Electoral Bond Controversy: जाने बेंगलुरु अदालत का ने क्यों दिया वित्त मंत्री सीतारमण पर FIR दर्ज करने का आदेश
बेंगलुरु की एक अदालत ने अब समाप्त हो चुकी चुनावी बॉन्ड योजना से जुड़े जबरन वसूली के आरोपों के संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया है। जनाधिकार संघर्ष संगठन के आदर्श अय्यर द्वारा दायर की गई शिकायत में सीतारमण और अन्य पर जबरन वसूली के लिए इस योजना का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया गया है। अदालत के निर्देश के बाद, सीतारमण और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। सरकार द्वारा 2018 में शुरू की गई चुनावी बॉन्ड योजना का उद्देश्य नकद योगदान की जगह बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक दान में पारदर्शिता लाना था।
हालांकि, फरवरी में, सुप्रीम कोर्ट ने इस योजना को “असंवैधानिक” घोषित कर दिया, इसे राजनीतिक फंडिंग के बारे में नागरिकों के सूचना के अधिकार का उल्लंघन बताया। जवाब में, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने निर्मला सीतारमण के इस्तीफे की मांग की, यह सवाल करते हुए कि क्या भाजपा कोई कार्रवाई करेगी। सिद्धारमैया ने तीन महीने के भीतर मामले पर रिपोर्ट की भी मांग की। केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस्तीफे की मांग की आलोचना करते हुए तर्क दिया कि चुनावी बांड का पैसा सीतारमण के निजी खाते में नहीं गया और उन्होंने अपनी स्थिति का बचाव किया।
कांग्रेस पार्टी ने भी रविवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर तीखा हमला किया और अब समाप्त हो चुकी चुनावी बांड योजना के संबंध में उनके खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस्तीफे की मांग की। विपक्षी दल ने सीतारमण पर “लोकतंत्र को कमजोर करने” का आरोप लगाया और एक विशेष जांच दल (एसआईटी) के माध्यम से विवादास्पद योजना की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की।
Hezbollah leader Hassan Nasrallah: हसन नसरल्लाह की मौत के बाद क्या बदलेगा लेबनान और हिज्बुल्लाह या पूरे विश्व पर आने वाला है कोई गहरा संकट
शुक्रवार को लेबनान की राजधानी बेरूत पर हवाई हमले के बाद इजरायल ने हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह की मौत का ऐलान करते हुए इसे बड़ी जीत बताया। नसरल्लाह और दूसरे कमांडरों की मौत हिजबुल्लाह के लिए निश्चित रूप से गंभीर झटका है। हिजबुल्लाह क्षेत्र में काफी ताकतवर रहा है। लेबनान पर पकड़ के चलते माना जा रहा है कि ये गुट लड़ाई जारी रखेगा। वहीं देश की खस्ताहाल होती अर्थव्यवस्था और लेबनानी लोगों में शोषण से पनपे गुस्से से ये भी लगता है कि इजरायल के खिलाफ ये गुट अब कमजोर पड़ जाएगा।
हसन नसरल्लाह, हिज्बुल्लाह के महासचिव, एक ऐसे नेता हैं जिन्होंने पिछले तीन दशकों में लेबनान और मध्य पूर्व की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया है। उनका नेतृत्व और संगठन की सैन्य शक्ति ने इजरायली सुरक्षा बलों (IDF) को कई बार चुनौती दी है। लेकिन नसरल्लाह का प्रभाव केवल सैन्य संघर्षों तक ही सीमित नहीं है; उनका राजनीतिक दृष्टिकोण और रणनीतियाँ लेबनान की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर भी गहरा असर डालती हैं। इस लेख में हम नसरल्लाह के नेतृत्व, हिज्बुल्लाह के भविष्य, और लेबनान के लोगों की सोच पर चर्चा करेंगे।
हसन नसरल्लाह: एक प्रभावशाली नेता
हसन नसरल्लाह का जन्म 31 अगस्त 1960 को लेबनान के एक शिया परिवार में हुआ। उनका राजनीतिक जीवन 1980 के दशक में शुरू हुआ जब उन्होंने हिज्बुल्लाह में शामिल होने का निर्णय लिया। नसरल्लाह ने संगठन की राजनीतिक और सैन्य रणनीतियों को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने 1992 में महासचिव के रूप में पदभार ग्रहण किया और तब से हिज्बुल्लाह को एक मजबूत राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित किया।
उनकी प्रसिद्धि का मुख्य कारण 2000 में इजरायल की लेबनान से वापसी और 2006 के युद्ध के दौरान उनकी सैन्य सफलताएँ थीं। नसरल्लाह की रणनीतियों ने उन्हें न केवल एक सैन्य नेता के रूप में बल्कि एक राजनीतिक आइकन के रूप में भी पहचान दिलाई।
