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Haryana Vidhan Sabha Election: BJP को चुनाव से पहले लगा बड़ा झटका, Ashok Tanwar कांग्रेस में हुए शामिल, जाने कौन है अशोक तंवर

Haryana Vidhan Sabha Election: BJP को चुनाव से पहले लगा बड़ा झटका, Ashok Tanwar कांग्रेस में हुए शामिल, जाने कौन है अशोक तंवर
Haryana Vidhan Sabha Election: BJP को चुनाव से पहले लगा बड़ा झटका, Ashok Tanwar कांग्रेस में हुए शामिल, जाने कौन है अशोक तंवर

हरियाणा विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को बड़ा झटका देते हुए अशोक तंवर गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में लौट आए। वह इस साल की शुरुआत में हरियाणा के तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर की मौजूदगी में भगवा पार्टी में शामिल हुए थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की थी।

अशोक तंवर ने 2019 में कांग्रेस छोड़ दी और 2022 में आप में शामिल हो गए। इस बीच, पूर्व लोकसभा सांसद ने अपनी पार्टी बनाई और कुछ समय के लिए तृणमूल कांग्रेस में भी शामिल हुए। उन्होंने लोकसभा चुनाव के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन का विरोध करते हुए आप से इस्तीफा दे दिया।

अशोक तंवर हरियाणा कांग्रेस प्रमुख के रूप में कार्य कर चुके हैं। हरियाणा में मतदान से ठीक दो दिन पहले उनका कांग्रेस में प्रवेश हुआ है। हरियाणा में मतदान 5 अक्टूबर (शनिवार) को होना है। 2009 में, अशोक तंवर ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में सिरसा से 354,999 मतों के अंतर से लोकसभा चुनाव जीता था। हालांकि, वह 2014 के लोकसभा चुनाव में इंडियन नेशनल लोकदल के चरणजीत सिंह रोरी से हार गए थे।

Shardiya Navratri 2024 : शारदीय नवरात्र में ऐसे करें पूजा, बरसेगी मां का कृपा, पूरे होगी सभी मनोकामनाएं

Shardiya Navratri 2024 : शारदीय नवरात्र में ऐसे करें पूजा, बरसेगी मां का कृपा, पूरे होगी सभी मनोकामनाएं
Shardiya Navratri 2024 : शारदीय नवरात्र में ऐसे करें पूजा, बरसेगी मां का कृपा, पूरे होगी सभी मनोकामनाएं

हस्त नक्षत्र और इंद्र योग के संयोग में शारदीय नवरात्र 3 अक्टूबर दिन गुरुवार से शुरू हो रहे हैं। इस बार नवरात्र 3 से लेकर 11 अक्टूबर तक है और 12 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा। आदि शक्ति नवरात्र में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की नौ दिन अलग-अलग पूजा होती है। इस दौरान भक्त अपनी सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखकर देवी की पूजा करते हैं। शास्त्रों में बताया गया है कि 9 दिन पूरे परिवार के साथ विधि विधान से मां दुर्गा की पूजा अर्चना करने से धन धान्य की कमी नहीं होती और मां दुर्गा का परिवार पर आशीर्वाद बना रहता है।

कलश स्थापना मुहूर्त 2024

अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 2 अक्टूबर की रात 12:18 मिनट से शुरू होगी। इस तिथि का समापन 3 अक्टूबर को देर रात 2:58 पर होगा। उदया तिथि अनुसार गुरुवार 3 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। कलश स्थापना का मुहूर्त कन्या लग्न में सुबह 6 बजे से लेकर सुबह 7:05 तक है। वहीं, अभिजीत में मुहूर्त सुबह 11:31 से लेकर दोपहर 12:19 तक है।

इस बार का नवरात्रि है ख़ास, ऐसे करें पूजा-अर्चना

सनातन धर्म में शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है। आज यानी 3 अक्टूबर गुरुवार से नवरात्रि की शुरुआत हो चुकी है। नवरात्रि में नौ देवियों की पूजा का विधान है। नवरात्रि का त्योहार पूरे भारत में खुब धूमधाम से मनाया जाता है। इस त्यौहार में हम 9 दिनों तक शक्ति, देवी, दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। वहीं इसको दसवां दिन दशहरा के नाम से प्रसिद्ध है। हम सभी नवरात्रि के अवसर पर, मां दुर्गा की प्रतिमाएं को स्थापित करते हैं। इस त्यौहार से जुड़ी कई ऐसी बातें हैं जो काफी लोग नहीं जानते हैं। आज हम आपको इसी के बारे में विस्तार से बताने वाले हैं।

नवरात्रि में हम शक्ति के 9 रूपों को कैसे कर सकते हैं प्रसन्न

पहले दिन हम देवी शैलपुत्री की पूजा करते हैं, मां शैलपुत्री हिमालयराज की पुत्री हैं। वह वृषभ की सवारी करती हैं. वह दाहिने हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल का पुष्प धारण करती हैं। मान्यता है कि इनके पूजन से सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। इनकी उपासना चंद्रमा के बुरे प्रभाव को दूर करती है। मां शैलपुत्री को श्वेत वस्त्र अतिप्रिय है। इनको प्रसन्न करने के लिए लाल, श्वेत सहित ऋतु पुष्प जैसे कनेर के फूल. साथ ही मां के पूजन में बेलपत्र का विशेष महत्व है. इनके अलावा धूप, दीप, अक्षत, फल आदि से माता को प्रसन्न किया जा सकता है।

Maa Shailputri
Maa Shailputri

दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी माँ की पूजा-अर्चना की जाती है। साधक इस दिन अपने मन को माँ के चरणों में लगाते हैं। ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली। इस प्रकार ब्रह्मचारिणी का अर्थ हुआ तप का आचरण करने वाली। इनके दाहिने हाथ में जप की माला एवं बाएँ हाथ में कमण्डल रहता है। यह जानकारी भविष्य पुराण दी गई है। इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं। जिससे मां प्रसन्न होती हैं।

