Pushpa 2: The Rule हिंदी में सबसे ज़्यादा 72 करोड़ की कमाई की, टॉप 10 कमाई करने वाली फिल्मों की ये रही अपडेट लिस्ट
सुकुमार की फिल्म पुष्पा 2: द रूल 5 दिसंबर 2024 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई, और इसने अपने पहले ही दिन रिकॉर्ड तोड़ कमाई की। इसका पेड प्रीमियर 4 दिसंबर को हुआ था, जिसमें फिल्म ने ₹10 करोड़ की कमाई की। अल्लू अर्जुन, रश्मिका मंदाना और फहद फासिल अभिनीत यह फिल्म हिंदी में किसी भी फिल्म के लिए सबसे बड़ी ओपनिंग लेने में सफल रही, जिसने “जवान”, “एनिमल” और “केजीएफ: चैप्टर 2” जैसी बड़ी फिल्मों को भी पीछे छोड़ दिया।
पुष्पा 2 की अद्भुत शुरुआत
सिनेमाघरों में 5 दिसंबर को रिलीज़ होते ही फिल्म ने पहले दिन ₹159.95 करोड़ की कमाई की। कुल मिलाकर भारत में फिल्म ने ₹170.6 करोड़ की कमाई की, जबकि इसकी सकल कमाई ₹209.2 करोड़ रही। पूरी दुनिया में इसने ₹279.20 करोड़ की जबरदस्त कमाई की।
हिंदी डब संस्करण में रिकॉर्ड ओपनिंग
फिल्म की हिंदी डब संस्करण ने भी काफी अच्छा प्रदर्शन किया। शुक्रवार को, फिल्म की टीम ने पुष्टि की कि पुष्पा 2 ने अपने हिंदी संस्करण में पहले दिन ₹72 करोड़ की कमाई की, जो किसी भी डब हिंदी फिल्म के लिए अब तक की सबसे बड़ी ओपनिंग बन गई है।
फिल्म की कहानी और सफलता
पुष्पा 2: द रूल सुकुमार द्वारा निर्देशित एक तेलुगु फिल्म है, जिसे हिंदी, तमिल, कन्नड़, मलयालम और बंगाली में भी रिलीज़ किया गया है। फिल्म में मुख्य पात्र पुष्पा राज हैं, जो एक लाल चंदन तस्कर हैं और सिंडिकेट पर नियंत्रण रखते हैं। उनका सामना एक पुलिस अधिकारी भंवर सिंह शेखावत से होता है, जो पुष्पा की ताकत और साम्राज्य को चुनौती देता है। यह फिल्म 2021 में आई पुष्पा: द राइज़ का सीक्वल है।
पुष्पा 2 की रिकॉर्ड ब्रेकिंग ओपनिंग
पुष्पा 2: द रूल ने न केवल भारतीय बॉक्स ऑफिस पर बल्कि दुनिया भर में भी बेहतरीन प्रदर्शन किया। इस फिल्म के द्वारा तय किए गए नए रिकॉर्ड फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरे हैं, और यह साबित कर दिया कि दर्शकों का प्यार और सिनेमा की बेहतरीन प्रस्तुति कभी भी सीमाओं को नहीं जानती।
Vinod Kambli: एक चमकते सितारे ने कैसी की अपनी जिंदगी बर्बाद, जानें विनोद कांबली की कहानी
भारतीय क्रिकेट में विनोद कांबली की कहानी बहुत दिलचस्प और भावनाओं से भरी हुई है। उनका करियर एक ऐसा सफर रहा है, जो एक शानदार शुरुआत से लेकर अकल्पनीय गिरावट तक फैला हुआ है। कांबली एक ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी थे जिन्होंने क्रिकेट की दुनिया में अपनी तूफानी शुरुआत की, लेकिन बाद में एक भीषण पतन से जूझते हुए मीडिया और क्रिकेट जगत में अपनी पहचान खो दी। उनके बारे में कहा जा सकता है कि उन्होंने अपनी क्षमता का पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं किया, और यह एक बड़ी चेतावनी है कि सिर्फ प्रतिभा से ही सफलता नहीं मिलती, इसके लिए अनुशासन, मेहनत और सही मार्गदर्शन भी जरूरी होता है।
विनोद कांबली का प्रारंभिक जीवन और क्रिकेट के प्रति आकर्षण
विनोद कांबली का जन्म 18 जनवरी 1972 को मुंबई के कंजुरमार्ग इलाके में हुआ था। उनका परिवार साधारण था, और जैसे शहर के ज्यादातर लड़कों के लिए क्रिकेट एक खेल नहीं, बल्कि जीवन का हिस्सा बन चुका था, वैसे ही कांबली के लिए भी क्रिकेट एक जुनून बन गया था। वे बचपन से ही खेल में माहिर थे, और उनके अंदर एक स्वाभाविक क्रिकेट प्रतिभा थी।
