BRICS: बदलती वैश्विक व्यवस्था में Global South की बढ़ती ताकत
भारत की अध्यक्षता में BRICS 2026, विस्तार, अर्थव्यवस्था और बदलती विश्व राजनीति के बीच इस समूह की बढ़ती भूमिका पर एक नजर
BRICS आज दुनिया की उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग का एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। इसकी शुरुआत BRIC के रूप में ब्राजील, रूस, भारत और चीन के साथ हुई थी। 2011 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। इसके बाद समूह का विस्तार हुआ और मिस्र, इथियोपिया, ईरान तथा संयुक्त अरब अमीरात 2024 में पूर्ण सदस्य बने। इंडोनेशिया जनवरी 2025 में BRICS का पूर्ण सदस्य बना।
BRICS में कौन-कौन से देश हैं?
वर्तमान में BRICS के 11 पूर्ण सदस्य हैं:
- ब्राजील
- रूस
- भारत
- चीन
- दक्षिण अफ्रीका
- मिस्र
- इथियोपिया
- ईरान
- संयुक्त अरब अमीरात
- इंडोनेशिया
- सऊदी अरब
इसके अलावा BRICS ने Partner Country की श्रेणी भी बनाई है। 2025 में बेलारूस, बोलीविया, क्यूबा, कजाखस्तान, मलेशिया, नाइजीरिया, थाईलैंड, युगांडा और उज्बेकिस्तान को इस श्रेणी में शामिल किया गया।
BRICS की शुरुआत कैसे हुई?
BRIC शब्द का इस्तेमाल पहली बार 2001 में Goldman Sachs की एक आर्थिक रिपोर्ट में किया गया था। इसके बाद ब्राजील, रूस, भारत और चीन के बीच सहयोग बढ़ा और 2009 में रूस के येकातेरिनबर्ग में पहला BRIC Summit आयोजित हुआ। दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद 2011 से इसे BRICS के नाम से जाना जाने लगा।
समय के साथ BRICS का एजेंडा केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं रहा। आज इसमें व्यापार, वित्त, निवेश, तकनीक, शिक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा, कृषि, जलवायु परिवर्तन और लोगों के बीच संपर्क जैसे विषय भी शामिल हैं।
BRICS क्यों महत्वपूर्ण है?
BRICS की सबसे बड़ी ताकत इसकी आर्थिक और जनसांख्यिकीय पहुंच है। भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार, 11 सदस्यीय BRICS देश दुनिया की लगभग 49.5% आबादी, करीब 40% वैश्विक GDP और लगभग 26% वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
इसी वजह से BRICS को Global South की आवाज को मजबूत करने वाले महत्वपूर्ण मंच के रूप में देखा जाता है। सदस्य देश वैश्विक वित्तीय और राजनीतिक संस्थाओं में अधिक प्रतिनिधित्व, विकासशील देशों के हितों और बहुपक्षीय सहयोग से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाते रहे हैं।
New Development Bank की भूमिका
BRICS सहयोग का एक महत्वपूर्ण संस्थागत परिणाम New Development Bank (NDB) है। इसका उद्देश्य सदस्य और अन्य विकासशील देशों में infrastructure तथा sustainable development projects के लिए वित्त उपलब्ध कराना है।
स्थानीय मुद्राओं में वित्तीय सहयोग और विकास परियोजनाओं को बढ़ावा देना BRICS के आर्थिक एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।
भारत और BRICS
भारत BRICS के शुरुआती चार सदस्यों में शामिल रहा है और संगठन के विकास में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारत ने इससे पहले 2012 और 2016 में BRICS Summit की मेजबानी की थी। 2026 में भारत ने BRICS की अध्यक्षता संभाली है और नई दिल्ली में 18वें BRICS Summit की तैयारी की जा रही है। भारत की 2026 अध्यक्षता का व्यापक फोकस Resilience, Innovation, Cooperation और Sustainability पर है।
भारत की अध्यक्षता ऐसे समय में हो रही है जब BRICS पहले की तुलना में अधिक बड़ा और विविध समूह बन चुका है। ऐसे में सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना, आर्थिक सहयोग बढ़ाना और नए सदस्यों तथा partner countries को प्रभावी तरीके से जोड़ना महत्वपूर्ण चुनौती और अवसर दोनों है।
क्या BRICS किसी दूसरे समूह के खिलाफ है?
BRICS को केवल पश्चिमी देशों के विरोध या किसी दूसरे geopolitical bloc के विकल्प के रूप में देखना इसके व्यापक स्वरूप को सीमित कर सकता है। BRICS के भीतर अलग-अलग राजनीतिक और आर्थिक व्यवस्थाओं वाले देश शामिल हैं। इसलिए इसका मुख्य जोर संवाद, सहयोग और बहुपक्षीय व्यवस्था में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने पर है। BRICS के आधिकारिक दस्तावेजों में भी इसे coalition-building और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मंच के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
आगे BRICS की राह
BRICS का विस्तार इसे अधिक प्रभावशाली तो बनाता है, लेकिन इसके साथ चुनौतियां भी बढ़ती हैं। अलग-अलग देशों के आर्थिक हित, विदेश नीति और वैश्विक मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण हैं। ऐसे में consensus बनाना समूह की सबसे बड़ी जरूरत होगी।
फिर भी, बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, multipolar world की चर्चा और Global South की बढ़ती भूमिका के बीच BRICS आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण मंच बना रह सकता है।
BRICS की कहानी सिर्फ 11 देशों के एक समूह की कहानी नहीं है। यह उस बदलती दुनिया की कहानी है, जहां Global South अपनी आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक आवाज को पहले से अधिक मजबूती के साथ सामने रख रहा है।