Brahmacharini
Brahmacharini

नवरात्रि उपासना में तीसरे दिन की पूजा का अत्यधिक महत्व है और इस दिन चंद्रघंटा के विग्रह की पूजा-अर्चना की जाती है।। इस दिन साधक का मन ‘मणिपूर’ चक्र में प्रविष्ट होता है। लोकवेद के अनुसार माँ चंद्रघंटा की कृपा से अलौकिक वस्तुओं के दर्शन होते हैं, दिव्य सुगंधियों का अनुभव होता है और विविध प्रकार की दिव्य ध्वनियाँ सुनाई देती हैं। ये क्षण साधक के लिए अत्यंत सावधान रहने के होते हैं। माँ चंद्रघंटा का स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग सोने की तरह चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। मां चन्द्रघंटा को नारंगी रंग प्रिय है, तो भक्त को जहां तक संभव हो, पुजन के समय सूर्य के चमक के समान रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए।

Chandragantha
Chandragantha

नवरात्रि उपासना के चौथे दिन कूष्माण्डा देवी के स्वरूप की उपासना की जाती है। इस दिन साधक का मन ‘अनाहत’ चक्र में अवस्थित होता है। इस दिन उसे अत्यंत पवित्र और शांत मन से कूष्माण्डा देवी के स्वरूप को ध्यान में रखकर पूजा-अर्चना करना चाहिए। मान्यता है कि जब सृष्टि का अस्तित्व नहीं था, तब इन्हीं देवी ने ब्रह्मांड की रचना की थी। माना जाता है कि ये ही सृष्टि की आदि-स्वरूपा, आदिशक्ति हैं। जानकार बताते हैं कि इस दिन जहाँ तक संभव हो बड़े माथे वाली तेजस्वी विवाहित महिला का पूजन करना चाहिए। उन्हें भोजन में दही, हलवा खिलाना लाभकारी होता है। इसके बाद फल, सूखे मेवे और सौभाग्य का सामान भेंट करना चाहिए।

Kushmanda
Kushmanda

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन स्कंदमाता की उपासना का दिन होता है। इनके बारे में कहा जाता है कि ये अपने भक्तों के लिए मोक्ष के द्वार खोल देती हैं। स्कंदमाता की चार भुजाएँ हैं। इनके दाहिनी तरफ की नीचे वाली भुजा, जो ऊपर की ओर उठी हुई है, उसमें कमल पुष्प है। बाईं तरफ की ऊपर वाली भुजा में वरमुद्रा में तथा नीचे वाली भुजा जो ऊपर की ओर उठी है उसमें भी कमल पुष्प ली हुई हैं। इनका वर्ण पूर्णतः शुभ्र है। ये कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं। इसी कारण इन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है। इनका वाहन सिंह (शेर) है।

Skandmata
Skandmata

नवरात्रि का छठा दिन माँ कात्यायनी की उपासना का दिन होता है। इनके पूजन से अद्भुत शक्ति का संचार होता है जिससे दुश्मनों का संहार करने में ये सक्षम बनाती हैं। इनका पूजा-अर्चना गोधुली बेला में करना होता है। प्रत्येक सर्वसाधारण के लिए आराधना योग्य यह श्लोक सरल और स्पष्ट है। माँ जगदम्बे की भक्ति पाने के लिए इसे कंठस्थ कर नवरात्रि में छठे दिन इसका जाप करना चाहिए।

“या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:॥” मान्यता है कि जिन कन्याओ के विवाह मे विलम्ब हो रहा हो, उन्हे इस दिन माँ कात्यायनी की उपासना अवश्य करनी चाहिए, जिससे उन्हे मनोवान्छित वर की प्राप्ति होती है।

Katyayni
Katyayni

नवरात्रि के सातवें दिन माँ कालरात्रि की उपासना का विधान है। इस दिन साधक का मन ‘सहस्रार’ चक्र में स्थित रहता है। इसके लिए ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों का द्वार खुलने लगता है। देवी कालरात्रि को व्यापक रूप से माता देवी – काली, महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, मृत्यू-रुद्राणी, चामुंडा, चंडी और दुर्गा के कई विनाशकारी रूपों में से एक माना जाता है। रौद्री , धूम्रवर्णा कालरात्रि मां के अन्य प्रसिद्ध नामों में से हैं। इनके शरीर का रंग घने अंधकार की तरह एकदम काला है। सिर के बाल बिखरे हुए हैं। गले में विद्युत की तरह चमकने वाली माला है। इनके तीन नेत्र हैं। ये तीनों नेत्र ब्रह्मांड के सदृश गोल हैं। इनसे विद्युत के समान चमकीली किरणें बाहर आती रहती हैं।

Kalratri
Kalratri

नवरात्रि के आठवें दिन माँ महागौरी की उपासना का विधान है। महागौरी की चार भुजाएँ हैं। इनका वाहन वृषभ है। इनके ऊपर के दाहिने हाथ में अभय मुद्रा और नीचे वाले दाहिने हाथ में त्रिशूल है। ऊपरवाले बाएँ हाथ में डमरू और नीचे के बाएँ हाथ में वर-मुद्रा हैं। इनकी मुद्रा अत्यंत शांत है। यही महागौरी देवताओं की प्रार्थना पर हिमालय की श्रृंखला मे शाकंभरी के नाम से प्रकट हुई थी। अष्टमी के दिन महिलाएं अपने सुहाग के लिए देवी मां को चुनरी भेंट करती हैं। देवी गौरी की पूजा का विधान भी पूर्ववत है अर्थात जिस प्रकार सप्तमी तिथि तक आपने मां की पूजा की है उसी प्रकार अष्टमी के दिन भी प्रत्येक दिन की तरह देवी की पंचोपचार सहित पूजा करते हैं।