कांबली का नाम सबसे पहले सुर्खियों में 1988 में आया, जब उन्होंने अपने बचपन के दोस्त सचिन तेंदुलकर के साथ शारदाश्रम विद्यामंदिर के लिए एक स्कूल मैच में 664 रन की रिकॉर्ड तोड़ साझेदारी की। कांबली ने इस साझेदारी में 349 रन बनाए थे, और यह साझेदारी क्रिकेट की दुनिया में ऐतिहासिक मानी जाती है। यह साझेदारी न सिर्फ क्रिकेट प्रेमियों के लिए यादगार थी, बल्कि इससे यह साफ हो गया कि कांबली और तेंदुलकर दोनों में ही शानदार क्रिकेटिंग टैलेंट था।
तेंदुलकर और कांबली: एक अविस्मरणीय जोड़ी
विनोद कांबली और सचिन तेंदुलकर की दोस्ती और साझेदारी को क्रिकेट की दुनिया में हमेशा याद रखा जाएगा। तेंदुलकर के शांत और अनुशासित स्वभाव के मुकाबले कांबली का बेपरवाह और आत्मविश्वासी व्यक्तित्व था। दोनों की जोड़ी क्रिकेट के मैदान पर ऐसी थी जैसे दोनों के बीच एक कड़ी जुड़ी हो। कांबली ने खुद कहा था कि वह तेंदुलकर से हमेशा तेज थे, और उनकी बैटिंग में बेपरवाही का अंदाज था जो तेंदुलकर के शांत और अनुशासित खेल से अलग था।
उनकी पहली बड़ी साझेदारी उस समय की थी जब दोनों ने 664 रन जोड़े थे। यह साझेदारी स्कूल क्रिकेट के इतिहास की सबसे बड़ी साझेदारी में से एक मानी जाती है। इसके बाद कांबली का नाम देश-विदेश में फैल गया और उन्हें क्रिकेट की दुनिया में एक स्टार माना जाने लगा।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कांबली का उभार
विनोद कांबली ने 1993 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा और तुरंत ही अपनी छाप छोड़ दी। 1993 में कांबली ने इंग्लैंड और ज़िम्बाब्वे के खिलाफ टेस्ट मैचों में लगातार दो दोहरे शतक बनाए। उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ 224 रन और ज़िम्बाब्वे के खिलाफ 227 रन बनाकर सभी को चौंका दिया। उनके इस प्रदर्शन ने उन्हें एक शानदार बल्लेबाज के रूप में स्थापित कर दिया और उनके खेल के बारे में लोग बात करने लगे।
कांबली का बल्लेबाजी औसत 100 के ऊपर चला गया और उन्हें क्रिकेट के महान खिलाड़ियों के साथ तुलना की जाने लगी। 1993 के अंत तक उनकी बल्लेबाजी को लेकर सभी की निगाहें उन पर थीं। उनकी तकनीक और विशेषकर स्पिन के खिलाफ खेलने की क्षमता ने उन्हें भारतीय क्रिकेट का एक चमकता सितारा बना दिया। उनका पाकिस्तान में किया गया प्रदर्शन भी अविस्मरणीय था। कांबली की बैटिंग ने उनकी टीम को कई अहम मैचों में जीत दिलाई, और उनका आत्मविश्वास हर मैच में नजर आता था।
1996 विश्व कप: एक ऐतिहासिक मोड़
विनोद कांबली के करियर में 1996 का विश्व कप एक अहम मोड़ साबित हुआ। कोलकाता में श्रीलंका के खिलाफ 1996 विश्व कप के सेमीफाइनल में भारत की हार ने कांबली के करियर को एक महत्वपूर्ण मोड़ दिया। उस मैच में भारत 120/8 पर ढेर हो गया और कांबली मात्र 10 रन पर नाबाद रहे। जब मैच खत्म हुआ तो कांबली की आंखों में आंसू थे, और इस दृश्य ने उनके करियर को एक अलग दिशा दी।
कांबली की यह छवि उनके करियर का नकारात्मक पहलू बन गई। हालांकि यह कहना गलत होगा कि भारत की हार का ठीकरा सिर्फ कांबली पर डाला जाए, लेकिन उनकी भावनात्मक प्रतिक्रियाओं ने उनकी कमजोरियों को उजागर किया। इस मैच के बाद कांबली की बल्लेबाजी में असंगति और संघर्ष का दौर शुरू हुआ।
चोटें और असंगति: करियर का पतन
1996 के बाद कांबली का क्रिकेट करियर कभी पहले जैसा नहीं रहा। चोटें उनके पीछा करने लगीं और उनका प्रदर्शन लगातार गिरने लगा। उनके बल्ले की धार धीरे-धीरे कम होने लगी और पेस अटैक के खिलाफ उनकी तकनीकी कमजोरी भी उजागर होने लगी। कांबली ने फिर कभी वह प्रदर्शन नहीं दिखाया जिसकी उम्मीद उनसे की जा रही थी।
1990 के दशक के अंत तक वह टीम से अंदर-बाहर होते रहे और हर बार वापसी के साथ उनका प्रदर्शन और भी खराब होता गया। टीम को एक ऑलराउंडर और फिनिशर की जरूरत थी, लेकिन कांबली इन दोनों भूमिकाओं को निभाने में संघर्ष कर रहे थे।
मैदान के बाहर की समस्याएँ
