अरावली पहाड़ियों विवाद: पर्यावरण मंत्री ने सुप्रीम कोर्ट के रोक आदेश का स्वागत किया, कहा- पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार हर संभव सहयोग करेगी

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अरावली पहाड़ियों विवाद: सुप्रीम कोर्ट के रोक आदेश का पर्यावरण मंत्री ने किया स्वागत

नई दिल्ली: केंद्रीय पर्यावरण मंत्री Bhupender Yadav ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली पर्वतमाला की “नई परिभाषा” से जुड़े अपने आदेश पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत किया। इस नई परिभाषा को लेकर पहले काफी आलोचना हुई थी।

मंत्री ने कहा कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MOEFCC) अरावली पहाड़ियों के संरक्षण और पुनर्स्थापन के लिए हर संभव सहयोग देगा।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा आदेश पर रोक लगाने और मामले की जांच के लिए नई समिति बनाने का फैसला स्वागत योग्य है। उन्होंने यह भी बताया कि नई खनन लीज़ और पुरानी लीज़ के नवीनीकरण पर फिलहाल पूरी तरह प्रतिबंध जारी है।

इससे पहले भी मंत्री ने स्पष्ट किया था कि अरावली के मुख्य, संरक्षित और पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों, खासकर National Capital Region, में कोई नई खनन अनुमति नहीं दी जाएगी।

मंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अरावली संरक्षण के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों को मान्यता देता है। इसमें वैज्ञानिक अध्ययन, कड़े सुरक्षा उपाय और Aravalli Green Wall Project जैसी परियोजनाएं शामिल हैं।

विवाद क्यों शुरू हुआ?

यह विवाद पिछले नवंबर में शुरू हुआ था, जब सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की पहचान के लिए केंद्र सरकार के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। नई गाइडलाइन के अनुसार, केवल वे पहाड़ियां जो आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर ऊंची हों, या ऐसी पहाड़ियों के समूह हों, उन्हें नियामक उद्देश्यों के लिए अरावली का हिस्सा माना जाएगा।

हालांकि सरकार का कहना था कि इससे लंबे समय से चले आ रहे विवादों का समाधान होगा, लेकिन कई विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों ने चिंता जताई कि यह नई और सीमित परिभाषा पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास के प्रयासों को कमजोर कर सकती है।

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