Mahagauri
Mahagauri

माँ दुर्गा की नौवीं शक्ति का नाम सिद्धिदात्री हैं। ये सभी प्रकार की सिद्धियों को देने वाली हैं। नवरात्र-पूजन के नौवें दिन इनकी उपासना की जाती है। इस दिन शास्त्रीय विधि-विधान और पूर्ण निष्ठा के साथ साधना करने वाले साधक को सभी सिद्धियों की प्राप्ति हो जाती है। सृष्टि में कुछ भी उसके लिए अगम्य नहीं रह जाता है। ब्रह्मांड पर पूर्ण विजय प्राप्त करने की सामर्थ्य उसमें आ जाती है।

IIT Bombay के प्रोफेसर ने क्यों पहना 5-स्टार होटल में फटे मोजे, जाने कौन है वो प्रोफेसर जिसने दी इतनी बड़ी सीख

IIT Bombay के प्रोफेसर ने क्यों पहना 5-स्टार होटल में फटे मोजे, जाने कौन है वो प्रोफेसर जिसने दी इतनी बड़ी सीख
IIT Bombay के प्रोफेसर ने क्यों पहना 5-स्टार होटल में फटे मोजे, जाने कौन है वो प्रोफेसर जिसने दी इतनी बड़ी सीख

नई दिल्ली के एक आलीशान होटल में छेद वाले मोज़े पहने एक भारतीय व्यक्ति की तस्वीर सोशल मीडिया पर शेयर की गई। IIT बॉम्बे के प्रोफेसर ने अब इस पर प्रतिक्रिया देते हुए अपनी अनूठी अलमारी पसंद के पीछे का कारण बताया है।

भारत के सौर पुरुष या सौर गांधी के नाम से मशहूर IIT बॉम्बे के प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी ने बताया कि यह तस्वीर उस समय ली गई थी जब वे एक नेतृत्व शिखर सम्मेलन में भाषण दे रहे थे। वे संस्थान में 20 से अधिक वर्षों से पढ़ा रहे हैं और पर्यावरण के बारे में जागरूकता बढ़ाने के मिशन पर हैं। चेतन सिंह सोलंकी ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए 20 राज्यों में 43,000 किलोमीटर से अधिक की यात्रा की है।

आईआईटी प्रोफेसर के संदेश ने कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को प्रभावित किया, जिन्होंने उनके इस प्रयास की प्रशंसा की उन्होंने लिखा, “किसी ने 25 सितंबर को द इकोनॉमिक टाइम्स एनर्जी लीडरशिप समिट में अपना भाषण देने से पहले एक शांत पल के दौरान दिल्ली के हयात में मेरी यह तस्वीर खींची।” प्रोफेसर ने स्वीकार किया, “हाँ, मेरे फटे मोज़े दिख रहे थे! मुझे उन्हें बदलने की ज़रूरत है, और मैं ऐसा कर सकता हूँ। लेकिन प्रकृति ऐसा नहीं कर सकती। प्रकृति में सब कुछ सीमित है।” उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि जबकि वे आसानी से नए मोज़े खरीद सकते हैं, प्रकृति अधिक कचरे को संभाल नहीं सकती।

प्रोफेसर सोलंकी ने कहा कि वे जो कुछ भी खरीदते हैं, उसका यथासंभव कुशलतापूर्वक उपयोग करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने पोस्ट में लिखा, “मैं अपनी उत्पादकता बढ़ाने के लिए सबसे अच्छे गैजेट का उपयोग कर सकता हूँ, लेकिन मैं अपने कार्बन पदचिह्न को कम करने के लिए कम से कम सामग्री का उपयोग करने का प्रयास करता हूँ।”

प्रोफेसर सोलंकी ने बताया कि जिस तरह व्यवसायी अपने निवेश पर लाभ बढ़ाने का लक्ष्य रखते हैं, उसी तरह वे एक “सामाजिक कार्यकर्ता” के रूप में “अपने समय के प्रभाव” को अधिकतम करना चाहते हैं। उन्होंने स्थिरता, नेतृत्व, जलवायु सुधार और अतिसूक्ष्मवाद से संबंधित हैशटैग के साथ अपने पोस्ट का समापन किया।

IIT प्रोफेसर का संदेश कई सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के साथ गूंज उठा, जिन्होंने “प्रकृति की भलाई को प्राथमिकता देने” के उनके प्रयास की प्रशंसा की। अन्य लोगों ने अधिक हल्के-फुल्के अंदाज में बात की, जिसमें एक यूजर ने कहा, “धन्यवाद, प्रोफेसर चेतन सिंह सोलंकी! आपके उदाहरण ने मुझे अपने फटे मोजे अपनाने के लिए प्रेरित किया है! इससे वास्तव में कार्बन फुटप्रिंट कम करने में मदद मिलती है!” हालांकि, कई यूजर्स ने भारत में स्थिरता के लिए सोलंकी के लंबे समय से चल रहे प्रयासों की भी सराहना की।

मैक्सिकन सैनिकों ने भारत, नेपाल, पाकिस्तान से आए अप्रवासियों को ले जा रहे ट्रक पर की गोलीबारी, 33 में से 6 लोगों की मौत

मैक्सिकन सैनिकों ने भारत, नेपाल, पाकिस्तान से आए अप्रवासियों को ले जा रहे ट्रक पर की गोलीबारी, 33 में से 6 लोगों की मौत
मैक्सिकन सैनिकों ने भारत, नेपाल, पाकिस्तान से आए अप्रवासियों को ले जा रहे ट्रक पर की गोलीबारी, 33 में से 6 लोगों की मौत

मेक्सिको के रक्षा विभाग ने बुधवार, 3 अक्टूबर, 2024 को बताया कि ग्वाटेमाला सीमा के पास एक ट्रक पर मैक्सिकन सैनिकों द्वारा गोलीबारी किए जाने के बाद छह प्रवासियों की मौत हो गई। विभाग के अनुसार, यह घटना मंगलवार, 1 अक्टूबर, 2024 को हुइक्सटला शहर के पास चियापास में हुई। सैनिकों ने दावा किया कि जब ट्रक और दो अन्य वाहन उनके स्थान के पास पहुंचे तो उन्होंने गोलियों की आवाज़ सुनी। दो सैनिकों ने ट्रक पर गोलीबारी की, जो मिस्र, नेपाल, क्यूबा, ​​भारत, पाकिस्तान और संभवतः किसी अन्य देश से प्रवासियों को ले जा रहा था। वाहन का निरीक्षण करने पर, सैनिकों ने पाया कि चार प्रवासी मृत थे और 12 घायल थे।