जहां कांबली का क्रिकेट करियर गिरावट की ओर जा रहा था, वहीं उनके निजी जीवन में भी कई समस्याएं आ रही थीं। उनकी पहली शादी टूट गई और इसके बाद उनके वित्तीय मामलों ने भी उन्हें मुसीबत में डाल दिया। उनके जीवनशैली के बारे में काफी चर्चाएँ होती थीं, और उन्होंने अपनी क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कई बार मीडिया में सुर्खियाँ बटोरीं।
2009 में कांबली ने बीसीसीआई पर पक्षपात करने का आरोप लगाया और कहा कि 1996 के विश्व कप के चयन में धांधली हुई थी। उनकी यह टिप्पणी क्रिकेट जगत में विवाद का कारण बनी और इसके बाद कांबली को क्रिकेट से और भी दूर कर दिया गया।
कांबली की समस्याएं: शराब, विवाद और गिरफ्तारी
कांबली का जीवन विवादों से भरा हुआ था। उनके खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज हुए, जिनमें शराब पीकर गाड़ी चलाना, हाउसिंग सोसाइटी के गेट में टक्कर मारना, और नौकरानी पर हमला करना शामिल था। 2022 में उन्हें शराब पीकर गाड़ी चलाने के आरोप में मुंबई में गिरफ्तार किया गया था। इस घटना ने उनके व्यक्तिगत जीवन को और भी जटिल बना दिया और क्रिकेट से उनके दूर होने के बाद उनकी नकारात्मक छवि को और मजबूत किया।
कांबली का पुनरुद्धार प्रयास
कांबली ने कभी हार नहीं मानी और कुछ न कुछ नया करने की कोशिश की। उन्होंने कोचिंग, रियलिटी टेलीविज़न, और राजनीति में भी हाथ आजमाया, लेकिन इनमें से किसी भी क्षेत्र में उन्हें सफलता नहीं मिली। हालांकि वे क्रिकेट के प्रति अपनी चाहत को कभी भी नहीं छोड़ पाए, लेकिन भारतीय क्रिकेट में वे कभी भी फिर से वो महत्वपूर्ण भूमिका नहीं पा सके।
कांबली का भविष्य और विरासत
विनोद कांबली की कहानी हमें यह सिखाती है कि केवल प्रतिभा से सफलता नहीं मिलती। अगर कोई खिलाड़ी अपनी क्षमता को पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं करता, तो उसका करियर बर्बाद हो सकता है। कांबली की कहानी हर उस खिलाड़ी के लिए एक चेतावनी है जो अपने खेल में पूरी तरह से समर्पित नहीं होता।
उनकी विरासत में एक मिश्रण है – प्रशंसा और अफसोस। कांबली ने 54.20 के औसत से टेस्ट क्रिकेट खेला, जो कि एक शानदार आँकड़ा है, लेकिन केवल 17 टेस्ट मैचों तक ही उनका करियर सीमित रहा। उनका वनडे करियर भी बहुत अधिक उम्मीदों को पूरा नहीं कर सका, लेकिन फिर भी वे क्रिकेट प्रेमियों के लिए हमेशा एक यादगार खिलाड़ी बने रहेंगे।
निष्कर्ष
विनोद कांबली की कहानी हमें यह सिखाती है कि खेल में केवल क्षमता ही नहीं, बल्कि अनुशासन और मानसिक मजबूतता भी जरूरी होती है। वे क्रिकेट के मैदान पर हमेशा एक साहसी बल्लेबाज़ के रूप में याद किए जाएंगे, जिन्होंने अपनी प्रतिभा से दुनिया को प्रभावित किया, लेकिन साथ ही उनकी कहानी हमें यह भी बताती है कि सफलता केवल मेहनत और समर्पण से आती है, न कि सिर्फ प्रतिभा से।
Maharashtra में शुरू हुआ गृहयुद्ध, Eknath Shinde और Devendra Fadnavis के बीच गृह विभाग को लेकर चल रही है खींचतान
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना ने शुक्रवार को दोहराया कि उसके नेता ने भाजपा से महत्वपूर्ण गृह विभाग की मांग की है, साथ ही कहा कि तीनों महायुति सहयोगी विभागों के आवंटन के बारे में बातचीत कर रहे हैं।
भारतीय जनता पार्टी, शिवसेना और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी महायुति का गठन करती है, जिसने पिछले महीने हुए विधानसभा चुनावों में जोरदार जीत दर्ज की थी। नतीजों के 12 दिन बाद गुरुवार को भाजपा के देवेंद्र फडणवीस ने एकनाथ शिंदे और पवार और उनके उपमुख्यमंत्री के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
समाचार एजेंसी पीटीआई ने गोगावले के हवाले से कहा, “जब फडणवीस उपमुख्यमंत्री थे (पिछली शिंदे के नेतृत्व वाली सरकार में), तो उनके पास गृह विभाग भी था। अब, साहेब ने उसी व्यवस्था की मांग की है और बातचीत (विभाग आवंटन पर) जारी है।”
