सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को लेकर अपने पुराने आदेश में संशोधन करते हुए अब उन्हें टीकाकरण के बाद उनके मूल स्थानों पर वापस छोड़ने की अनुमति दे दी है। हालांकि, आक्रामक व्यवहार दिखाने वाले या रेबीज़ संक्रमित कुत्तों को पहले टीका लगवाना अनिवार्य होगा, उसके बाद ही उन्हें छोड़ा जाएगा।
पहले क्या था आदेश?
11 अगस्त को न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और आर महादेवन की पीठ ने दिल्ली-एनसीआर को ‘स्ट्रे-फ्री ज़ोन’ बनाने का आदेश देते हुए सभी आवारा कुत्तों को आठ सप्ताह के भीतर शेल्टर होम्स में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया था। इसका कारण बताया गया था कि 2024 में 37 लाख कुत्तों के काटने की घटनाएं और 54 संभावित रेबीज़ से मौतें दर्ज की गई थीं।
क्यों हुआ आदेश में बदलाव?
इस निर्णय के खिलाफ जानवरों के अधिकारों के लिए काम करने वाले कार्यकर्ताओं और कई मशहूर हस्तियों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला पुनर्विचार के लिए सुरक्षित रखा था।
अब न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एनवी अंजारिया की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने नया निर्देश जारी करते हुए कहा कि:
“जिन कुत्तों का टीकाकरण हो चुका है, उन्हें उनके मूल स्थानों पर वापस छोड़ा जा सकता है। परंतु आक्रामक या रेबीज़-संक्रमित कुत्तों का पहले इलाज और टीकाकरण आवश्यक है।”
क्या कहती है सरकारी रिपोर्ट?
- 2024 में 37 लाख से अधिक डॉग बाइट के मामले
- 54 संभावित रेबीज़ से मौतें
- राजधानी और उसके आसपास के क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती घटनाओं ने चिंता बढ़ाई थी।
लोगों की राय
इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।
- पशु प्रेमी समूहों ने फैसले का स्वागत किया है।
- जबकि कुछ लोग अब भी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
आगे क्या?
अब नगर निगमों और स्थानीय प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि:
- कुत्तों का टीकाकरण समय से हो।
- सही मूल्यांकन के बाद ही उन्हें वापस छोड़ा जाए।
- रेबीज़ नियंत्रण और जन सुरक्षा दोनों संतुलन में रहें।
यह फैसला न सिर्फ पशु अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि जनहित को भी नजरअंदाज नहीं करता। सुप्रीम कोर्ट ने एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए एक बार फिर अपने न्यायिक विवेक का परिचय दिया है।