घायलों में से दो ने बाद में दम तोड़ दिया, जबकि शेष 10 की हालत तुरंत स्पष्ट नहीं हो पाई। स्थानीय अभियोजकों ने पुष्टि की कि सभी मौतें गोली लगने से हुईं। रक्षा विभाग ने इस बात की पुष्टि नहीं की कि गोलीबारी सैनिकों की ओर से हुई थी या ट्रक में कोई हथियार मिला था। वाहन में सवार 33 प्रवासियों में से 17 सुरक्षित थे। यह क्षेत्र प्रवासियों की तस्करी के लिए जाना जाता है, जिसमें अक्सर भीड़भाड़ वाले मालवाहक ट्रक शामिल होते हैं।

गोलीबारी के लिए जिम्मेदार दो सैनिकों को जांच लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया। मेक्सिको में, नागरिकों से जुड़ी घटनाएं नागरिक अधिकार क्षेत्र में आती हैं, लेकिन सैन्य कर्मियों को कोर्ट मार्शल का भी सामना करना पड़ सकता है। यह पहली बार नहीं है जब मैक्सिकन सेना ने इस क्षेत्र में प्रवासियों को ले जा रहे वाहनों पर गोलीबारी की है, जहां ड्रग कार्टेल भी नियंत्रण के लिए होड़ करते हैं। 2021 में, नेशनल गार्ड ने प्रवासियों को ले जा रहे एक पिकअप ट्रक पर गोली चलाई, जिसके परिणामस्वरूप एक की मौत हो गई और चार घायल हो गए। प्रवासी अधिकार कार्यकर्ता इरिनियो मुजिका ने सैनिकों के इस दावे पर संदेह व्यक्त किया कि प्रवासियों या उनके तस्करों ने पहले गोली चलाई थी, उन्होंने कहा कि अक्सर तस्कर रिश्वत देकर इस क्षेत्र से गुजरते हैं।

पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन की मुश्किलें बढ़ीं, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जारी किया समन

पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन की मुश्किलें बढ़ीं, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जारी किया समन
पूर्व क्रिकेटर और कांग्रेस नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन की मुश्किलें बढ़ीं, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जारी किया समन

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने क्रिकेटर से नेता बने मोहम्मद अजहरुद्दीन को हैदराबाद क्रिकेट एसोसिएशन (एचसीए) के अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में तलब किया है। पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने संकेत दिया है कि कांग्रेस नेता ने एजेंसी के समक्ष पेश होने के लिए अतिरिक्त समय मांगा है।

यह जांच, धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) मामले का हिस्सा है, जो एचसीए के भीतर कथित वित्तीय अनियमितताओं का पता लगाती है, जिन्हें पहली बार पिछले साल नवंबर में ईडी द्वारा की गई तलाशी के दौरान चिह्नित किया गया था। पीटीआई के अनुसार, यह जांच तेलंगाना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दायर तीन एफआईआर और आरोपपत्रों से उपजी है, जिसमें एचसीए अधिकारियों पर 20 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया गया है।

एचसीए अध्यक्ष के रूप में अजहरुद्दीन का कार्यकाल, जो 2019 में शुरू हुआ और 2023 में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एल. नागेश्वर राव की नियुक्ति के साथ समाप्त हुआ, एचसीए शीर्ष परिषद के भीतर आंतरिक संघर्षों और कई कानूनी लड़ाइयों से प्रभावित रहा। इन चुनौतियों के बावजूद, अजहरुद्दीन ने संघ के भीतर व्याप्त भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकने की शपथ लेते हुए दूसरा कार्यकाल मांगा था।

Sadhguru Padam Photo: ईशा फाउंडेशन विवाद में नया मोड़, “सद्गुरु पदम फोटो” पर शुरू हुआ ऑनलाइन ट्रोलिंग, जाने पूरा विवाद

Sadhguru Padam Photo: ईशा फाउंडेशन विवाद में नया मोड़, "सद्गुरु पदम फोटो" पर शुरू हुआ ऑनलाइन ट्रोलिंग, जाने पूरा विवाद
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सद्गुरु जग्गी वासुदेव की ईशा फाउंडेशन की वेबसाइट के स्क्रीनशॉट वायरल हो गए हैं, जिसमें खुलासा हुआ है कि सद्गुरु के पैरों की तस्वीरें ₹3,200 में बेची जा रही हैं। “सद्गुरु पदम फोटो” शीर्षक वाली इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जिसमें कुछ नेटिज़न्स ने अपनी असहमति व्यक्त की है और कहा है कि उन्होंने उनके लिए “सारा सम्मान खो दिया है”।

यह विवाद मद्रास उच्च न्यायालय की चल रही पुलिस जांच और जांच के बीच सामने आया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि फाउंडेशन में महिलाओं को वहां रहने के लिए “ब्रेनवॉश” किया जा रहा है। सेवानिवृत्त प्रोफेसर एस कामराज की याचिका के बाद जांच में कथित तौर पर लगभग 150 पुलिसकर्मी शामिल थे। प्रोफेसर ने आरोप लगाया कि उनकी दो बेटियाँ अपने परिवार से संपर्क बनाए बिना ईशा फाउंडेशन के कोयंबटूर केंद्र में रह रही थीं।