रायगढ़ के विधायक ने कहा, “यह मांग संभवतः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी या केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की गई है। हमें उम्मीद है कि अगले दो दिनों में विभागों पर बातचीत पूरी हो जाएगी।” रिपोर्ट के अनुसार, शिंदे डिप्टी सीएम पद स्वीकार करने के लिए “अनिच्छुक” थे, लेकिन शिवसेना नेताओं ने उन्हें इस पद के लिए मना लिया। हालांकि, वह गृह विभाग को लेकर अड़े हुए हैं, जिसके लिए राज्य पुलिस रिपोर्ट करती है।
जून 2022 में, ठाणे के मराठा दिग्गज ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, संयुक्त शिवसेना के प्रमुख के खिलाफ विद्रोह कर दिया। इससे पार्टी में विभाजन हो गया और ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी (एमवीए) सरकार गिर गई। शिंदे तब ठाकरे की पूर्व सहयोगी भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने। उस समय पूर्व सीएम फडणवीस को उनका डिप्टी बनाया गया और जुलाई 2023 में पवार भी उनके साथ शामिल हो गए।
Sunita Williams in Space: NASA ने Sunita Williams को बचाने के लिए शुरू की प्रतियोगिता, बचाने वाले को मिलेगा 18 लाख रुपये का इनाम
नासा ने दुनिया भर के नए आइडिया देने वाले लोगों से एक नई चुनौती शुरू की है। इस चुनौती का उद्देश्य चंद्रमा के साउथ पोल जैसे कठिन इलाकों में घायल या बीमार अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने के लिए एक सुरक्षित और असरदार बचाव प्रणाली तैयार करना है। इस चुनौती का सबसे अच्छा समाधान पेश करने वाले को $20,000 तक का इनाम मिलेगा, और कुल $45,000 का पुरस्कार रखा गया है।
यह पहल नासा के आर्टेमिस मिशन के तहत चंद्रमा पर भविष्य के मिशनों में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। यह प्रतियोगिता हीरोएक्स प्लेटफॉर्म पर हो रही है और इसमें 23 जनवरी, 2025 तक समाधान भेजे जा सकते हैं।
चंद्रमा के साउथ पोल में कई तरह की मुश्किलें हैं, जैसे बहुत ठंडा तापमान, खड़ी ढलानें, और दांतेदार चट्टानें। इन समस्याओं से निपटने के लिए तैयार की जाने वाली प्रणाली को ये सब चुनौतियां पार करनी होंगी। इस प्रणाली को एक घायल अंतरिक्ष यात्री को 2 किलोमीटर तक सुरक्षित तरीके से ले जाना होगा। इसके साथ ही, यह चंद्रमा के कठिन इलाके में बिना किसी मदद के काम करने के काबिल भी होनी चाहिए और इसे एक खास स्पेससूट (एक्सईएमयू) के साथ काम करना चाहिए।
यह चुनौती नासा के आर्टेमिस III मिशन से जुड़ी हुई है, जो 2026 में चंद्रमा पर अंतरिक्ष यात्रियों को वापस भेजने के लिए है। इस मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव से जल-बर्फ की खोज करना है, जो बहुत ही चुनौतीपूर्ण और खतरनाक है।
नासा की सारा डगलस ने इस चुनौती के महत्व को समझाते हुए कहा कि चंद्रमा के कठिन वातावरण में अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षा के लिए नई और बेहतर तकनीक की जरूरत है। अगर कोई आपात स्थिति पैदा होती है, तो यह प्रणाली अंतरिक्ष यात्री को सुरक्षित तरीके से चंद्र लैंडर तक पहुंचाने में मदद करेगी।
इस प्रतियोगिता में प्रविष्टियों का मूल्यांकन वजन, काम करने की क्षमता, उपयोग में आसानी, और स्पेससूट पर असर जैसे आधारों पर किया जाएगा। यह एक अच्छा मौका है जो लोग अंतरिक्ष के अन्वेषण और सुरक्षा में मदद करना चाहते हैं, वे इसमें हिस्सा ले सकते हैं। इच्छुक लोग हीरोएक्स पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं और नासा की वेबसाइट से और जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
