जानिए क्या हैं डिंपल यादव की दिलचस्प लव स्टोरी?
एक तरफ उत्तर प्रदेश की राजनीति के सबसे बड़े नेता मुलायम सिंह यादव… और दूसरी तरफ उनका बेटा, जो अपने प्यार के लिए परिवार को मनाने में जुटा था।
कहानी है अखिलेश यादव और डिंपल यादव की। एक ऐसी लव स्टोरी, जिसमें दोस्ती है, दूरियां हैं, चिट्ठियां हैं और फिर शादी के लिए परिवार को मनाने की चुनौती भी।
लेकिन डिंपल यादव की पहचान सिर्फ अखिलेश यादव की पत्नी या मुलायम सिंह यादव की बहू होने तक सीमित नहीं है। उन्होंने चुनावी राजनीति में हार देखी, जीत हासिल की और आज मैनपुरी से लोकसभा सांसद हैं।
तो आखिर कौन हैं डिंपल यादव? अखिलेश से उनकी मुलाकात कैसे हुई? मुलायम सिंह इस रिश्ते के लिए कैसे राजी हुए? और कैसे डिंपल ने राजनीति में अपनी जगह बनाई?
आइए, जानते हैं उनकी पूरी कहानी।
डिंपल यादव का जन्म 15 जनवरी 1978 को महाराष्ट्र के पुणे में हुआ था। उनके पिता राम चंद्र सिंह रावत भारतीय सेना में कर्नल थे और उनकी मां का नाम चंपा रावत है। डिंपल का परिवार राजनीति से दूर था। उन्होंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन किया।
लेकिन उनकी जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आया, जिसने आगे चलकर उन्हें उत्तर प्रदेश के सबसे चर्चित राजनीतिक परिवारों में से एक से जोड़ दिया।
और इस मोड़ का नाम था- अखिलेश यादव।
कहानी 1990 के दशक की है। अखिलेश यादव इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों की पहली मुलाकात एक कॉमन फ्रेंड के जरिए हुई थी। अखिलेश ने खुद भी एक इंटरव्यू में बताया था कि डिंपल से उनकी मुलाकात लखनऊ के कैंट इलाके में हुई थी, जहां वह खेलने जाया करते थे।
पहली मुलाकात के बाद दोनों की दोस्ती हुई और फिर यह रिश्ता धीरे-धीरे आगे बढ़ा।
लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब अखिलेश आगे की पढ़ाई के लिए ऑस्ट्रेलिया चले गए।
आज के दौर में जहां लोग मोबाइल और वीडियो कॉल के जरिए लगातार संपर्क में रहते हैं, उस समय हालात अलग थे। अखिलेश ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उनके दौर में न WhatsApp था और न आज जैसी मोबाइल की सुविधा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विदेश में पढ़ाई के दौरान भी दोनों एक-दूसरे के संपर्क में रहे। चिट्ठियों और ग्रीटिंग कार्ड्स के जरिए अपनी बात पहुंचाते रहे।
सोचिए, एक तरफ ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे अखिलेश और दूसरी तरफ भारत में डिंपल। दोनों के बीच दूरी थी, लेकिन उनका रिश्ता आगे बढ़ रहा था।
कुछ समय बाद अखिलेश ने डिंपल से शादी करने का फैसला किया। लेकिन अब इस कहानी में सबसे बड़ी चुनौती आने वाली थी।
अखिलेश के पिता थे मुलायम सिंह यादव- उत्तर प्रदेश की राजनीति का एक बड़ा नाम।
अखिलेश ने अपने रिश्ते के बारे में सबसे पहले अपनी दादी मूर्ति देवी को बताया। अखिलेश ने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह अपनी दादी के काफी करीब थे। जब उन्होंने दादी को अपने रिश्ते के बारे में बताया, तो दादी ने उन्हें इसे आगे बढ़ाने की छूट दी।
लेकिन मुलायम सिंह यादव को इस शादी के लिए मनाना आसान नहीं था।
मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि परिवार के भीतर इस रिश्ते को लेकर शुरुआत में असहमति थी। कुछ रिपोर्ट्स में इंटरकास्ट शादी और उस समय के राजनीतिक माहौल को भी इसकी वजहों में गिनाया गया है। हालांकि, मुलायम सिंह की शुरुआती असहमति के पीछे की वजहों को लेकर अलग-अलग रिपोर्ट्स में अलग-अलग बातें सामने आई हैं।
अखिलेश अपने फैसले पर कायम थे। परिवार को मनाने की कोशिशें जारी रहीं। इस दौरान मुलायम सिंह के करीबी रहे अमर सिंह की भूमिका का भी मीडिया रिपोर्ट्स में जिक्र मिलता है।
आखिरकार मुलायम सिंह यादव इस शादी के लिए राजी हो गए और 24 नवंबर 1999 को अखिलेश यादव और डिंपल यादव की शादी हो गई।
लेकिन डिंपल यादव की कहानी सिर्फ इस लव स्टोरी तक सीमित नहीं है। शादी के बाद उनके सामने एक अलग चुनौती थी- राजनीति में अपनी पहचान बनाना।
साल 2009 में डिंपल यादव ने फिरोजाबाद लोकसभा सीट के उपचुनाव में चुनाव लड़ा। उनके सामने कांग्रेस के राज बब्बर थे। इस चुनाव में डिंपल को हार का सामना करना पड़ा।
लेकिन 2012 में उनकी राजनीतिक कहानी ने नया मोड़ लिया। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने। इसके बाद कन्नौज लोकसभा सीट खाली हुई। डिंपल यादव इस सीट से निर्विरोध सांसद चुनी गईं।
साल 2014 में मोदी लहर में दोबारा कन्नौज से फिर चुनाव लड़ा और बीजेपी के सुब्रत पाठक को हराकर अपनी सीट बचा ली।
लेकिन 2019 में तस्वीर बदल गई। इस बार सुब्रत पाठक ने डिंपल यादव को हरा दिया और वह लोकसभा से बाहर हो गईं।
इसके बाद 2022 में मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद मैनपुरी लोकसभा सीट खाली हुई। समाजवादी पार्टी ने इस सीट से डिंपल यादव को उम्मीदवार बनाया।
मैनपुरी मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक विरासत से जुड़ी सीट थी। ऐसे में इस उपचुनाव पर सबकी नजरें थीं। डिंपल यादव ने बीजेपी के रघुराज सिंह शाक्य को बड़े अंतर से हराया और एक बार फिर लोकसभा पहुंच गईं।
फिर आया 2024 का लोकसभा चुनाव। डिंपल यादव ने मैनपुरी से दोबारा चुनाव लड़ा और बीजेपी के जयवीर सिंह को हराकर अपनी सीट बरकरार रखी।
आज डिंपल यादव मैनपुरी से समाजवादी पार्टी की सांसद हैं और पार्टी के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती है।
यह कहना सही होगा कि उनका राजनीतिक सफर एक ऐसे परिवार से जुड़कर शुरू हुआ, जिसकी उत्तर प्रदेश में मजबूत पहचान रही है। लेकिन उनकी अपनी चुनावी यात्रा में कई उतार-चढ़ाव भी आए हैं।
आज अखिलेश और डिंपल यादव सिर्फ पति-पत्नी ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी की राजनीति के दो अहम चेहरे भी हैं। एक रिश्ता, जिसकी शुरुआत दोस्ती से हुई… चिट्ठियों के दौर से गुजरा… परिवार की सहमति तक पहुंचा… और फिर राजनीति के सफर का हिस्सा बन गया।
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By Ahmad Samir