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डिंपल यादव पर विवादित टिप्पणी को लेकर घिरे मौलाना साजिद, बोले– “मैंने कुछ गलत नहीं कहा”

डिंपल यादव पर विवादित टिप्पणी को लेकर घिरे मौलाना साजिद, बोले– "मैंने कुछ गलत नहीं कहा"
डिंपल यादव पर विवादित टिप्पणी को लेकर घिरे मौलाना साजिद, बोले– "मैंने कुछ गलत नहीं कहा"

नई दिल्ली: समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव पर विवादित टिप्पणी कर घिरे मौलाना साजिद रशीदी अब सफाई देने के बावजूद राजनीतिक निशाने पर आ गए हैं। मौलाना ने कहा है कि उन्होंने डिंपल यादव के खिलाफ कोई अमर्यादित या आपत्तिजनक बयान नहीं दिया है और उनके खिलाफ जो प्रदर्शन और एफआईआर की जा रही है, वह महज इसलिए हो रही है क्योंकि वह मुसलमान हैं।

साजिद रशीदी ने कहा, “मुझे जानकारी मिली है कि मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। लेकिन मैंने ऐसा क्या कह दिया? ऐसा क्या अपराध कर दिया कि मेरे खिलाफ संसद तक में प्रदर्शन हो रहा है? सांसद एकजुट होकर मेरे विरोध में खड़े हो गए हैं।”

मीडिया में वायरल बयान के अनुसार, मौलाना साजिद ने एक टीवी डिबेट के दौरान एक तस्वीर का हवाला देते हुए कहा था, “मैं एक फोटो दिखाना चाहता हूं। आप भी देखकर शरमा जाएंगे। मैं नाम नहीं लेता, सब जानते हैं। जो मोहतरमा उनके साथ थीं, दो औरतें थीं। एक महिला मुस्लिम लिबास में थीं, सिर पर दुपट्टा था—वह इकरा हसन थीं। जो मोहतरमा थीं डिंपल यादव जी, उनकी पीठ का फोटो देख लीजिए… बैठी हैं।”

मौलाना ने डिंपल यादव के सिर न ढंकने पर सवाल उठाए थे, जिससे विवाद और गहराया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी ने इस बयान को अमर्यादित बताते हुए संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। बीजेपी ने पहले भी सपा की एक मस्जिद में हुई बैठक पर सवाल उठाए थे, जिसमें अखिलेश यादव और अन्य सपा सांसद शामिल हुए थे। बीजेपी ने समाजवादी पार्टी को तंज कसते हुए “नमाजवादी पार्टी” तक कहा था।

हालांकि, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने इन आरोपों पर पलटवार करते हुए बीजेपी को सांप्रदायिक राजनीति करने वाला करार दिया और कहा कि उनकी पार्टी सभी धर्मों का सम्मान करती है। फिलहाल, मौलाना साजिद के बयान और उस पर उठे सियासी बवाल ने संसद से लेकर सड़कों तक एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

Bhavishya
एक विचारशील लेखक, जो समाज की नब्ज को समझता है और उसी के आधार पर शब्दों को पंख देता है। लिखता है वो, केवल किताबों तक ही नहीं, बल्कि इंसानों की कहानियों, उनकी संघर्षों और उनकी उम्मीदों को भी। पढ़ना उसका जुनून है, क्योंकि उसे सिर्फ शब्दों का संसार ही नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगियों का हर पहलू भी समझने की इच्छा है।