RG KAR Rape Case: बंगाल में फिर हुआ 7 महीने की बच्ची के साथ बलात्कार, RG KAR मेडिकल कॉलेज के ICU में भर्ती
पुलिस ने बताया कि पिछले महीने कोलकाता में सात महीने की बच्ची के साथ कथित तौर पर बलात्कार करने के आरोप में पश्चिम बंगाल के झारग्राम जिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि घटना 30 नवंबर को तब सामने आई जब निवासियों ने उत्तरी कोलकाता के बुरटोला इलाके में फुटपाथ पर एक बच्चे के रोने की आवाज सुनी और अधिकारियों को सूचित किया। उन्होंने बताया कि पुलिस मौके पर पहुंची और रात 1:45 बजे एक रिहायशी इलाके के पास शिशु को पाया।
इसके तुरंत बाद, फुटपाथ पर रहने वाले दो लोगों ने पास के पुलिस स्टेशन में अपनी सात महीने की बेटी के लापता होने की सूचना दी। अपनी बेटी की पहचान करने के बाद, शिशु को जांच के लिए आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया।
डॉक्टरों ने शिशु के निजी अंगों और शरीर के अन्य अंगों पर चोटों की सूचना दी। पुलिस ने पुष्टि की कि सुबह 3 बजे के आसपास स्त्री रोग विभाग द्वारा बच्चे की जांच की गई, जहां यौन उत्पीड़न के सबूत मिले।
एक पुलिस अधिकारी ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया, “शुरुआती जांच में पता चला है कि बच्ची को फुटपाथ से उठाया गया था और कहीं ले जाकर उसके साथ बलात्कार किया गया। यह किसी आवारा किस्म के व्यक्ति का काम हो सकता है। अपराध करने के बाद उसे फिर से छोड़ दिया गया। हम सीसीटीवी फुटेज की जांच कर रहे हैं और इलाके के लोगों से भी बात कर रहे हैं।” मां की शिकायत के आधार पर बुरटोला पुलिस स्टेशन ने यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम और अन्य लागू धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। उत्तरी कोलकाता के पुलिस उपायुक्त दीपक सरकार ने बताया, “हमने मामला दर्ज कर लिया है और जांच चल रही है।” आरोपी को गुरुवार को अदालत में पेश किया जाएगा।
Farmer Protest: Haryana सीमा पर प्रदर्शनकारी किसानों ने तोड़े बैरिकेड्स, केंद्र बातचीत के लिए तैयार
पंजाब-हरियाणा सीमा पर पिछले नौ महीने से किसानों का विरोध जारी है, और अब उन्होंने दिल्ली की ओर अपना मार्च फिर से शुरू कर दिया है। ये किसान न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी रूप से गारंटी देने की मांग कर रहे हैं और शुक्रवार को संसद पर विरोध प्रदर्शन करने की योजना बना रहे हैं।
13 फरवरी से किसान शंभू और खनौरी बॉर्डर पर डटे हुए हैं, और अब 101 किसानों का एक समूह शंभू बॉर्डर से दिल्ली की ओर मार्च करेगा। इस समूह का नेतृत्व किसान नेता सुरजीत सिंह फूल, सतनाम सिंह पन्नू, सविंदर सिंह चौटाला, बलजिंदर सिंह चडियाला और मंजीत सिंह कर रहे हैं। हालांकि, किसान नेता सरवन सिंह पंधेर शंभू बॉर्डर पर ही रहेंगे और दिल्ली नहीं जाएंगे। पंधेर ने बताया कि इस बार वे ट्रैक्टर की बजाय पैदल मार्च करेंगे, ताकि पहले की तरह उनके ट्रैक्टरों पर संशोधन का आरोप न लगे।
इस विरोध को लेकर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। हरियाणा के अंबाला जिले में 9 दिसंबर तक इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गई हैं और भारी बैरिकेड्स लगाए गए हैं। प्रशासन ने पांच या उससे ज्यादा लोगों के इकट्ठा होने पर प्रतिबंध भी लगा दिया है। पुलिस का कहना है कि वे स्थिति को संभालने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं।
किसान मुख्य रूप से MSP की कानूनी गारंटी, कर्ज माफी, पेंशन, बिजली दरों में वृद्धि न करने और 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा, वे 2020-21 के आंदोलन में मारे गए किसानों के परिवारों के लिए मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं।
