VIP Protocol Controversy: स्वतंत्र देव सिंह के बेटे को VIP प्रोटोकॉल दिलाने पर निजी सचिव हटाया गया, जानें क्या था मामला

VIP Protocol Controversy: स्वतंत्र देव सिंह के बेटे को VIP प्रोटोकॉल दिलाने पर निजी सचिव हटाया गया, जानें क्या था मामला
VIP Protocol Controversy: स्वतंत्र देव सिंह के बेटे को VIP प्रोटोकॉल दिलाने पर निजी सचिव हटाया गया, जानें क्या था मामला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के बेटे अभिषेक सिंह को बिना किसी आधिकारिक पद के VIP प्रोटोकॉल दिलाने की कोशिश करना एक निजी सचिव को भारी पड़ गया। इस मामले में विवाद बढ़ने के बाद मंत्री के निजी सचिव आनंद शर्मा को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।

यह कार्रवाई तब की गई जब यह मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय और बीजेपी के केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचा। दोनों स्तरों से नाराजगी जताए जाने के बाद यह निर्णय लिया गया।

क्या था मामला

जलशक्ति मंत्री के निजी सचिव आनंद शर्मा ने जालौन के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर निर्देश दिया था कि मंत्री के पुत्र अभिषेक सिंह को जिले में दौरे के दौरान VIP प्रोटोकॉल दिया जाए। लेकिन चूंकि अभिषेक सिंह किसी आधिकारिक या निर्वाचित पद पर नहीं हैं, इसलिए उन्हें ऐसी कोई सुविधा देने का औचित्य नहीं बनता था।

पत्र सार्वजनिक होते ही मामला विवाद का कारण बना और विपक्ष तथा सोशल मीडिया पर सरकार की आलोचना शुरू हो गई।

क्या होता है प्रोटोकॉल?

प्रोटोकॉल एक तयशुदा प्रक्रिया है जिसके तहत विशिष्ट व्यक्तियों को उनकी संवैधानिक या प्रशासनिक स्थिति के आधार पर सम्मान, सुरक्षा और सुविधाएं प्रदान की जाती हैं। इसमें उनकी यात्रा, बैठने की व्यवस्था, स्वागत, सुरक्षा और संचार संबंधी नियम शामिल होते हैं।

कौन-कौन लोग होते हैं प्रोटोकॉल के हकदार?

भारत में प्रोटोकॉल की व्यवस्था राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यपाल, मुख्यमंत्री, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के न्यायाधीशों, विदेश से आने वाले राष्ट्राध्यक्षों व राजदूतों, और सुरक्षा श्रेणी (X, Y, Z) वाले लोगों के लिए होती है। इसके अलावा भारत रत्न और अन्य राष्ट्रीय पुरस्कार विजेताओं को भी विशेष अवसरों पर प्रोटोकॉल के तहत सम्मान दिया जाता है।

इस मामले का संदेश

बिना अधिकृत पद के किसी व्यक्ति को प्रोटोकॉल देना न केवल नैतिक रूप से अनुचित, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था का उल्लंघन भी है। इस प्रकरण में सरकार की त्वरित कार्रवाई यह दर्शाती है कि योगी सरकार प्रोटोकॉल और व्यवस्था को लेकर कठोर और स्पष्ट रुख अपनाए हुए है।

सूत्रों का कहना है कि आने वाले समय में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए अधिक सख्त दिशानिर्देश जारी किए जा सकते हैं, जिससे कोई भी अधिकारी या नेता अपनी स्थिति का दुरुपयोग न कर सके।