गौतमबुद्ध नगर की सियासत: दादरी और नोएडा में 2027 का क्या होगा गणित?

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दिल्ली से सटे गौतमबुद्ध नगर की राजनीति पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में खास महत्व रखती है। नोएडा जहां तेजी से विकसित हुआ शहरी इलाका है, वहीं दादरी में ग्रामीण राजनीति, स्थानीय प्रभाव और सामाजिक समीकरणों की भूमिका लंबे समय से चर्चा में रही है।

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इन दोनों सीटों के पुराने चुनावी आंकड़ों पर नजर डालना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि दादरी और नोएडा दोनों सीटों पर 2017 और 2022 में बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। हालांकि दोनों सीटों का राजनीतिक मिजाज एक-दूसरे से काफी अलग है।

दादरी: पिछले तीन चुनावों में बदली तस्वीर

दादरी विधानसभा सीट पश्चिमी उत्तर प्रदेश की चर्चित सीटों में शामिल है। 2012, 2017 और 2022 के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो इस सीट पर तीन अलग-अलग चुनावी तस्वीरें दिखाई देती हैं।

2012 में बीएसपी की जीत

2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश में सरकार बनाई थी, लेकिन दादरी सीट पर बीएसपी के सतवीर सिंह गुर्जर ने जीत दर्ज की।

  • सतवीर सिंह गुर्जर — बीएसपी: 81,137 वोट
  • नवाब सिंह नागर — बीजेपी: 43,840 वोट
  • समीर भाटी — कांग्रेस: 37,764 वोट
  • राजकुमार भाटी — समाजवादी पार्टी: 23,191 वोट

सतवीर सिंह गुर्जर ने बीजेपी के नवाब सिंह नागर को 37,297 वोटों से हराया था। समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार चौथे स्थान पर रहे।

2017 में बीजेपी की बड़ी वापसी

2017 में दादरी की तस्वीर पूरी तरह बदल गई। बीजेपी ने तेजपाल सिंह नागर को मैदान में उतारा और उन्होंने 1,41,226 वोट हासिल किए।

  • तेजपाल सिंह नागर — बीजेपी: 1,41,226 वोट
  • सतवीर सिंह गुर्जर — बीएसपी: 61,049 वोट
  • समीर भाटी — कांग्रेस: 39,975 वोट
  • रविंद्र सिंह भाटी — RLD: 10,373 वोट

तेजपाल सिंह नागर ने 80,177 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

2022 में और बढ़ा जीत का अंतर

2022 में बीजेपी के तेजपाल सिंह नागर ने दादरी में अपनी जीत का अंतर और बढ़ा दिया।

  • तेजपाल सिंह नागर — बीजेपी: 2,18,068 वोट
  • राजकुमार भाटी — समाजवादी पार्टी: 79,850 वोट
  • मनबीर सिंह भाटी — बीएसपी: 40,456 वोट
  • दीपक चोटीवाला — कांग्रेस: 5,392 वोट

बीजेपी ने यह चुनाव 1,38,218 वोटों के बड़े अंतर से जीता।

यानी 2012 से 2022 के बीच दादरी में चुनावी मुकाबले का स्वरूप काफी बदल गया। 2012 में बीएसपी ने जीत दर्ज की थी, जबकि 2017 और 2022 में बीजेपी ने लगातार दो चुनाव जीते।

दादरी में जातीय समीकरण की चर्चा

दादरी की राजनीति में गुर्जर समुदाय की भूमिका को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। हालांकि विधानसभा क्षेत्र के लिए आधिकारिक जातिवार मतदाता आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, इसलिए अलग-अलग स्रोतों में बताए जाने वाले जातीय आंकड़ों को आधिकारिक आंकड़ा मानना उचित नहीं होगा।

यह भी जरूरी है कि किसी एक जाति के पूरे वोट को किसी एक राजनीतिक दल के साथ जोड़कर न देखा जाए। चुनाव परिणाम उम्मीदवार, पार्टी, स्थानीय मुद्दों, संगठन और अलग-अलग सामाजिक समूहों के मतदान व्यवहार से प्रभावित होते हैं।

नोएडा: 2012 में बनी अलग विधानसभा सीट

अब बात नोएडा विधानसभा सीट की।

नोएडा पहले दादरी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा था। परिसीमन के बाद 2012 में नोएडा को अलग विधानसभा सीट बनाया गया और इसी साल यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुआ।

नोएडा का राजनीतिक और सामाजिक स्वरूप दादरी से काफी अलग है। यहां शहरी आबादी, कारोबारी वर्ग, निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोग और बड़ी संख्या में आवासीय सोसायटियां हैं।

2012 में बीजेपी की शुरुआत जीत के साथ

नोएडा के पहले विधानसभा चुनाव में बीजेपी के महेश कुमार शर्मा ने जीत दर्ज की।

  • महेश कुमार शर्मा — बीजेपी: 77,319 वोट
  • ओमदत्त शर्मा — बीएसपी: 49,643 वोट
  • सुनील चौधरी — समाजवादी पार्टी: 42,071 वोट

महेश शर्मा ने 27,676 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की।

इसके बाद 2014 में महेश शर्मा के लोकसभा चुनाव जीतने के बाद नोएडा सीट पर उपचुनाव हुआ। बीजेपी की विमला बाथम ने समाजवादी पार्टी की काजल शर्मा को 58,952 वोटों से हराकर सीट बीजेपी के पास बरकरार रखी।