किसान नेताओं ने इस विरोध को शांतिपूर्ण तरीके से करने का वादा किया है और कहा है कि वे लोकतांत्रिक अधिकार के तहत अपना विरोध जताना चाहते हैं। प्रशासन ने उन्हें दिल्ली जाने के लिए दिल्ली पुलिस से अनुमति लेने की सलाह दी है, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में कोई अनुमति नहीं दी है।
इस विरोध के कारण अंबाला में सभी सरकारी और निजी स्कूल बंद कर दिए गए हैं और यातायात में भी बाधाएं आ सकती हैं।
Shantanu Naidu आए फिर सुर्खियों में, Ratan Tata के निधन के बाद शांतनु नायडू ने किया बड़ा कारनामा
रतन टाटा के विश्वासपात्र सहयोगी और मित्र शांतनु नायडू अपने नए प्रोजेक्ट “बुकीज” के साथ एक खास मिशन पर निकल पड़े हैं। बुकीज एक अनोखी पहल है जिसका उद्देश्य डिजिटल दुनिया में पढ़ने के शौक को फिर से जागृत करना है। यह एक मौन पठन आंदोलन है, जिसमें लोग एक साथ बैठकर चुपचाप किताबें पढ़ते हैं। नायडू अब इस प्रोजेक्ट को जयपुर में लॉन्च करने जा रहे हैं, जो मुंबई में इसकी शुरुआत के बाद इसका अगला बड़ा कदम होगा।
शांतनु नायडू ने लिंक्डइन पर जयपुर में बुकीज के लॉन्च की घोषणा करते हुए लिखा, “जयपुर, यह समय है। हम आपको 8 दिसंबर को जयपुर बुकीज में देखेंगे। बहुत उत्साहित हूँ!” इस कार्यक्रम में लोग सामूहिक रूप से चुपचाप किताबें पढ़ने का अनुभव साझा करेंगे। बुकीज ने पहले ही पुणे और बेंगलुरु में अपनी पहचान बनाई है, और अब शांतनु नायडू दिल्ली, कोलकाता, अहमदाबाद और सूरत में भी इसका विस्तार करने की योजना बना रहे हैं।
शांतनु नायडू ने बेंगलुरु में एक सत्र के दौरान कहा, “बुकीज का मकसद पढ़ने को फिर से लोगों के जीवन का हिस्सा बनाना है। आजकल ध्यान की अवधि बहुत कम हो गई है, हम अब तीन मिनट की रील भी नहीं देख पाते।” उन्होंने यह भी कहा कि सामूहिक पठन समुदाय की भावना को मजबूत करता है, और यह आदत डालने में मदद करता है।
रतन टाटा के साथ उनके गहरे रिश्ते और समर्थन की वजह से शांतनु नायडू की यह यात्रा और भी खास है। टाटा ने शांतनु नायडू के स्टार्टअप “गुडफेलो” को अपनी हिस्सेदारी त्यागकर और शांतनु नायडू के शिक्षा ऋण को माफ करके मदद की थी। टाटा के अक्टूबर में निधन के बाद, शांतनु नायडू ने उन्हें भावुक श्रद्धांजलि देते हुए कहा, “यह दोस्ती अब मेरे भीतर जो खालीपन छोड़ गई है, मैं अपना बाकी जीवन उसे भरने की कोशिश में बिताऊंगा।”
Rajya Sabha: राज्यसभा में मचा हंगामा, Abhishek Manu Singhvi की सीट से बरामद हुई नोटों की गड्डियां, जांच जारी
राज्यसभा में शुक्रवार को एक अजीब घटना घटी, जब सभापति जगदीप धनखड़ ने सदन में जानकारी दी कि गुरुवार को कार्यवाही स्थगित होने के बाद सुरक्षा अधिकारियों ने सीट नंबर 222 के पास से नकदी बरामद की है। यह सीट तेलंगाना से राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को आवंटित है। इस बात की जानकारी मिलने के बाद सदन में हंगामा मच गया और सभी दलों के सांसद इस पर अपनी-अपनी प्रतिक्रिया देने लगे।
सभापति ने बताया कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की जा रही है और यह मामला नियमों के तहत पूरा किया जाएगा। इस बीच, यह खबर सामने आई कि कांग्रेस के बेंच के नीचे नोटों की गड्डी पाई गई, जिससे और भी सनसनी फैल गई। हालांकि, सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह पूरे मामले की जांच की जा रही है और जल्द ही सब कुछ साफ हो जाएगा।
हंगामे के बावजूद, पक्ष और विपक्ष दोनों ही एकजुट होकर संसद की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाने की कोशिश कर रहे हैं। इस घटना ने राज्यसभा के कामकाज पर सवाल उठाए हैं और जांच पूरी होने तक स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है।