फर्स्टपोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, लेबनान में 60 के दशक तक ईसाई बहुसंख्यक थे और देश काफी समृद्ध था। 1948 और फिर 1967 में हजारों फिलिस्तीनियों के आने के बाद जनसांख्यिकीय बदलाव हुआ और मुस्लिम बहुसंख्यक बन गए। वहीं लेबनान में अशांति की शुरुआत फतह और फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन (पीएलओ) के आने से हुई। जॉर्डन के राजा हुसैन बिन तलाल के बेदखल करने के बाद फतह और पीएलओ के लोग आए और लेबनान का भविष्य बदल गया।
साल 1975 के बाद लेबनान पूरी तरह से बदल गया जब ईसाई मिलिशिया और पीएलओ विद्रोहियों के बीच 15 साल तक गृहयुद्ध चला और देश एक गहरे रसातल में चला गया। इस युद्ध में 1,50,000 लोग मारे गए और करीब 10 लाख को देश छोड़ना पड़ा। इसने लेबनान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिससे वह आज तक कभी नहीं उबर पाया।
साल 1982 में लेबनान पर इजरायली आक्रमण और हिजबुल्लाह की स्थापना फिर देश के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ बना। हिजबुल्लाह के उभार ने ये तय कर दिया कि लेबनान स्थायी तौर पर संघर्ष और आर्थिक बर्बादी की जद में रहने वाला है। हिजबुल्लाह और इजरायल के संघर्ष ने लेबनान को लगातार पीछे धकेला है। 1983 से मौजूदा समय तक लगातार कोई ना कोई संघर्ष देश के लोग देखते रहे हैं। हालिया हमलों के बाद देश एक बड़े युद्ध और तबाही की कगार पर खड़ा दिख रहा है।
हिज्बुल्लाह का वर्तमान स्थिति
हिज्बुल्लाह, जो मुख्य रूप से शिया मुसलमानों का संगठन है, उसने लेबनान की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त किया है। संगठन की राजनीतिक शाखा लेबनान की संसद में महत्वपूर्ण सीटें रखती है और विभिन्न सरकारों में भागीदारी करती है। हालाँकि, हिज्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियाँ और इजरायल के खिलाफ उसकी रुख ने इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवादास्पद बना दिया है।
इजरायल के साथ संघर्ष
नसरल्लाह के नेतृत्व में हिज्बुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ कई सैन्य ऑपरेशन किए हैं। 2006 का युद्ध इस संदर्भ में एक प्रमुख उदाहरण है, जब हिज्बुल्लाह ने इजरायली सैनिकों और नागरिकों के खिलाफ कई हमले किए। इस संघर्ष ने न केवल दोनों पक्षों के लिए भारी नुकसान उठाया, बल्कि लेबनान की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचे को भी बर्बाद कर दिया।
हिज्बुल्लाह का भविष्य
नसरल्लाह के नेतृत्व के बाद हिज्बुल्लाह का भविष्य कई कारकों पर निर्भर करेगा:
1. नेतृत्व परिवर्तन: नसरल्लाह की मौत के बाद किसे नेतृत्व सौंपा जाएगा, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। यदि संगठन एक मजबूत और सक्षम नेता को नहीं चुन पाता, तो यह अंदरूनी कलह का सामना कर सकता है।
2. आर्थिक स्थिति: लेबनान की अर्थव्यवस्था वर्तमान में गंभीर संकट में है। यदि हिज्बुल्लाह इस संकट के दौरान अपनी राजनीतिक स्थिति को बनाए रखने में असफल रहता है, तो यह उसके समर्थकों के बीच असंतोष का कारण बन सकता है।
3. इजरायल के साथ संबंध: अगर इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच सैन्य संघर्ष फिर से भड़कता है, तो इसका असर न केवल दोनों पक्षों पर, बल्कि पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा। हिज्बुल्लाह को इजरायल की ताकत का सामना करने के लिए अपनी सैन्य क्षमताओं को और मजबूत करना होगा।
4. अंतरराष्ट्रीय समर्थन: हिज्बुल्लाह का अस्तित्व ईरान और सीरिया जैसे देशों के समर्थन पर निर्भर करता है। यदि यह समर्थन कम होता है, तो संगठन की सैन्य और राजनीतिक ताकत कमजोर हो सकती है।
लेबनान के लोगों की सोच
लेबनान में लोगों की सोच हिज्बुल्लाह के प्रति विभाजित है। कुछ लोग संगठन को लेबनान की सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं, जबकि अन्य इसे देश के लिए खतरा मानते हैं।
समर्थक दृष्टिकोण
1. सुरक्षा: कई लेबनानी नागरिकों का मानना है कि हिज्बुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ सुरक्षा की गारंटी दी है। 2006 के युद्ध के बाद, हिज्बुल्लाह की सैन्य ताकत ने कई लोगों को सुरक्षा का एहसास दिलाया।
2. राजनीतिक शक्ति: हिज्बुल्लाह ने शिया समुदाय को राजनीतिक ताकत प्रदान की है। इसके समर्थकों का मानना है कि संगठन ने शिया मुद्दों को उठाने और उनकी आवाज़ को मुख्यधारा में लाने का काम किया है।
विरोधी दृष्टिकोण
1. आर्थिक संकट: लेबनान की गंभीर आर्थिक स्थिति के लिए हिज्बुल्लाह को दोषी ठहराया जा रहा है। आलोचकों का मानना है कि संगठन की सैन्य गतिविधियाँ और राजनीतिक निर्णयों ने देश को आर्थिक बर्बादी की ओर धकेल दिया है।
