चुनाव आयोग के दावे पर सवाल, CEC ज्ञानेश कुमार की लगने वाली है क्लास, बेघर बोले: नहीं मिला वोटर कार्ड

चुनाव आयोग के दावे पर सवाल, CEC ज्ञानेश कुमार की लगने वाली है क्लास, बेघर बोले: नहीं मिला वोटर कार्ड
चुनाव आयोग के दावे पर सवाल, CEC ज्ञानेश कुमार की लगने वाली है क्लास, बेघर बोले: नहीं मिला वोटर कार्ड

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने रविवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि मतदाता सूची में दर्ज हजारों मतदाताओं के पते पर ‘हाउस नंबर 0′ या ’00’ लिखा होना कोई अनियमितता नहीं है, बल्कि ये बेघर लोगों के लिए दर्ज पते हैं। उन्होंने कहा कि आयोग सभी भारतीय नागरिकों को मताधिकार देना चाहता है, चाहे वे बेघर ही क्यों न हों।

हालांकि, यह दावा अब सवालों के घेरे में है। सोमवार को न्यूज पोर्टल ‘Journo Mirror’ ने अपने यूट्यूब चैनल पर एक 21 मिनट की ग्राउंड रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें दिल्ली के बेघरों से बात की गई। यह जानने की कोशिश की गई कि क्या ये ‘हाउस नंबर 0/00’ वाले मतदाता वास्तव में सड़कों और फ्लाईओवरों के नीचे रह रहे हैं?

बेघर बोले – नहीं मिला वोटर कार्ड

दिल्ली की सड़कों और फ्लाईओवरों के नीचे रह रहे हरि सिंह (राजस्थान) और रवि दत्त (बिहार) जैसे कई बेघर लोगों ने बताया कि वे पिछले 40-45 वर्षों से दिल्ली में रह रहे हैं, लेकिन आज तक न तो किसी ने उनका वोटर पंजीकरण किया, न ही उनके पास EPIC कार्ड (वोटर ID) है।

कुछ लोगों ने बताया कि उनके पास आधार कार्ड और पैन कार्ड तो है, लेकिन वोटर कार्ड नहीं मिला। चौंकाने वाली बात यह रही कि किसी भी बेघर व्यक्ति ने यह नहीं कहा कि चुनाव आयोग का कोई कर्मचारी उनसे संपर्क में आया हो या उन्हें पंजीकृत किया हो।

सच्चाई: न घर, न योजना, न पहचान

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकतर बेघर लोगों को सरकारी योजनाओं का कोई लाभ नहीं मिला है, न तो उन्हें आवास योजना के तहत कोई घर मिला, न ही राशन कार्ड, और न ही वोट देने का अधिकार।

CEC के दावे के उलट, ये बेघर न तो वोटर लिस्ट में दर्ज नजर आते हैं और न ही मतदान केंद्रों तक पहुंचते हैं। ऐसे में यह सवाल उठता है कि वोटर लिस्ट में ‘हाउस नंबर 0’ और ‘00’ के नाम पर दर्ज लोग कौन हैं?

चुनाव आयोग के दावे पर उठे सवाल

  1. अगर ये पते बेघरों के लिए हैं तो नाम और फोटो के अलावा उनकी पहचान कैसे तय की जाती है?
  2. चुनाव आयोग ऐसे पते क्यों नहीं देता, जैसे “फ्लाईओवर के नीचे, X रोड के कोने पर”?
  3. क्या इन पते पर दर्ज वोटर वास्तव में मौजूद हैं या सिर्फ कागजों पर हैं?
  4. क्या कोई और व्यक्ति इनकी जगह वोट डाल रहा है?

CEC ज्ञानेश कुमार के इस स्पष्टीकरण ने विपक्ष की आपत्ति को खारिज करने की बजाय और अधिक सवाल खड़े कर दिए हैं। जब असल बेघर लोग कहते हैं कि उन्हें किसी ने वोटर बनाने की कोशिश तक नहीं की, तो ‘हाउस नंबर 0/00’ पर दर्ज हजारों वोटरों की वास्तविकता पर गंभीर संदेह होता है।

अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह एक और ‘वोट चोरी’ का तरीका है, या फिर सिस्टम में कोई बड़ी चूक है? जवाब चुनाव आयोग को देना होगा, और वह भी तथ्यों और जांच के आधार पर, न कि सिर्फ बयानबाजी से।