इस मामले को लेकर राजनीति में भी गर्मागर्मी शुरू हो गई है और विभिन्न दलों के नेताओं ने अपनी-अपनी प्रतिक्रिया दी है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद इस मामले में क्या खुलासे होते हैं और यह पूरी स्थिति किस दिशा में जाती है।
2nd Test Pink Ball Match Day 1 India vs Australia: दूसरे टेस्ट के पहले दिन का मुकाबला हुआ रोमांचक, क्या Australia को हरा पाएगा India
भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच एडिलेड ओवल में पिंक बॉल टेस्ट का दूसरा मैच खेला जा रहा है। इस मैच में भारत ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। हालांकि, भारत को पहले ही ओवर में बड़ा झटका लगा जब यशस्वी जायसवाल को मिचेल स्टार्क ने अपनी पहली गेंद पर आउट कर दिया। यशस्वी बिना कोई रन बनाए पवेलियन लौट गए। उनका विकेट भारतीय टीम के लिए एक बड़ा झटका था।
पहला विकेट जल्दी गिरा
यशस्वी जायसवाल को मिचेल स्टार्क ने लेग स्टंप पर गेंद पर टप्पा खाकर आउट किया। इस गेंद को उनका पैड लगा और वो एल्बीडब्ल्यू आउट हो गए। यशस्वी ने नॉन-स्टाइकर एंड पर खड़े केएल राहुल से डीआरएस लेने के लिए पूछा, लेकिन राहुल ने इसे नहीं लिया। इसके बाद भारत का पहला विकेट जल्दी गिरा और भारत को 1 विकेट के नुकसान पर 0 रन पर था।
गिल और राहुल की साझेदारी
यशस्वी के आउट होने के बाद शुभमन गिल और केएल राहुल क्रीच पर आए। गिल ने पारी को संभालते हुए 18 रन बनाए और ओवर की चौथी और पांचवीं गेंद पर दो शानदार चौके लगाए। राहुल ने भी कुछ समय क्रीच पर बिताया और उन्होंने 3 रन बनाए। दोनों बल्लेबाज अब भारत के लिए एक अच्छी साझेदारी बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
रोहित शर्मा का मध्यक्रम में उतरना
भारत के कप्तान रोहित शर्मा ने पहले टेस्ट में ओपनिंग की थी, लेकिन इस मैच में उन्होंने फैसला किया है कि वो मध्यक्रम में बल्लेबाजी करेंगे। रोहित ने यह भी बताया कि केएल राहुल और यशस्वी जायसवाल ओपनिंग करेंगे। शुभमन गिल भी वापसी कर रहे हैं और वह तीसरे नंबर पर बल्लेबाजी कर सकते हैं।
ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी में ताकत
ऑस्ट्रेलिया की टीम में एक बदलाव किया गया है। जोश हेजलवुड की जगह स्कॉट बोलैंड को शामिल किया गया है। मिचेल स्टार्क और पैट कमिंस जैसे तेज गेंदबाजों ने पहले ही भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। इस मैच में ऑस्ट्रेलिया की गेंदबाजी भारत के लिए एक बड़ा खतरा बन सकती है।
राहुल-शुभमन की अर्धशतकीय साझेदारी
भारत ने 18 ओवर के बाद एक विकेट पर 67 रन बना लिए हैं। फिलहाल केएल राहुल 35 रन और शुभमन गिल 30 रन बनाकर बल्लेबाजी कर रहे हैं। दोनों के बीच अर्धशतकीय साझेदारी हुई है। राहुल को पारी के आठवें ओवर में जीवनदान मिला था। वह तब खाता भी नहीं खोल सके थे। इसके बाद से राहुल ने जबरदस्त बल्लेबाजी की है। शुभमन भी चोट से वापसी के बाद काफी आत्मविश्वास में दिखे हैं।
भारत को दूसरा झटका
19वें ओवर में 69 के स्कोर पर भारत को दूसरा झटका लगा। केएल राहुल को मिचेल स्टार्क ने मैकस्वीनी के हाथों कैच कराया। शॉर्ट लेंथ की गेंद को राहुल ने गली में खेलने का प्रयास किया, लेकिन वह पूरी तरह से उसे कमिट नहीं कर सके और मैकस्वीनी ने बेहतरीन लो कैच लिया। राहुल 64 गेंद में 37 रन बना सके। उन्होंने शुभमन गिल के साथ 69 रन की साझेदारी की। यशस्वी जायसवाल खाता नहीं खोल सके थे। राहुल को दो जीवनदान भी मिले थे।
भारत की प्लेइंग-11
भारत की टीम में यशस्वी जायसवाल, केएल राहुल, शुभमन गिल, विराट कोहली, रोहित शर्मा, ऋषभ पंत, नीतीश कुमार रेड्डी, रविचंद्रन अश्विन, हर्षित राणा, जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज।