2. राजनीतिक अस्थिरता: कई लोग हिज्बुल्लाह को लेबनान में राजनीतिक अस्थिरता का मुख्य कारण मानते हैं। उनका कहना है कि संगठन की नीतियाँ और इजरायल के साथ संघर्ष ने देश को लगातार संघर्षों में झोंका है।
विवाद और आरोप
नसरल्लाह और हिज्बुल्लाह और विवाद और आरोपों का सामना करना पड़ा है:
1. आतंकवाद का समर्थन: हिज्बुल्लाह को अमेरिका और कई अन्य देशों द्वारा आतंकवादी संगठन माना जाता है। नसरल्लाह पर आरोप है कि वे ईरान के समर्थन से आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देते हैं।
2. मानवाधिकारों का उल्लंघन: नसरल्लाह के नेतृत्व में हिज्बुल्लाह के खिलाफ मानवाधिकार उल्लंघनों के आरोप लगाए गए हैं। आलोचकों का कहना है कि संगठन ने नागरिकों के खिलाफ हिंसा और राजनीतिक प्रतिशोध को बढ़ावा दिया है।
3. सीरिया युद्ध में हस्तक्षेप: नसरल्लाह ने सीरिया के गृह युद्ध में बशर अल-असद के समर्थन में हिज्बुल्लाह के लड़ाकों को भेजा। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें आलोचना का सामना कराया।
निष्कर्ष
हसन नसरल्लाह की मौत के बाद हिज्बुल्लाह का भविष्य लेबनान के लिए कई संभावनाएँ और चुनौतियाँ लेकर आएगा। नसरल्लाह का प्रभाव और संगठन की सैन्य ताकत उनके नेतृत्व में महत्वपूर्ण रहे हैं, लेकिन भविष्य में नेतृत्व परिवर्तन, आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय समर्थन जैसे कारक भी महत्वपूर्ण होंगे। लेबनान के लोगों की सोच भी हिज्बुल्लाह की दिशा को प्रभावित करेगी, जो एक विभाजित और जटिल स्थिति में है।
हिज्बुल्लाह का भविष्य केवल संगठन की राजनीतिक और सैन्य ताकत पर नहीं, बल्कि लेबनान की सामाजिक और आर्थिक स्थिरता पर भी निर्भर करेगा। अगर संगठन अपने भीतर के संकटों का सामना नहीं कर पाता, तो यह लेबनान के लिए और भी बड़ी समस्याएँ पैदा कर सकता है। इस प्रकार, नसरल्लाह और हिज्बुल्लाह का अस्तित्व और प्रभाव, न केवल लेबनान बल्कि पूरे मध्य पूर्व की स्थिरता पर गहरा असर डालेगा।
Tirupati Laddu Ghee Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने तिरुपति लड्डू घी विवाद पर चंद्रबाबू नायडू सरकार को लगाई फटकार, कहा 'तिरुपति मुद्दे में देवताओं को न लाएं'
आंध्र प्रदेश के तिरुपति मंदिर में ‘प्रसादम’ तैयार करने में मिलावटी घी के इस्तेमाल को लेकर चल रहे विवाद में आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने दखल दिया है। हालांकि, इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाते हुए, सर्वोच्च न्यायालय, जो इस विवाद पर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है, आंध्र प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि न्यायालय ‘इस मुद्दे से देवताओं को दूर रखने की अपेक्षा करता है।’
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता तर्क दे रहे थे कि “यह आस्था का मामला है। अगर दूषित घी का इस्तेमाल किया गया है, तो यह अस्वीकार्य है।” इसके जवाब में, न्यायालय ने तुषार मेहता से पूछा कि: “यह दिखाने के लिए क्या सबूत है कि लड्डू तैयार करने में दूषित घी का इस्तेमाल किया गया था।”
यह विवाद तब शुरू हुआ जब इस महीने की शुरुआत में, आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने विस्फोटक आरोप लगाया कि जगन मोहन रेड्डी सरकार के तहत, अत्यधिक प्रतिष्ठित ‘प्रसादम’ तैयार करने के लिए पशु वसा युक्त घी का इस्तेमाल किया गया था। इस आरोप ने विवाद को जन्म दिया ।
न्यायमूर्ति बीआर गवई और केवी विश्वनाथन की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने आगे कहा कि प्रयोगशाला रिपोर्ट, जो इस निष्कर्ष का आधार बनी कि लड्डू बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए घी में पशु वसा मौजूद थी, प्रथम दृष्टया सुझाव देती है कि परीक्षण किए गए नमूने आपूर्ति किए गए घी के थे, न कि प्रसादम तैयार करने में इस्तेमाल किए गए घी के।
अदालत ने केंद्र से जवाब मांगा है कि क्या राज्य सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को आरोपों की जांच जारी रखनी चाहिए। मामले की अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को निर्धारित की गई है, जिसमें अदालत ने राज्य को तब तक किसी भी तरह की भागीदारी से बचने का निर्देश दिया है।
Fake notes with Anupam Kher Face: अनुपम खेर के चेहरे वाले नकली नोटों से सर्राफा व्यापारी से 1.3 करोड़ रुपये की ठगी, पढ़ें पूरी खबर
बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने रविवार को अहमदाबाद के एक सर्राफा व्यापारी के साथ उनकी तस्वीर वाले 500 रुपये के नकली नोटों की ठगी किए जाने पर हैरानी जताई। उन्होंने नकली नोटों की बरामदगी को दिखाने वाली एक समाचार रिपोर्ट भी साझा की। खेर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा: “500 रुपये के नोट पर महात्मा गांधी की जगह मेरी तस्वीर??? कुछ भी हो सकता है।”
मेहुल ठक्कर नाम के सर्राफा व्यापारी ने 500 रुपये के नकली नोटों की ठगी के बाद 24 सितंबर को गुजरात के अहमदाबाद के नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। नवरंगपुरा में एक नकली अंगड़िया फर्म बनाई गई थी।
एक रिपोर्ट के अनुसार ठक्कर ने अपनी शिकायत में कहा कि आरोपियों ने उन्हें 1.30 करोड़ रुपये के नकली नोट देकर 2 किलो से अधिक सोना ठगा। पुलिस की शिकायत के अनुसार, ठक्कर को 23 सितंबर को लक्ष्मी ज्वेलर्स के मैनेजर से एक कॉल आया, जो उन्हें जानता था।
मैनेजर ने ठक्कर से पूछा कि क्या वह 2 किलो 100 ग्राम सोना खरीदना चाहता है और अगर हाँ, तो किस कीमत पर। चूँकि मेहुल पिछले 15 सालों से लक्ष्मी ज्वेलर्स के साथ कारोबार कर रहा था, इसलिए उसने बिना किसी हिचकिचाहट के 1.60 करोड़ रुपये में सौदा तय कर लिया। दोनों ने सौदा तय किया और अगले दिन सोना ठक्कर को भेज दिया गया।
24 सितंबर को लक्ष्मी ज्वेलर्स के मैनेजर ने ठक्कर को फोन करके बताया कि किसी और को तुरंत सोने की ज़रूरत है और RTGS काम नहीं कर रहा है। मैनेजर ने यह भी कहा कि वह सोने के बदले सिक्योरिटी राशि देगा और अगले दिन RTGS के ज़रिए पैसे भेजेगा। उसने आगे बताया कि सोना खरीदने वाले लोग सीजी रोड पर अंगड़िया फर्म में होंगे और वहीं पर लेन-देन करेंगे।
इसके बाद मेहुल ने अपने स्टाफ़ के एक कर्मचारी को 2 किलो 100 ग्राम सोना लेकर भेजा। वहाँ तीन लोग मौजूद थे, जिनमें से एक के पास कैश नोट गिनने की मशीन थी। दूसरा व्यक्ति पगड़ी पहने सिख व्यक्ति की तरह कपड़े पहने हुए था, जबकि तीसरा व्यक्ति फर्म के बाहर बैठा था।
सोना प्राप्त करने वाले दो व्यक्तियों ने 1.30 करोड़ के नोट जमानत राशि के रूप में रख लिए और कहा कि यदि आप सोना सौंप देते हैं, तो शेष 30 लाख दूसरे कार्यालय से लाएंगे।
सोना सौंपने के बाद, उन्होंने पाया कि नोट नकली थे, उन पर गांधीजी की जगह फिल्म अभिनेता अनुपम खेर की तस्वीर और एसबीआई, या भारतीय स्टेट बैंक की मुहर छपी थी। मेहुल और लक्ष्मी ज्वेलर्स के मैनेजर ने उस स्थान पर जाकर आस-पास की दुकानों में पूछताछ की, तो पता चला कि यह एक आंगड़िया पीढी थी, जिसे केवल 2 दिन पहले ही शुरू किया गया था।
जब लक्ष्मी ज्वेलर्स को फोन करने वाले व्यक्ति को बुलाया गया, तो उसका फोन बंद था, जिससे मेहुल ठक्कर ने नवरंगपुरा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई।
नोट गिनने वाली मशीन के साथ खड़ा व्यक्ति भी इसे देने के लिए आया था और दोनों ठगों के बारे में नहीं जानता था। परिणामस्वरूप, पुलिस ने आस-पास के सीसीटीवी कैमरों की जांच शुरू की और उन्हें ढूंढने के लिए एक टीम गठित की।
CM Atishi Action: दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी का बड़ा वादा, 'गड्ढा मुक्त' दिवाली का दिया आश्वासन, सड़कों का किया निरीक्षण
दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी ने सोमवार को राष्ट्रीय राजधानी में सड़कों की स्थिति का निरीक्षण करने के बाद लोगों को “गड्ढा मुक्त दिवाली” मनाने का आश्वासन दिया।
दिल्ली की मुख्यमंत्री ने एनएसआईसी ओखला, मोदी मिल फ्लाईओवर, चिराग दिल्ली, तुगलकाबाद एक्सटेंशन, मथुरा रोड और आश्रम चौक की सड़कों का निरीक्षण किया और दिवाली से पहले सभी क्षतिग्रस्त लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) सड़कों की मरम्मत के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
निरीक्षण के बाद मीडिया से बात करते हुए आतिशी ने कहा, “दो दिनों तक अरविंद केजरीवाल और मैंने दिल्ली की सड़कों का निरीक्षण किया और पाया कि सड़कों की हालत बहुत खराब है… अरविंद केजरीवाल ने पार्टी के सभी विधायकों और मंत्रियों से दिल्ली की सड़कों को जल्द से जल्द बहाल करने की दिशा में काम करने का आह्वान किया है…”
उन्होंने आगे कहा कि “मैंने दक्षिण और दक्षिण-पूर्वी दिल्ली की सड़कों की जिम्मेदारी संभाली है। पूर्वी दिल्ली की सड़कों का निरीक्षण सौरभ भारद्वाज करेंगे, उत्तर-पूर्वी दिल्ली की सड़कों का निरीक्षण गोपाल राय करेंगे, मध्य और नई दिल्ली जिलों की सड़कों का निरीक्षण इमरान हुसैन करेंगे, दक्षिण-पश्चिम और बाहरी दिल्ली की जिम्मेदारी कैलाश गहलोत और उत्तर-पश्चिम दिल्ली की जिम्मेदारी मुकेश सहरावत संभालेंगे… हम दिवाली तक दिल्ली के लोगों को गड्ढों से मुक्त सड़कें देने की कोशिश करेंगे…।”
