और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन में।
उनकी नियुक्ति भारतीय रिजर्व बैंक के लिए एक बड़ा कदम साबित हो सकती है, जो आगामी वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।