ऑस्ट्रेलिया की प्लेइंग-11
ऑस्ट्रेलिया की टीम में उस्मान ख्वाजा, नाथन मैक्स्वीनी, मार्नस लाबुशेन, स्टीव स्मिथ, ट्रेविस हेड, मिचेल मार्श, एलेक्स कैरी (विकेटकीपर), मिचेल स्टार्क, पैट कमिंस (कप्तान), नाथन लियोन, स्कॉट बोलैंड।
अगला दौर
अब भारत को अपनी पारी को संभालने की जरूरत है। पहले दिन के खेल में अभी काफी कुछ हो सकता है, क्योंकि गुलाबी गेंद से बल्लेबाजी करना हमेशा चुनौतीपूर्ण होता है। खासतौर पर जब सूर्य अस्त हो जाए और शाम के समय गेंद स्विंग करने लगे। भारत को अपनी बल्लेबाजी में धैर्य रखना होगा और ऑस्ट्रेलियाई गेंदबाजों का सामना करना होगा। इस टेस्ट के पहले दिन के खेल ने यह साफ कर दिया है कि यह मैच दोनों टीमों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होगा। ऑस्ट्रेलिया ने शुरुआती दबाव डाला है, लेकिन भारत की टीम भी वापसी करने के लिए तैयार है। देखना होगा कि अगले कुछ घंटों में मैच का रुख किस ओर जाता है।
Devendra Fadnavis ने तीसरी बार Maharashtra के मुख्यमंत्री के रूप में ली शपथ, PM Modi सहित Ambani, Adani और Birla रहे मौजूद
देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को तीसरी बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। इस मौके पर शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे और एनसीपी नेता अजित पवार ने उपमुख्यमंत्री पद की शपथ ली। महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने उन्हें शपथ दिलाई। मुंबई के आज़ाद मैदान में हुए इस समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हुए।
इस बड़े इवेंट में बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, राजनाथ सिंह, शिवराज सिंह चौहान, निर्मला सीतारमण, ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित कई नेता मौजूद थे। इसके अलावा महाराष्ट्र बीजेपी के नेता नारायण राणे और पंकजा मुंडे भी समारोह में शामिल हुए।
मनोरंजन और उद्योग जगत की बड़ी हस्तियाँ भी आईं
इस कार्यक्रम में रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, अडानी समूह के चेयरमैन गौतम अडानी, आदित्य बिड़ला समूह के मालिक कुमार मंगलम बिड़ला अपनी बेटी अनन्या के साथ, और क्रिकेट के मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर भी मौजूद थे। नवविवाहित जोड़ा अनंत अंबानी और राधिका मर्चेंट भी इस इवेंट का हिस्सा बने।
इसके अलावा शाहरुख खान, सलमान खान, संजय दत्त, रणबीर कपूर, रणवीर सिंह और माधुरी दीक्षित जैसे बॉलीवुड सितारे भी इस कार्यक्रम में पहुंचे।
एमवीए के नेताओं ने नहीं लिया हिस्सा
हालांकि, महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के नेताओं ने इस कार्यक्रम में हिस्सा नहीं लिया। उद्धव ठाकरे, शरद पवार, आदित्य ठाकरे, सुप्रिया सुले और जयंत पाटिल ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया। कांग्रेस पार्टी का कोई नेता भी समारोह में मौजूद नहीं था।
फडणवीस की जबरदस्त वापसी
यह तीसरी बार है जब देवेंद्र फडणवीस महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री बने हैं। 2014 में, 44 साल की उम्र में वह पहली बार मुख्यमंत्री बने थे। 2019 में, शिवसेना के साथ सरकार गठन को लेकर विवाद के बाद उन्होंने अजित पवार के साथ मिलकर सीएम और डिप्टी सीएम पद की शपथ ली थी, लेकिन यह सरकार सिर्फ 80 घंटे ही चली थी।
इस बार, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महायुति गठबंधन (बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी) ने 288 सीटों में से 230 सीटों पर जीत हासिल की। बीजेपी ने 149 सीटों पर चुनाव लड़ा और 132 सीटों पर जीत हासिल की, जबकि शिवसेना और एनसीपी ने क्रमशः 57 और 41 सीटें जीतीं।