दिल्ली सरकार की सड़क मूल्यांकन और मरम्मत योजना के अनुसार, पीडब्ल्यूडी की 1,400 किलोमीटर लंबी सड़कों के एक सप्ताह के निरीक्षण के बाद यह तय किया जाएगा कि किन सड़कों की “पूर्ण मरम्मत”, “आंशिक मरम्मत” और किन सड़कों का पुनर्निर्माण करने की जरूरत है। निरीक्षण के एक सप्ताह बाद मरम्मत कार्य शुरू हो जाएगा। पिछले सप्ताह की शुरुआत में विधानसभा सत्र के दौरान अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री को एक पत्र सौंपा था, जिसमें उनसे शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत करने का अनुरोध किया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली वितरण कंपनियों और दिल्ली जल बोर्ड द्वारा किए गए काम के कारण शहर में सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, जिसके बाद मरम्मत कार्य नहीं किया गया है।
Unemployment in Kerala: सबसे अधिक बेरोजगारी वाला राज्य बना केरल, हरियाणा ने सुधारी अपनी स्थिति, 8.8% से घटकर 4.1% हुआ बेरोजगारी दर
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (पीएलएफएस) 2023-24 के अनुसार, केरल ने भारत में सबसे अधिक युवा बेरोजगारी दर 29.9% दर्ज की है। डेटा राज्य में महिलाओं के बीच विशेष रूप से चिंताजनक दर को उजागर करता है, जो 47.1% है।
यह हरियाणा के बिल्कुल विपरीत है, जिसने अपने बेरोजगारी के आंकड़ों में उल्लेखनीय सुधार देखा है। पिछले एक साल में, हरियाणा की बेरोजगारी दर 8.8% से घटकर 4.1% हो गई है, जो इसे राष्ट्रीय औसत से नीचे रखती है।
हरियाणा में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार बेरोजगारी को कम करने के उद्देश्य से नीतियों को लागू करने में सक्रिय रही है। पहलों में राज्य के विनिर्माण क्षेत्र और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को बढ़ावा देना शामिल है, जिसने रोजगार सृजन और आर्थिक स्थिरता में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
सरकार का लक्षित दृष्टिकोण रोजगार सृजन में एक सफल उदाहरण स्थापित करता हुआ प्रतीत होता है, जो नीति निर्माताओं और इसी तरह के मुद्दों से जूझ रहे अन्य राज्यों का ध्यान आकर्षित करता है।
आगामी विधानसभा चुनावों में बेरोजगारी सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक रही है और यह डेटा भाजपा के लिए कुछ हद तक राहत प्रदान करने वाला है, जो इस आंकड़े को कम करने के लिए काम करने का दावा कर रही है, यहां तक कि जम्मू कश्मीर में भी, जबकि राहुल गांधी ने कांग्रेस को इसके खिलाफ बहस करने का नेतृत्व किया है।
Rapiest Ram Rahim News: बलात्कारी राम रहीम को फिर चाहिए 20 दिन की पैरोल, चुनाव आयोग ने मांगे ठोस कारण
सिरसा स्थित अपने आश्रम में अपनी दो शिष्याओं से बलात्कार के आरोप में 20 साल की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख और बलात्कारी गुरमीत राम रहीम सिंह ने 5 अक्टूबर को होने वाले हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले 20 दिन की अस्थायी पैरोल मांगी है।
सूत्रों के अनुसार, हरियाणा सरकार ने उनके पैरोल अनुरोध को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के पास विचार के लिए भेज दिया है। हालांकि, अधिकारी ने रिहाई के लिए जरूरी और सम्मोहक कारण पूछे हैं। 56 वर्षीय स्वयंभू संत 13 अगस्त को 21 दिन की छुट्टी पर रिहा होने के बाद 2 सितंबर को रोहतक की सुनारिया जेल लौट आए।
पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश में खासे लोकप्रिय राम रहीम को अपनी बीमार मां से मिलने सहित विभिन्न कारणों से आठ मौकों पर छुट्टी दी गई। राज्य के नियमों के अनुसार, फरलो, सजा का एक निर्धारित हिस्सा पूरा करने के बाद कैदी की अल्पकालिक रिहाई है। हाल ही में, डेरा प्रमुख को बार-बार पैरोल और फरलो दिए जाने के मुद्दे को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी।
अदालत ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इस पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा बिना किसी “मनमानी या पक्षपात” के विचार किया जाना चाहिए। रहीम को 2017 में अपने दो शिष्यों के साथ बलात्कार करने के लिए सजा सुनाई गई थी और वर्तमान में वह हरियाणा के रोहतक जिले की सुनारिया जेल में बंद है। हरियाणा में 5 अक्टूबर को चुनाव होने हैं, जबकि हरियाणा और जम्मू-कश्मीर दोनों के नतीजे 8 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।
