कब होगा यूपी में पंचायत चुनाव, 67 जिलों में मतपेटिकाओं के लिए ई-टेंडर जारी
कब होगा यूपी में पंचायत चुनाव, 67 जिलों में मतपेटिकाओं के लिए ई-टेंडर जारी
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव (जनवरी-फरवरी 2026) की तैयारियां जोरों पर हैं। हालांकि चुनाव की आधिकारिक तारीख़ों की घोषणा अभी नहीं हुई है, लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनावी प्रक्रिया को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए कदम बढ़ा दिए हैं। आयोग ने प्रदेश के 67 जिलों में लगभग 1,27,863 मतपेटिकाओं की आपूर्ति के लिए ई-टेंडर जारी कर दिए हैं। यह प्रक्रिया कुल 75 जिलों में से पहले चरण का हिस्सा है।
राज्य निर्वाचन आयोग की तरफ से जारी सूचना के अनुसार, CR Sheet Grade CR1 से निर्मित ये मतपेटिकाएं आगामी चार महीनों के भीतर 67 जिलों को वितरित कर दी जाएंगी। 6 जून से ई-टेंडर प्रक्रिया शुरू होगी, जबकि 9 जून को टेंडर खोले जाएंगे। आयोग ने इस काम के लिए आवश्यक बजट की व्यवस्था भी पहले ही कर ली है।
2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी का पहला पड़ाव
2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह पंचायत चुनाव एक राजनीतिक सेमीफाइनल की भूमिका निभाएंगे। पंचायत चुनाव के नतीजे न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में सत्ता समीकरण को प्रभावित करते हैं, बल्कि यह राजनीतिक दलों की पकड़ और प्रभाव का भी प्रमाण होते हैं। प्रदेश में कुल 57,691 ग्राम पंचायतें, 826 ब्लॉक और 75 जिला पंचायतें इस चुनाव को और भी महत्वपूर्ण बनाती हैं।
मतदाता सूची का पुनरीक्षण जुलाई से
चुनाव आयोग जुलाई 2025 से मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू कर सकता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वोटर लिस्ट अपडेट और त्रुटि मुक्त हो। यह अभियान दिसंबर 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा, जिसके बाद सीट आरक्षण की प्रक्रिया शुरू होगी। आयोग ने चुनाव कार्यों की पारदर्शिता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान देने का आश्वासन दिया है।
राजनीतिक दलों ने शुरू किया रणधीर
चुनाव आयोग की तैयारियों के बीच राजनीतिक दल भी चुनावी रणनीति पर काम में लग गए हैं। पंचायत चुनाव में ग्रामीण मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं, इसलिए हर दल गांव-गांव जाकर अपनी चुनावी तैयारियों को गति दे रहा है। आगामी महीनों में प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में चुनावी गतिविधियां तेज़ होने की संभावना है। उत्तर प्रदेश के पंचायत चुनाव को लेकर अब राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर पूरी तैयारियां शुरू हो गई हैं। यह चुनाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता के समीकरण बदलने का अहम मौका माना जा रहा है।