
जम्मू: जम्मू-कश्मीर इस समय भीषण मानसूनी कहर का सामना कर रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में भूस्खलन, बाढ़ और बुनियादी ढांचे को नुकसान की खबरें सामने आ रही हैं। सबसे गंभीर स्थिति रियासी जिले में स्थित वैष्णो देवी यात्रा मार्ग के अधकुंवारी बिंदु पर देखने को मिली, जहां मंगलवार को भारी भूस्खलन हुआ। इस हादसे में कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 20 से अधिक घायल हुए हैं। प्रशासन ने तत्काल यात्रा को स्थगित कर दिया है और राहत एवं बचाव कार्य जारी है।
जम्मू संभाग में सभी स्कूल और कॉलेज बंद कर दिए गए हैं। आम जनता को भी जरूरी न होने पर घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है। रात के समय आवागमन पर भी पाबंदी लगाई गई है।
हालांकि नदी तवी का जलस्तर घटा है, लेकिन चिनाब नदी अब भी खतरे के निशान के करीब बह रही है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की टीमें पूरी तरह से सतर्क हैं।
नेटवर्क सेवाएं बहाल
मंगलवार को ऑप्टिकल फाइबर क्षतिग्रस्त होने के कारण जम्मू-कश्मीर में फोन और इंटरनेट सेवाएं बाधित हो गई थीं, जिन्हें बुधवार को पूरी तरह बहाल कर दिया गया। अब सभी नेटवर्क पर 5जी सेवाएं भी चालू हो चुकी हैं।
प्रभावित क्षेत्रों का जायजा
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने जम्मू और तवी किनारे के प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात कर स्थिति की जानकारी दी और केंद्र सरकार से सहायता का आश्वासन प्राप्त किया। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 में जिस पुल का हिस्सा टूटा था, वही हिस्सा फिर क्षतिग्रस्त हुआ है, जिससे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुल और मार्गों को नुकसान
बाढ़ में ऐतिहासिक माधोपुर पुल भी बह गया है, जिसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने दी। वहीं जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन के कारण यातायात पूरी तरह ठप है। डीसी डोडा ने बताया कि थाथरी और अन्य क्षेत्रों में राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं और मौसम अब साफ होने लगा है।
रेल सेवाएं प्रभावित
जम्मू में रेल संपर्क पूरी तरह बाधित रहा। कई ट्रेनें रद्द की गईं और कुछ को बीच रास्ते में रोका गया। स्वराज एक्सप्रेस ट्रेन पिछले 24 घंटे से जम्मू-कटरा मार्ग पर फंसी रही। बुधवार दोपहर बाद छह ट्रेन सेवाएं बहाल की गई हैं।
रिकॉर्ड बारिश
जम्मू में 296 मिमी और उधमपुर में रिकॉर्ड 629.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो इन क्षेत्रों में अब तक की सबसे अधिक 24 घंटे की वर्षा है।
सुरक्षा और राहत प्रयास
सभी प्रभावित क्षेत्रों में एसडीआरएफ, सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटी हैं। श्री माता वैष्णो देवी कटरा, जम्मू तवी और पठानकोट स्टेशनों पर मदद केंद्र स्थापित किए गए हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दुर्घटना को “दुखद” बताया और मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना प्रकट की। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद करेगी।
जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों से बचें और केवल सरकारी जानकारी पर भरोसा करें। मौसम विभाग के अनुसार वर्षा में अब कमी आने की संभावना है, लेकिन राहत कार्यों में अभी समय लगेगा।