Air India की दिल्ली-न्यूयॉर्क फ्लाइट के खाने में मिला कॉकरोच, पत्रकार ने सोशल मीडिया पर शेयर करी तस्वीर
सुयशा सावंत नामक एक पत्रकार को हाल ही में नई दिल्ली से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट में एक बहुत ही अप्रिय अनुभव हुआ। उसने और उसके दो वर्षीय बच्चे ने खाना लगभग खत्म कर लिया था, लेकिन उसके ऑमलेट में एक कॉकरोच मिला।
सुयशा इस बात से बहुत दुखी हुई और उसने अपना अनुभव सोशल मीडिया पर शेयर किया। उसने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और नागरिक उड्डयन मंत्री के राम मोहन नायडू को टैग करके इस घटना की सूचना दी।
सावंत ने लिखा, “दिल्ली से न्यूयॉर्क जाने वाली एयर इंडिया की फ्लाइट में मुझे परोसे गए ऑमलेट में एक कॉकरोच मिला। जब हमने यह पाया, तो मेरे 2 वर्षीय बच्चे ने आधे से ज़्यादा ऑमलेट खा लिया। इसके परिणामस्वरूप उसे फ़ूड पॉइज़निंग हो गई।” इस पर एयरलाइन ने प्रतिक्रिया दी। “प्रिय सुश्री सावंत, हमें आपके अनुभव के बारे में सुनकर बहुत खेद है। कृपया अपनी बुकिंग की जानकारी DM के ज़रिए शेयर करें, ताकि हम तुरंत जांच कर सकें,” एयर इंडिया ने लिखा और एक अलग पोस्ट में कहा कि मामले की जांच की जाएगी।
एक अन्य घटना में, सर्वप्रिया सांगवान नामक एक पत्रकार को एयर इंडिया की फ्लाइट में एक बुरा अनुभव हुआ। उन्हें फ्लाइट AI 215 में परोसे गए खाने में एक पत्थर मिला। वे इस बात से बहुत दुखी हुईं और उन्होंने ट्विटर पर पत्थर की तस्वीरें शेयर कीं।
सर्वप्रिया ने एयरलाइन की लापरवाही की शिकायत की और क्रू मेंबर सुश्री जादोन को टैग करके घटना की रिपोर्ट की। उनका मानना है कि एयर इंडिया को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके द्वारा परोसा जाने वाला खाना किसी भी बाहरी वस्तु से मुक्त हो। पत्रकार और BBC की YouTube हेड सर्वप्रिया सांगवान ने ट्वीट किया, “एयर इंडिया को पत्थर रहित भोजन सुनिश्चित करने के लिए संसाधनों और धन की आवश्यकता नहीं है। आज फ्लाइट AI 215 में मुझे जो खाना परोसा गया, उसमें यही मिला। क्रू मेंबर सुश्री जादोन को इसकी जानकारी दे दी गई है। इस तरह की लापरवाही अस्वीकार्य है।”
UNGA Summit: UN में एस जयशंकर की दहाड़, यूक्रेन गाजा संघर्ष पर संयुक्त राष्ट्र को चेताया, पाकिस्तान को लगाई कड़ी फटकार
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को चेतावनी दी कि दुनिया बड़े पैमाने पर हिंसा जारी रहने को लेकर भाग्यवादी नहीं हो सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय यूक्रेन में युद्ध और गाजा में संघर्ष का तत्काल समाधान चाहता है।
संयुक्त राष्ट्र ने हमेशा कहा है कि शांति और विकास साथ-साथ चलते हैं, फिर भी जब एक के लिए चुनौतियां सामने आई हैं, तो दूसरे पर उचित ध्यान नहीं दिया गया है, जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र की आम बहस को संबोधित करते हुए कहा कि कमजोर और असुरक्षित लोगों के लिए आर्थिक निहितार्थों को उजागर करने की जरूरत है।
“लेकिन हमें यह भी मानना होगा कि संघर्षों का समाधान खुद ही होना चाहिए। दुनिया बड़े पैमाने पर हिंसा जारी रहने को लेकर भाग्यवादी नहीं हो सकती, न ही इसके व्यापक परिणामों के प्रति अभेद्य हो सकती है। चाहे वह यूक्रेन में युद्ध हो या गाजा में संघर्ष, अंतरराष्ट्रीय समुदाय तत्काल समाधान चाहता है। इन भावनाओं को स्वीकार किया जाना चाहिए और उन पर कार्रवाई की जानी चाहिए। ”
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र विश्व व्यवस्था के सहमत सिद्धांतों और साझा उद्देश्यों का प्रमाण है, और इस संबंध में अंतरराष्ट्रीय कानून और प्रतिबद्धताओं का सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है।
जयशंकर ने आगे कहा कि, “अगर हमें वैश्विक सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करनी है, तो यह आवश्यक है कि जो लोग नेतृत्व करना चाहते हैं, वे सही उदाहरण पेश करें। न ही हम अपने मूल सिद्धांतों के गंभीर उल्लंघन को बर्दाश्त कर सकते हैं।”
पाकिस्तान को लगाई फटकार
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पाकिस्तान का सीमा पार आतंकवाद कभी सफल नहीं होगा और उसके कार्यों के “निश्चित रूप से परिणाम होंगे”, उन्होंने जोर देकर कहा कि यह ‘कर्म’ है कि देश की बुराइयाँ अब उसके अपने समाज को खा रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र की आम बहस को संबोधित करते हुए जयशंकर ने यह भी कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच हल किया जाने वाला मुद्दा अब केवल पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना और आतंकवाद के प्रति अपने लंबे समय से चले आ रहे लगाव को त्यागना है।