आरोपों के जवाब में, ईशा फाउंडेशन ने किसी भी गलत काम से इनकार किया, जिसमें कहा गया कि केंद्र में मौजूद व्यक्तियों को “अपना रास्ता चुनने की स्वतंत्रता और बुद्धि है” और वे अपनी मर्जी से वहां रह रहे हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, ₹3,200 के “सद्गुरु पदम फोटो” विवरण के वायरल स्क्रीनशॉट में कहा गया कि गुरु के पैरों का सम्मान आध्यात्मिक कारणों से किया जाता है और इससे भक्तों को गुरु के साथ अपने संबंध को गहरा करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, इस तरह की वस्तुओं की बिक्री ने ऑनलाइन उपहास उड़ाया, जिसमें उपयोगकर्ताओं ने फाउंडेशन का मजाक उड़ाया। “अर्थव्यवस्था इतनी खराब है कि सद्गुरु पैरों की तस्वीरें भी बेच रहे हैं” और फोटो की कीमत के बारे में व्यंग्यात्मक टिप्पणियों जैसी टिप्पणियों ने सोशल मीडिया पर बाढ़ ला दी, जिससे प्रतिक्रिया और बढ़ गई।

Delhi News: दिल्ली में हाई-प्रोफाइल ड्रग सिंडिकेट का भंडाफोड़, 2,000 करोड़ रुपये की कोकीन जब्त

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दिल्ली पुलिस ने दक्षिण दिल्ली में छापेमारी के दौरान 500 किलोग्राम से अधिक कोकीन बरामद की है, जिसकी कीमत 2,000 करोड़ रुपये से अधिक है। यह राष्ट्रीय राजधानी में मादक पदार्थों की अब तक की सबसे बड़ी जब्ती है। इस बड़ी खेप के सिलसिले में चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। माना जा रहा है कि ये लोग हाई-प्रोफाइल पार्टियों को ड्रग्स सप्लाई करने वाले अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का हिस्सा हैं।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने महिपालपुर एक्सटेंशन में छापेमारी की और एक गोदाम से ड्रग्स बरामद की। स्पेशल सेल के एडिशनल सीपी प्रमोद सिंह कुशवाह के मुताबिक, वसंत विहार निवासी मुख्य आरोपी तुषार गोयल को उसके साथियों हिमांशु और औरंगजेब के साथ-साथ कुर्ला वेस्ट से रिसीवर भरत जैन के साथ गिरफ्तार किया गया। आरोपी के पास से करीब 15 किलोग्राम कोकीन बरामद की गई, जबकि बाकी ड्रग्स गोदाम से बरामद की गई। जांच में मध्य पूर्वी देश से संभावित संबंध सामने आए हैं। एडिशनल सीपी प्रमोद सिंह कुशवाह ने इसे “हाल के दिनों में सबसे बड़ी कोकीन की खेप” बताया। ये गिरफ्तारियाँ त्यौहारी सीज़न से ठीक पहले की गई हैं, पुलिस संभावित नार्को-टेरर एंगल की जाँच कर रही है। सिंडिकेट ने कथित तौर पर दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में ड्रग्स वितरित करने की योजना बनाई थी।

यह महत्वपूर्ण ड्रग जब्ती तिलक नगर में हेरोइन और कोकीन के साथ दो अफ़गान नागरिकों की हाल ही में हुई गिरफ़्तारी और एक अलग घटना के बाद हुई है, जहाँ दिल्ली कस्टम्स ने इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक लाइबेरियाई नागरिक से 1,660 ग्राम कोकीन जब्त की थी। दोनों घटनाएँ क्षेत्र में मादक पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए बढ़ते प्रयासों को दर्शाती हैं।

Israel-Iran war: अमेरिका ने ईरान पर सख्त कदम उठाने की दी चेतावनी, ईरान पर नए प्रतिबंध लगने की संभावना

Israel-Iran war: अमेरिका ने ईरान पर सख्त कदम उठाने की दी चेतावनी, ईरान पर नए प्रतिबंध लगने की संभावना
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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने बुधवार को कहा कि वे तेहरान द्वारा इजरायल पर मिसाइल हमलों के जवाब में ईरान के तेल रिग और परमाणु सुविधाओं पर हमला करने की इजरायल की कथित योजनाओं के विरोध में हैं। जो बाइडन ने जोर देकर कहा कि तेल अवीव को खुद की रक्षा करने का अधिकार है, लेकिन उसे “आनुपातिक रूप से” कार्य करना चाहिए।

मंगलवार को इजरायल के खिलाफ ईरान के मिसाइल हमले और लेबनान में हिजबुल्लाह पर तेल अवीव की कार्रवाई ने मध्य पूर्व में सुरक्षा स्थिति को बढ़ा दिया है। टाइम्स ऑफ इजरायल के अनुसार, जो बाइडन ने ईरान के खिलाफ संभावित नए प्रतिबंधों पर फोन पर G7 नेताओं से भी बात की।

व्हाइट हाउस ने कहा कि G7 नेताओं ने “इजराइल के खिलाफ ईरान के हमले की स्पष्ट रूप से निंदा की”। जो बिडेन ने यह भी कहा कि वह ईरान पर हमला करने की अपनी योजनाओं के बारे में इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू सहित इजरायल से जल्द ही बात करेंगे, जबकि उन्होंने उल्लेख किया कि इस्लामिक राष्ट्र “रास्ते से बहुत दूर” चला गया।

जो बाइडन ने कहा, “हम इजरायलियों के साथ चर्चा करेंगे कि वे क्या करने जा रहे हैं, लेकिन हम सभी सात (G7 देश) इस बात पर सहमत हैं कि उन्हें जवाब देने का अधिकार है, लेकिन उन्हें आनुपातिक रूप से जवाब देना चाहिए।”

इजरायल द्वारा ईरान के गैस और तेल रिग या परमाणु सुविधाओं सहित रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर हमला करने की संभावना है। एक्सियोस ने इजरायली अधिकारियों के हवाले से बताया कि तेल अवीव तेहरान के वायु रक्षा शस्त्रागार पर भी हमला कर सकता है।

एक्सियोस ने बताया कि इजरायली प्रतिक्रिया में लड़ाकू विमानों का उपयोग करके हवाई हमले और लगभग 2 महीने पहले तेहरान में हमास नेता इस्माइल हनीयाह को मारने वाले अभियान जैसे गुप्त अभियान भी शामिल हो सकते हैं।

