नई दिल्ली: ऑनलाइन ट्रेन टिकट बुकिंग के दौरान रेलवे काउंटर की तुलना में अधिक शुल्क लगने को लेकर संसद में सवाल उठाया गया, जिसका जवाब केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (IRCTC) द्वारा ली जाने वाली “कन्वीनिएंस फीस” (सुविधा शुल्क) इस मूल्य अंतर का मुख्य कारण है।
ऑनलाइन टिकट पर अधिक पैसे क्यों?
रेल मंत्री के अनुसार, IRCTC को अपनी ऑनलाइन टिकटिंग प्रणाली के रखरखाव, अपग्रेड और विस्तार के लिए यह शुल्क लेना पड़ता है। वर्तमान में:
- नॉन-एसी (Non-AC) क्लास के लिए ₹15 सुविधा शुल्क लिया जाता है।
- एसी (AC) क्लास के लिए यह शुल्क ₹30 है।
- इन शुल्कों पर अलग से GST भी लागू होता है।
बैंकों और पेमेंट गेटवे का भी शुल्क शामिल
ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान पेमेंट गेटवे या बैंक द्वारा अलग से ट्रांजैक्शन फीस भी ली जाती है। यह शुल्क भुगतान के तरीके पर निर्भर करता है, जैसे:
- डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग या डिजिटल वॉलेट से भुगतान करने पर अलग-अलग चार्ज लग सकते हैं।
- यह शुल्क बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों द्वारा तय किया जाता है, जिस पर IRCTC का कोई नियंत्रण नहीं होता।
80% रिजर्व टिकट ऑनलाइन बुक होते हैं
रेल मंत्री ने कहा कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग सिस्टम को यात्रियों के लिए सुविधाजनक बनाने के उद्देश्य से शुरू किया गया था। आज 80% से अधिक आरक्षित टिकट ऑनलाइन ही बुक किए जाते हैं।
हालांकि, थोड़ा अतिरिक्त शुल्क लगने के बावजूद ऑनलाइन बुकिंग की लोकप्रियता बढ़ी है, क्योंकि यात्री लंबी कतारों में लगने से बचते हैं और कहीं से भी आसानी से टिकट बुक कर सकते हैं।