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कांग्रेस को लग रहे हैं एक से बढ़कर एक झटके, सनातन विरोधी होना पड़ा गया भारी

कांग्रेस को लग रहे हैं एक से बढ़कर एक झटके, सनातन विरोधी होना पड़ा गया भारी

कांग्रेस को लग रहे हैं एक से बढ़कर एक झटके, सनातन विरोधी होना पड़ा गया भारी

कल और आज में मिलकर कई दिग्गज नेताओं ने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया। जैसा कि आपको पता है कि कल बॉक्सर विजेंदर सिंह बीजेपी में शामिल हो गए। और देर शाम पूर्व सांसद संजय निरुपम को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने छह साल के लिए निष्कासित करने का फैसला ले लिया था। जिसके बाद गुरुवार की सुबह संजय निरुपम ने एक्स पर कहा कि, ‘ऐसा लगता है कि कल रात मेरा इस्तीफा पत्र मिलने के तुरंत बाद उन्होंने मेरा निष्कासन जारी करने का फैसला किया। ऐसी तत्परता देखकर अच्छा लगा। जिसके बाद गौरव वल्लभ ने भी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफा का कारण उन्होनें बताया कि सनातन विरोधी नारे और राम मंदिर पर हुए बवाल है। साथ ही उन्होनें ये भी कहा की एक ओर हम जाति आधारित जनगणना की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर संपूर्ण हिंदू समाज के विरोधी नजर आ रहे हैं, यह कार्यशैली जनता के बीच पार्टी को एक ख़ास धर्म विशेष के ही हिमायती होने का भ्रामक संदेश दे रही है. यह कांग्रेस के मूलभूत सिद्धांतों के खिलाफ है। जिसके बाद गुरुवार को गौरव वल्लभ ने बीजेपी ज्वॉइन कर ली।

क्या कहा था संजय निरुपम ने

पूर्व सांसद संजय निरुपम ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) द्वारा मुंबई की छह लोकसभा सीटों में से चार पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा के बाद बयान दिया था। निरुपम ने कहा था कि कांग्रेस नेतृत्व को खुद को शिवसेना के सामने झुकने की इजाजत नहीं देनी चाहिए। संजय निरुपम ने शिवसेना की सूची पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा था कि ‘वे मुंबई में पांच सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं और एक दान के रूप में कांग्रेस के लिए छोड़ देंगे। यह निर्णय मुंबई में कांग्रेस को खत्म करने के लिए है। मैं इस निर्णय की निंदा करता हूं। सीथ ही मुंबई उत्तर पश्चिम सीट से अमोल कीर्तिकर को प्रत्याशी बनाए जाने का भी उन्होनें विरोध किया। आपको बता दें कि अमोल खिचड़ी ठेका घोटाले में आरोपी हैं और इसके लिए ईडी द्वारा उनकी जांच की जा रही है। आज उन्होने प्रेस कॉन्फ्रेंस में राम मंदिर और प्राण प्रतिष्ठा के बारे में भी कांग्रेस पार्टी को जमकर घेरा है।

कौन है संजय निरुपम

पूर्व शिवसैनिक निरुपम ने 2005 में शिवसेना छोड़ दी। उन्होंने उत्तर भारतीय फेरीवालों का मुद्दा उठाया और बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। 2009 में उन्होंने मुंबई उत्तर सीट से चुनाव लड़ा और जीते। निरुपम 2014 में उसी निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के गोपाल शेट्टी के खिलाफ चुनाव हार गए थे।

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