यदि इजरायल इस योजना का पालन करता है, तो यह मध्य पूर्व में सामान्य जीवन को प्रभावित करने वाले युद्ध को और बढ़ा सकता है। तेहरान ने मंगलवार को धमकी दी कि यदि तेल अवीव उसके मिसाइल हमले का बलपूर्वक जवाब देता है, तो वह फिर से हमला करेगा।

एक इज़रायली अधिकारी ने प्रकाशन को बताया कि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान हमले का किस तरह जवाब देगा। उन्होंने कहा कि अगर कोई इस संभावना पर विचार करता है कि तेहरान पूरी तरह से जवाब देगा, तो यह पूरी तरह से अलग खेल होगा।

इसके अलावा, नेतन्याहू ने हमले के सैन्य जवाब पर चर्चा करने के लिए मंगलवार रात को सुरक्षा कैबिनेट की बैठक बुलाई। इज़रायली पीएम ने कथित तौर पर सुरक्षा कैबिनेट की बैठक में कहा: “ईरान ने आज रात एक बड़ी गलती की – और उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।” उन्होंने अपने दुश्मनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने के तेल अवीव के दृढ़ संकल्प को भी दोहराया।

“ईरान में शासन हमारी खुद की रक्षा करने की दृढ़ संकल्प और हमारे दुश्मनों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई करने की हमारी दृढ़ संकल्प को नहीं समझता है… वे समझ जाएंगे।”

इस बैठक के दौरान, इज़रायली अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई शुरू करने पर सहमति जताई, लेकिन उन्हें यूएस सेंट्रल कमांड से रक्षात्मक सहयोग और गोला-बारूद की आपूर्ति और अन्य परिचालन सहायता पर अमेरिका के साथ विचार-विमर्श करने की आवश्यकता थी। दक्षिण कैरोलिना के सीनेटर लिंडसे ग्राहम सहित अमेरिकी सांसदों ने ईरान के तेल रिग के खिलाफ हमले का समर्थन किया है।

ग्राहम ने एक बयान में कहा कि वह जो बाइडन प्रशासन से आग्रह करेंगे कि वह इजरायल के साथ मिलकर ईरान की तेल रिफाइनरियों से शुरुआत करते हुए एक व्यापक प्रतिक्रिया का समन्वय करे। उन्होंने कहा कि इस्लामिक राष्ट्र की तेल रिफाइनरियों पर “बहुत जोरदार प्रहार किया जाना चाहिए।”

Kangana Ranaut Controversy: कंगना रनौत एक बार फिर विवादों में, गांधी जयंती पर किया विवादित टिप्पणी, कहा ‘देश के पिता नहीं होते, लाल होते हैं’

Kangana Ranaut Controversy: कंगना रनौत एक बार फिर विवादों में, गांधी जयंती पर किया विवादित टिप्पणी, कहा 'देश के पिता नहीं होते, लाल होते हैं'
Kangana Ranaut Controversy: कंगना रनौत एक बार फिर विवादों में, गांधी जयंती पर किया विवादित टिप्पणी, कहा 'देश के पिता नहीं होते, लाल होते हैं'

अभिनेत्री-राजनेता कंगना रनौत ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री पर की गई अपनी टिप्पणी से विवाद खड़ा कर दिया। हिमाचल प्रदेश के मंडी से भाजपा सांसद ने अपनी पोस्ट में कहा कि देश में पिता नहीं बल्कि बेटे होते हैं।

इस पोस्ट ने विवाद खड़ा कर दिया क्योंकि ऐसा लग रहा था कि राष्ट्रपिता के रूप में महात्मा गांधी के कद को कम करके आंका गया है। कंगना रनौत ने अपनी एक इंस्टाग्राम स्टोरी में लिखा: “देश के पिता नहीं, देश के तो लाल होते हैं। धन्य हैं भारत माता के ये लाल।”

एक अन्य स्टोरी में, कंगना रनौत ने भारत में स्वच्छता पर गांधी की विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रशंसा की। गांधी जयंती पर अभिनेत्री की पोस्ट पर कांग्रेस की ओर से कड़ी प्रतिक्रिया आई।

कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कंगना रनौत को ‘गोडसे भक्त’ कहा और कहा कि हर कोई सम्मान का हकदार है। सुप्रिया श्रीनेत ने गांधी के खिलाफ कंगना रनौत की टिप्पणी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी सवाल उठाए।

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा “बीजेपी सांसद कंगना ने महात्मा गांधी की जयंती पर यह भद्दा कटाक्ष किया। गोडसे के उपासक बापू और शास्त्री जी में अंतर करते हैं। क्या नरेंद्र मोदी अपनी पार्टी के नए गोडसे भक्त को दिल से माफ करेंगे? राष्ट्रपिता हैं, बेटे हैं और शहीद हैं। हर कोई सम्मान का हकदार है।”

इस बीच, पंजाब के वरिष्ठ भाजपा नेता मनोरंजन कलिता ने कंगना रनौत की टिप्पणी के लिए उनकी आलोचना की। कलिता ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा कि मंडी की सांसद ने अपने छोटे से राजनीतिक करियर में विवादित बयान देने की आदत बना ली है।

वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “राजनीति उनका क्षेत्र नहीं है। राजनीति एक गंभीर मामला है। बोलने से पहले सोचना चाहिए… उनकी विवादित टिप्पणी पार्टी के लिए परेशानी का कारण बनती है।”

इससे पहले, कंगना रनौत को 2021 में निरस्त किए गए तीन कृषि कानूनों की वापसी की वकालत करने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। उन्होंने उस समय यह भी दावा किया था कि विरोध स्थलों पर “लाशें लटक रही थीं और बलात्कार हो रहे थे”। हालांकि, कंगना रनौत ने आलोचना के बाद अपना बयान वापस ले लिया। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें याद रखना चाहिए कि वह सिर्फ़ एक कलाकार ही नहीं बल्कि भाजपा की सदस्य भी हैं।

Lal Bahadur Shastri Jayanti: भारत का ऐसा सादा प्रधानमंत्री जिसने लाहौर तक कर दी थी भारत की सीमा, जानिए लाल बहादुर शास्त्री जीवन के बारे कुछ अनकही बाते और उनके मौत का रहस्य