“बहुत से देश अपने नियंत्रण से परे परिस्थितियों के कारण पीछे छूट जाते हैं, लेकिन कुछ देश जानबूझकर ऐसे फैसले लेते हैं, जिनके परिणाम विनाशकारी होते हैं। इसका एक बेहतरीन उदाहरण हमारा पड़ोसी देश पाकिस्तान है,” उन्होंने कहा। “आज हम देख रहे हैं कि उसने (पाकिस्तान ने) दूसरों पर जो बुराइयां थोपने की कोशिश की, वे उसके अपने समाज को निगल रही हैं। वह दुनिया को दोष नहीं दे सकता। यह केवल कर्म है।”
जयशंकर ने कहा कि पाकिस्तान की सीमा पार आतंकवाद नीति कभी सफल नहीं होगी और उसे किसी भी तरह की सजा की उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
“इसके विपरीत, कार्रवाई के निश्चित रूप से परिणाम होंगे। हमारे बीच हल किया जाने वाला मुद्दा अब केवल पाकिस्तान द्वारा अवैध रूप से कब्जाए गए भारतीय क्षेत्र को खाली करना है और निश्चित रूप से, आतंकवाद के प्रति पाकिस्तान के लंबे समय से चले आ रहे लगाव को त्यागना है,” उन्होंने कहा।
What is Chinese Garlic Controversy: क्या है चीनी लहसुन? चीनी लहसुन विवाद पर क्यों इलाहाबाद हाई कोर्ट ने FSDA को लगाई फटकार
चीनी लहसुन, जिसे चीन में उत्पादित किया जाता है, भारतीय बाजार में अपनी कम कीमत और बड़े आकार के कारण लोकप्रिय है। हालांकि, इसे स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं के कारण प्रतिबंधित किया गया है, जैसे कीटनाशकों और अन्य हानिकारक रसायनों की उच्च मात्रा। हाल ही में, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए खाद्य सुरक्षा और उपभोक्ता स्वास्थ्य की रक्षा के लिए FSDA (Food Safety and Drug Administration) को तलब किया। अदालत ने पूछा है कि ऐसे प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री पर रोक लगाने के लिए FSDA ने क्या कदम उठाए हैं। यह मामला केवल उपभोक्ता सुरक्षा का नहीं है, बल्कि स्थानीय किसानों की आजीविका और भारतीय कृषि की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। चीनी लहसुन की बिक्री से जुड़े विवाद ने भारतीय खाद्य बाजार में एक नई बहस को जन्म दिया है।
चीनी लहसुन क्या है?
चीनी लहसुन, जिसे सामान्यत: चीन में उत्पादित लहसुन के रूप में जाना जाता है, अपने कम कीमत और बड़े आकार के कारण भारतीय बाजार में काफी लोकप्रिय है। इसकी खेती मुख्य रूप से चीन के कुछ क्षेत्रों में होती है, जहां के जलवायु और मिट्टी की स्थिति इसे उत्पादन के लिए अनुकूल बनाती है। चीनी लहसुन आमतौर पर भारतीय लहसुन की तुलना में सस्ता होता है, जिससे उपभोक्ता आकर्षित होते हैं। हालांकि, इसके सेवन के पीछे कई स्वास्थ्य संबंधी चिंताएँ भी छिपी हुई हैं।
स्वास्थ्य जोखिम
चीनी लहसुन के सेवन से जुड़ी मुख्य चिंताओं में कीटनाशकों और अन्य हानिकारक रसायनों का उपयोग शामिल है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी लहसुन में अधिक मात्रा में कीटनाशक अवशेष पाए गए हैं, जो मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, चीनी लहसुन में प्राकृतिक पोषक तत्वों की कमी भी हो सकती है, जो स्थानीय उत्पादों में अधिक होती है।
चीनी लहसुन से होने वाले रोग
चीनी लहसुन, जो आमतौर पर कीटनाशकों और हानिकारक रसायनों के उच्च स्तर के साथ आता है, कई स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। यहाँ कुछ प्रमुख रोगों का उल्लेख किया गया है जो इसके सेवन से हो सकते हैं:
फूड पॉइज़निंग: चीनी लहसुन में पाई जाने वाली हानिकारक रसायन और कीटनाशक खाद्य विषाक्तता का कारण बन सकते हैं। इसके सेवन से मतली, उल्टी, दस्त और पेट में दर्द जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।
एलर्जी प्रतिक्रियाएँ: कुछ लोगों को चीनी लहसुन से एलर्जी हो सकती है, जो त्वचा पर दाने, खुजली या श्वसन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। यदि किसी को लहसुन से पहले से ही एलर्जी है, तो चीनी लहसुन का सेवन गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकता है।
गैस्ट्रिक समस्याएँ: चीनी लहसुन का अधिक सेवन पेट में गैस, सूजन और अन्य पाचन संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकता है। इसकी तीखी विशेषताएँ कुछ लोगों के लिए पेट के लिए असहज हो सकती हैं।
