BJD के करारी हार के बाद वीके पांडियन ने राजनीति से लिया संन्यास, संन्यास पर क्यो बोले नवीन पटनायक

BJD के करारी हार के बाद वीके पांडियन ने राजनीति से लिया संन्यास, संन्यास पर क्यो बोले नवीन पटनायक
BJD के करारी हार के बाद वीके पांडियन ने राजनीति से लिया संन्यास, संन्यास पर क्यो बोले नवीन पटनायक

भुवनेश्वर: वीके पांडियन एक ऐसा नाम जो इस बार के चुनाव में सबसे अधिक चर्चा में रहा, लेकिन अब वह नाम राजनीति से सन्यास ले चुका है, लेकिन सन्यास के बाद भी राजनीति गलीयारों में खूब चर्चा का विषय बना हुआ है। नवीन पटनायक के करीबी पांडियन की बमुश्किल छह महीने पुरानी राजनीतिक यात्रा उस समय अचानक समाप्त हो गई जब आईएएस अधिकारी से बीजद नेता बने पार्टी की चुनावी हार के लिए आलोचनाओं के बाद रविवार को राजनीति से संन्यास की घोषणा कर दी। बीजेडी अध्यक्ष नवीन पटनायक के करीबी पांडियन ने पिछले साल 27 नवंबर को आईएएस से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेने के एक महीने बाद राजनीति में कदम रखा था।

लेकिन नवीन पटनायक से समर्थन मिलने के बावजूद उन्होंने राजनीति छोड़ने का फैसला किया, जिन्होंने आलोचनाओं को दुर्भाग्यपूर्ण बताया। चार मिनट के वीडियो में, जो 4 जून के नतीजों के बाद उनका पहला वीडियो है, पांडियन ने पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन के लिए बीजद नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों से माफी मांगी। पांडियन ने कहा, “मैंने जानबूझकर खुद को सक्रिय राजनीति से अलग करने का फैसला किया है। अगर मेरे खिलाफ अभियान की कहानी बीजेडी की हार का कारण बनी है तो मुझे खेद है। मैं बीजू परिवार और बीजेडी के सभी कार्यकर्ताओं से माफी मांगता हूं। राजनीति में आने का मेरा एकमात्र उद्देश्य नवीन पटनायक की सहायता करना था।” पांडियन ने अपने एक अभियान के दौरान घोषणा की थी कि अगर बीजेडी तीन-चौथाई बहुमत के साथ सत्ता में वापस नहीं आती है तो वह राजनीति छोड़ देंगे। पांडियन ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को भी चुनौती दी थी कि अगर वे हार गए तो वे भी ऐसा ही रुख अपनाएं। आपको बता दें कि 2000 बैच के पूर्व आईएएस अफसर वी के पांडियन वीआरएस लेकर राजनीति में आ गए थे। 2019 में जब बीजेडी ने राज्य में जीत हासिल की थी तो उसमें पांडियन की बड़ी भूमिका मानी गई थी। दरअसल नवीन पटनायक के रैली के भाषण का वीडियो वायरल हुआ था. भाषण देते वक़्त उनका बायां हाथ कांपते हुए दिखा. उनके साथ स्टेज पर पांडियन खड़े थे. उनकी नज़र कांपते हुए हाथ पर पड़ी, तो वो फ़ौरन आगे बढ़े और उन्होंने नवीन पटनायक के कांपता हाथ को पोडियम के नीचे छिपा दिया.

लगातार छठी बार सरकार बनाने की उम्मीद कर रही बीजेडी को राज्य में विधानसभा और लोकसभा दोनों ही चुनावों में बीजेपी ने करारा झटका दिया है। बीजेडी को 21 लोकसभा सीटों पर कोई सीट नहीं मिली, जबकि बीजेपी को 20 सीटें मिलीं। 147 सदस्यीय विधानसभा में बीजेपी ने 78 सीटें जीतकर राज्य में अपनी पहली सरकार बनाई, जबकि बीजेडी को 51 सीटें मिलीं।

नवीन से नजदीकी के कारण बीजेडी और सरकार में जबरदस्त प्रभाव रखने वाले पांडियन चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के मुख्य निशाने पर थे। भाजपा ने पांडियन के दबदबे को एक प्रमुख चुनावी मुद्दे के रूप में प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह समेत भाजपा के शीर्ष प्रचारकों ने ‘ओडिया अस्मिता’ (पहचान) का मुद्दा उठाया और कथित तौर पर ओडिशा को चलाने के लिए तमिलनाडु के मूल निवासी पांडियन की आलोचना की। पांडियन को नवीन का राजनीतिक उत्तराधिकारी भी माना जाता था, हालांकि बाद में उन्होंने इसे खारिज कर दिया।