Lal Bahadur Shastri Jayanti: भारत का ऐसा सादा प्रधानमंत्री जिसने लाहौर तक कर दी थी भारत की सीमा, जानिए लाल बहादुर शास्त्री जीवन के बारे कुछ अनकही बाते और उनके मौत का रहस्य
Lal Bahadur Shastri Jayanti: भारत का ऐसा सादा प्रधानमंत्री जिसने लाहौर तक कर दी थी भारत की सीमा, जानिए लाल बहादुर शास्त्री जीवन के बारे कुछ अनकही बाते और उनके मौत का रहस्य

आज 2 अक्टूबर है, ये दिन हमारे देश के लिए काफी खास है। इस दिन देश के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व देश के दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती है। महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर जिले में हुआ था। वहीं, लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 यूपी के मुगलसराय में हुआ था। लाल बहादुर शास्त्री गांधी से काफी प्रभावित थे।

प्रारंभिक जीवन

देश के दूसरे कद्दावर पीएम लाल बहादुर शास्त्री साफ-सुथरी छवि के व्यक्ति थे। जितनी सादगी उनके व्यक्तित्व में थी उतनी ही उनकी भाषा भी मीठी थी। लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के मुगलसराय में हुआ। उनका असली नाम “लाल बहादुर” था, लेकिन वे “शास्त्री” उपनाम से अधिक प्रसिद्ध हुए। उनका उपनाम “शास्त्री” उन्हें बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री के दौरान मिला, जहां उन्हें संस्कृत में उनकी विद्या के लिए सम्मानित किया गया।

शास्त्री जी का परिवार साधारण था, और उनके पिता एक शिक्षक थे। उनके जीवन में कठिनाइयों का सामना करते हुए, उन्होंने शिक्षा को प्राथमिकता दी। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय विद्यालयों से प्राप्त की और बाद में काशी हिंदू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया।

स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी

लाल बहादुर शास्त्री का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम से गहरे जुड़े हुआ था। 1920 में महात्मा गांधी के असहमति आंदोलन के दौरान वे सक्रिय रूप से भाग लेने लगे। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होकर स्वतंत्रता की लड़ाई में योगदान दिया। शास्त्री जी को कई बार गिरफ्तार किया गया, और उन्होंने जेल में भी समय बिताया। यह उनके अदम्य साहस और देशभक्ति का प्रतीक था।

ये सफर आसान नहीं

27 मई 1964 को जब भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का निधन हुआ, तब देश राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था। नेहरू के उत्तराधिकारी का चयन एक जटिल मुद्दा बन गया, क्योंकि उस समय किसी पूर्व निर्धारित उत्तराधिकारी की परंपरा नहीं थी। कई नेता इस पद के लिए दावेदारी पेश कर रहे थे, लेकिन अंततः लाल बहादुर शास्त्री की स्थिति मजबूत हुई।

लेकिन ये राह इतनी आसान थोड़ी थी, उस समय प्रधानमंत्री पद की दौड़ में गुलजारी लाल नंदा, जय प्रकाश नारायाण और मोरारजी देसाई शामिल थे, जो शास्त्री को कड़ी टक्कर दे रहे थे। उस समय गुलजारी लाल नंदा थे तत्कालीन गृह मंत्री थे और इस लिहाज से मंत्रिमंडल में भी वो दूसरे स्थान पर थे। वहीं, मोरारजी देसाई भी थे, जिनका मंत्रिमंडल के बाहर बहुत गहरी छाप थी और जय प्रकाश नारायण भी अपने करिश्माई व्यक्तित्व के लिए शुमार थे। नेहरू के बाद ऐसे तो बहुत से नाम आगे आए लेकिन धीरे-धीरे बात मोरारजी देसाई और शास्त्री पर आकर रूक गई। उस समय के कांग्रेस अध्यक्ष कामराज की सबसे बड़ी चिंता थी  पार्टी की एकता को बनाए रखना।

शास्त्री बने प्रधानमंत्री

शास्त्री और मोरारजी के बीच शास्त्री का पलड़ा भारी होने की दो वजहें थी, एक तो तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष कामराज मोरारजी देसाई के खिलाफ ही थे। दूसरा अखबारों में एक खबर छपी कि मोरारजी देसाई के पक्ष में उनके समर्थक दावेदारी कर रहे हैं। इससे पार्टी में यह संदेश गया कि मोरारजी पीएम बनेंगे तो पार्टी के नेता नाराज हो सकते हैं, यही खबर ही मोररजी के खिलाफ गई और शास्त्री के नाम पर मुहर लग गई। फिर 31 मई 1964 को लाल बहादुर शास्त्री के रूप में देश को दूसरा प्रधानमंत्री मिल गया। खास बात यह थी कि उस दौरान खुद शास्त्री भी अपने आपको पीएम पद का दावेदार नहीं मानते थे उनका मानना था कि नेहरू का उत्तराधिकारी इंदिरा या फिर जेपी नारायण हो सकते हैं। पर इतिहास को कुछ और मंजूर था।

शास्त्री जी का कार्यकाल

प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की मौत के बाद यह दुविधा थी कि किसे प्रधानमंत्री बनाया जाए। एक नाम सभी के सामने था। लाल बहादुर शास्त्री का। 9 जून 1964 को वह देश के दूसरे प्रधानमंत्री बनें। केवल 18 महीने तक वो इस पद पर रहे। बता दें कि जब पाकिस्तान ने 1965 में भारत पर हमला किया तो उन्हें ये लग रहा था कि धोती-कुर्ता पहनने वाला छोटे कद ये प्रधानमंत्री कमजोर है। लेकिन शास्त्री जी ने कड़ा रुख अपनाया और पाकिस्तान पर हमले का आदेश दे दिया। इस दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान थे। पाकिस्तान के इस युद्ध में भी हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच अमेरिका ने हस्तक्षेप किया। 1966 में ताशकंद में युद्ध विराम के समझौते पर हस्ताक्षर हुआ। लेकिन उसी रात शास्त्री जी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