2017 में पंकज सिंह की एंट्री

2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने पंकज सिंह को उम्मीदवार बनाया। उन्होंने अपने पहले विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज की।

  • पंकज सिंह — बीजेपी: 1,62,417 वोट
  • सुनील चौधरी — समाजवादी पार्टी: 58,401 वोट
  • रविकांत — बीएसपी: 27,365 वोट

पंकज सिंह ने समाजवादी पार्टी के सुनील चौधरी को 1,04,016 वोटों के अंतर से हराया।

2022 में नोएडा में और बड़ा अंतर

2022 में पंकज सिंह ने एक बार फिर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।

  • पंकज सिंह — बीजेपी: 2,44,319 वोट
  • सुनील चौधरी — समाजवादी पार्टी: 62,806 वोट
  • कृपा राम शर्मा — बीएसपी: 16,292 वोट

पंकज सिंह की जीत का अंतर 1,81,513 वोट रहा।

यानी 2017 के मुकाबले 2022 में बीजेपी उम्मीदवार की जीत का अंतर और बढ़ गया।

नोएडा की राजनीति दादरी से क्यों अलग है?

नोएडा और दादरी एक ही जिले में होने के बावजूद दोनों की सामाजिक और आर्थिक संरचना अलग है।

नोएडा में शहरी आबादी, निजी क्षेत्र में काम करने वाले लोग, कारोबारी वर्ग और हाई-राइज सोसायटियों की बड़ी मौजूदगी है। वहीं दादरी में ग्रामीण और शहरी दोनों तरह के इलाके शामिल हैं।

इसी वजह से दोनों सीटों पर चुनावी मुद्दों और मतदाताओं की प्राथमिकताओं में अंतर दिखाई देता है।

नोएडा में इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक, प्रदूषण, आवासीय सोसायटियों से जुड़े मुद्दे, रोजगार और शहरी सुविधाएं चुनावी चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं। वहीं दादरी में ग्रामीण विकास, जमीन, रोजगार, किसान और स्थानीय मुद्दों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

2027 से पहले दोनों सीटों के आंकड़े क्या बताते हैं?

दादरी और नोएडा के पिछले तीन विधानसभा चुनावों को एक साथ देखें तो तस्वीर इस तरह सामने आती है:

सालदादरीजीत का अंतरनोएडाजीत का अंतर
2012बीएसपी के सतवीर सिंह गुर्जर37,297बीजेपी के महेश कुमार शर्मा27,676
2017बीजेपी के तेजपाल सिंह नागर80,177बीजेपी के पंकज सिंह1,04,016
2022बीजेपी के तेजपाल सिंह नागर1,38,218बीजेपी के पंकज सिंह1,81,513

इन आंकड़ों से पता चलता है कि 2017 और 2022 में दोनों सीटों पर बीजेपी की जीत का अंतर बढ़ा, जबकि 2012 में दोनों सीटों पर अलग-अलग पार्टियों के उम्मीदवार विजेता रहे थे।

2027 में क्या बदलेगा?

2027 के विधानसभा चुनाव में दादरी और नोएडा की तस्वीर किन मुद्दों पर बनेगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है।

दादरी में स्थानीय विकास, ग्रामीण इलाकों से जुड़े सवाल, रोजगार, किसान और जमीन से जुड़े मुद्दे चर्चा में रह सकते हैं। वहीं नोएडा में इंफ्रास्ट्रक्चर, ट्रैफिक, प्रदूषण, आवासीय सोसायटियों से जुड़े मुद्दे, रोजगार और शहरी सुविधाएं महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

इसके अलावा उम्मीदवारों का चयन और राजनीतिक दलों के बीच संभावित गठबंधन भी चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकते हैं।

हालांकि, पिछले चुनावों के आंकड़ों से भविष्य का नतीजा तय नहीं किया जा सकता। 2027 तक राजनीतिक परिस्थितियां, उम्मीदवार और मतदाताओं की प्राथमिकताएं बदल सकती हैं।

दादरी और नोएडा की कहानी

गौतमबुद्ध नगर की दादरी और नोएडा विधानसभा सीटें एक ही जिले का हिस्सा हैं, लेकिन दोनों का चुनावी मिजाज अलग दिखाई देता है।

दादरी में 2012 में बीएसपी की जीत के बाद 2017 और 2022 में बीजेपी ने लगातार दो चुनाव जीते। वहीं नोएडा में 2012 में सीट बनने के बाद से बीजेपी ने हर विधानसभा चुनाव जीता है।

अब 2027 में इन दोनों सीटों पर मुकाबला किन मुद्दों और किन उम्मीदवारों के बीच बनता है, यह चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ साफ होगा।

दादरी में पुराने सामाजिक और स्थानीय समीकरण कितने बदलेंगे? नोएडा में क्या कोई पार्टी बीजेपी के लगातार चुनावी प्रदर्शन को चुनौती दे पाएगी?

इन सवालों का जवाब 2027 के चुनाव में उम्मीदवारों, गठबंधन, स्थानीय मुद्दों और मतदाताओं के रुख से सामने आएगा।

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