किडनी और जिगर पर प्रभाव: कीटनाशकों और हानिकारक रसायनों के लंबे समय तक सेवन से किडनी और जिगर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ये अंग शरीर से विषैले पदार्थों को निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
हार्मोनल असंतुलन: कुछ अध्ययनों से पता चला है कि चीनी लहसुन में पाए जाने वाले रसायन शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याएँ हो सकती हैं, जैसे कि प्रजनन संबंधी समस्याएँ।
इलाहाबाद हाई कोर्ट की चिंताएँ
हाल ही में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चीनी लहसुन के मामले को गंभीरता से लिया है। इस मामले में अदालत ने FSDA (Food Safety and Drug Administration) को तलब किया है और कई सवाल उठाए हैं।
प्रमुख कारण
स्वास्थ्य सुरक्षा: अदालत का मानना है कि चीनी लहसुन की बिक्री से उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है। ऐसे उत्पादों में कीटनाशक और अन्य हानिकारक रसायनों के कारण खाद्य सुरक्षा का उल्लंघन हो रहा है।
नियमों का उल्लंघन: चीनी लहसुन का अवैध रूप से बिक्री होना खाद्य सुरक्षा कानून का उल्लंघन है। अदालत ने FSDA से पूछा है कि वह इस पर क्या कार्रवाई कर रही है।
किसानों का नुकसान: चीनी लहसुन की अधिक बिक्री से भारतीय किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। स्थानीय किसान, जो उच्च गुणवत्ता वाले लहसुन का उत्पादन करते हैं, सस्ते चीनी लहसुन के कारण अपने उत्पाद को बाजार में नहीं बेच पा रहे हैं।
कोर्ट का आदेश
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने FSDA को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है कि इस तरह के प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी रोक लगाई जाए। यदि FSDA अपनी जिम्मेदारियों को निभाने में असफल होती है, तो अदालत और सख्त कदम उठा सकती है।
चीनी लहसुन का विवाद
चीनी लहसुन को लेकर विवाद केवल स्वास्थ्य चिंताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय कृषि, खाद्य सुरक्षा, और उपभोक्ता अधिकारों के लिए भी गंभीर खतरा है।
आर्थिक प्रभाव
किसानों की आजीविका: स्थानीय किसान जो उच्च गुणवत्ता वाला लहसुन उगाते हैं, को इस सस्ते विकल्प के कारण अपनी फसलें बेचना मुश्किल हो रहा है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है और वे कर्ज में डूब सकते हैं।
स्थानीय बाजार की स्थिति: चीनी लहसुन की अधिक बिक्री स्थानीय बाजारों को प्रभावित कर रही है। इससे भारतीय लहसुन की कीमतें घट रही हैं, जिससे किसान और भी अधिक परेशान हो रहे हैं।
सामाजिक प्रभाव
स्वास्थ्य पर प्रभाव: चीनी लहसुन का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है। यदि उपभोक्ता इसकी गुणवत्ता को नहीं समझते हैं, तो वे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर सकते हैं।
जानकारी का अभाव: कई उपभोक्ता चीनी लहसुन और भारतीय लहसुन में अंतर नहीं जानते हैं। यह जानकारी का अभाव उन्हें गलत निर्णय लेने के लिए मजबूर कर सकता है।
कार्रवाई की आवश्यकता
इलाहाबाद हाई कोर्ट का यह कदम निश्चित रूप से एक सकारात्मक संकेत है। अब FSDA को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।
सुझाव
कड़ी निगरानी: FSDA को बाजार में चीनी लहसुन की बिक्री पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है।
जन जागरूकता अभियान: उपभोक्ताओं को चीनी लहसुन और भारतीय लहसुन के बीच अंतर बताने के लिए जागरूकता अभियान चलाने की आवश्यकता है।
किसानों को समर्थन: सरकार को स्थानीय किसानों को समर्थन देने के लिए कार्यक्रम शुरू करने की आवश्यकता है, ताकि वे अपनी फसलें अच्छे दाम पर बेच सकें।
निष्कर्ष
चीनी लहसुन की समस्या केवल एक खाद्य सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह भारतीय किसानों और उपभोक्ताओं के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय का हस्तक्षेप एक सकारात्मक कदम है, लेकिन इसे लागू करने के लिए ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है। यह समय है कि सभी हितधारक मिलकर इस समस्या का समाधान निकालें, ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा और किसानों की आजीविका दोनों को सुनिश्चित किया जा सके।
इस विवाद के आगे बढ़ने से खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य और कृषि के लिए महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए भविष्य की नीतियाँ बनानी चाहिए।