भारतीय सेना की ताकत

1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध शास्त्री जी के प्रधानमंत्री बनने के बाद का एक बड़ा संकट था। उस समय, जब पाकिस्तान ने भारतीय सीमाओं पर आक्रमण किया, शास्त्री जी ने दृढ़ता और साहस के साथ भारतीय सेना को प्रेरित किया। उन्होंने भारतीय सेना को आधुनिकतम उपकरणों और संसाधनों से लैस करने का काम किया। उनकी रणनीति और निर्णय लेने की क्षमता ने न केवल भारतीय सेना की ताकत को बढ़ाया, बल्कि देशवासियों में भी आत्मविश्वास भरा।

 की विदेश नीति

लाल बहादुर शास्त्री की विदेश नीति भी विशेष थी। उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता के बाद एक संतुलित और समृद्ध विदेशी नीति का निर्माण किया। उन्होंने अन्य देशों के साथ मित्रता और सहयोग को बढ़ावा दिया। उनकी नीति ने भारत को एक मजबूत स्थिति में खड़ा किया, जिससे बड़े देशों के बीच भारत की पहचान बनी। शास्त्री जी के नेतृत्व में भारत ने कई महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी आवाज़ उठाई।

शास्त्री जी और उनके आश्चर्यजनक कार्य

जब देश ने किया एक दिन का उपवास

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत के वो प्रधानमंत्री भी रहे। उनकी सादगी और ईमानदारी का हर कोई कायल है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 1965 में जब भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध हुआ। तो उस समय देश में अनाज की बारी किल्लत हो गई थी। उस दौरान उन्होंने देशवासियों से अपील की थी कि सप्ताह में केवल एक दिन सभी लोग उपवास रखें। कहते हैं ना कि किसी नियम को अगर दूसरों पर लागू करना हो तो उसका प्रयोग पहले खुद पर करना होता है। शास्त्री जी ने भी ऐसा ही किया। उन्होंने इस उपवास की शुरुआत अपने परिवार से ही की। सबसे पहले अपने पूरे परिवार को उन्होंने दिनभर भूखा रखा, इसके बाद पूरे देश से अपील की। इसका असर ये हुआ कि पूरे भारत में एक दिन का उपवास लोग रखने लगे।

1965 की जंग

जवाहर लाल नेहरू के निधन के बाद 9 जून 1964 को लाल बहादुर शास्त्री प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठे। बता दें कि शास्त्री लगभग 18 महीने ही देश के प्रधानमंत्री रहे। शास्त्री जी के ही कार्यकाल के दौरान भारत ने 1965 की जंग जीती थी। उस समय पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान थे। नेहरू के इंतकाल के बाद पाकिस्तान ने 1964 में शास्त्री जी के साथ एक बैठक की। बैठक के बाद शास्त्री से अयूब खान की मुलाकात भी हुई थी। इस मुलाकात में अयूब खान ने शास्त्री की सादगी देख सोचा कि हम कश्मीर को जबरन हासिल कर सकते हैं। वहीं अयूब खान गलती कर गए और कश्मीर हथियाने अगस्त 1965 में घुसपैठियों को भेज दिया। शास्त्री के सादगी से धोखा खाए अयूब को यह जंग भारी पड़ गया। जब पाकिस्तानी आर्मी ने चंबा सेक्टर पर हमला बोल दिया तो शास्त्री जी ने भी पंजाब में भारतीय सेना से मोर्चा खुलावा दिया। नतीजा ये हुआ कि भारतीय सेना लाहौर कूच कर गई और सैकड़ों एकड़ जमीन पर कब्जा कर लिया। अब अयूब खान को गलती का एहसास हुआ। फिर UN के पहल पर 22 सिंतबर को जंग रूका।

ताशकंद की कहानी

इसी के बाद ताशकंद की कहानी शुरू होती है। 1965 की इस जंग के बाद भारत और पाकिस्तान की कई दफा बातचीत को बाद एक दिन और जगह चुना गया ताशकंद। सोवियत संघ के तत्‍कालीन पीएम एलेक्‍सेई कोजिगिन ने समझौते की पेशकश की थी। इस समझौते के लिए ताशकंद में 10 जनवरी 1966 का दिन तय हुआ। इस समझौते के तहत 25 फरवरी 1966 तक दोनों देशों को अपनी-अपनी सेनाएं बार्डर से पीछे हटानी थीं। समझौते पर साइन करने के बाद 11 जनवरी की रात में रहस्यमय परिस्थितियों में लाल बहादुर शास्‍त्री का निधन हो गया।

मौत से जुड़े राज

इस समझौते के बाद शास्‍त्री दबाव में थे। जानकार बताते हैं कि पाकिस्‍तान को हाजी पीर और ठिथवाल वापस देने की वजह से देश में शास्त्री की आलोचना हो रही थी। तब सीनियर जर्नलिस्ट कुलदीप नैयर उनके मीडिया सलाहकार थे। नैयर ने ही शास्‍त्री के मौत की खबर उनके परिजनों को बताई थी। बीबीसी को दिए इंटरव्‍यू में उन्‍होंने कहा था कि हाजी पीर और ठिथवाल को पाकिस्‍तान को दिए जाने से शास्‍त्री की पत्‍नी खासी नाराज थीं। यहां तक उन्‍होंने शास्‍त्री से फोन पर बात करने से भी मना कर दिया था। नैयर बतातें हैं कि शास्‍त्री जी अपनी बेटी से देश का हाल पूछते हैं और वहां से भी उनको निराशा ही हाथ लगी। इस बात से शास्‍त्री जी को बहुत चोट पहुंची थी। अगले दिन जब शास्‍त्री के मौत की खबर मिली तो पूरे देश के साथ वह भी हैरान रह गई थीं। कई लोग जहां दावा करते हैं कि शास्‍त्री जी को जहर देकर मारा गया। तो, वहीं कुछ लोग कहते हैं उनकी मौत दिल का दौरा पड़ने से हुई।