पूर्व उपराष्ट्रपति हुए हैं नजरबंद! जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद रहस्यमय चुप्पी

पूर्व उपराष्ट्रपति हुए हैं नजरबंद! जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद रहस्यमय चुप्पी
पूर्व उपराष्ट्रपति हुए हैं नजरबंद! जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद रहस्यमय चुप्पी

नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के पूर्व सभापति जगदीप धनखड़ के अचानक और नाटकीय इस्तीफे के बाद उनका स्वास्थ्य और वर्तमान स्थिति रहस्य के घेरे में है। 21 जुलाई 2025 को उन्होंने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दिया था, लेकिन तब से लेकर अब तक न तो उन्होंने किसी से मुलाकात की है, न ही कोई सार्वजनिक बयान दिया है, जिससे राजनीतिक हलकों में अटकलों का बाजार गर्म है।

परिवार और रिश्तेदार भी नहीं कर पा रहे हैं मुलाकात

परिवार के करीबी सदस्यों के मुताबिक, धनखड़ को पूर्ण विश्राम की सलाह दी गई है, और उन्हें मिलने की अनुमति किसी को नहीं दी जा रही है। यहां तक कि उनके भतीजे और युवा पोलो खिलाड़ी डीनो धनखड़ को भी सुरक्षा ने पहले प्रवेश से मना कर दिया था। बाद में उन्हें कुछ मिनटों की मुलाकात मिली, लेकिन डीनो भी बाहर आकर कुछ भी स्पष्ट कहने से बचते नजर आए।

डीनो ने संक्षेप में कहा,

“वो ठीक नहीं हैं और डॉक्टरों ने उन्हें पूरा आराम करने की सलाह दी है।”

नोएडा स्थानांतरण की योजना, लेकिन संशय बरकरार

कुछ पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि धनखड़ जल्द ही नोएडा स्थित अपने निजी घर में शिफ्ट होने वाले हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति पद पर उत्तराधिकारी के चुनाव तक यह संभव नहीं है। वहीं कई अन्य सूत्रों का कहना है कि वे सरकारी आवास स्वीकार ही नहीं करेंगे, लेकिन इसके पीछे का कारण कोई स्पष्ट नहीं कर पा रहा।

सार्वजनिक कार्यक्रम में अनुपस्थिति और अजीब खामोशी

8 अगस्त को राजस्थान के सैनिक स्कूल चित्तौड़गढ़ में आयोजित संस्थापक दिवस समारोह में भी वे नहीं पहुंचे, जबकि उनके नाम पर बनाए गए “जगदीप धनखड़ स्पोर्ट्स एरीना” का उद्घाटन होना था। उनके कार्यालय ने पहले इस कार्यक्रम में भाग लेने की पुष्टि की थी, लेकिन उनकी अनुपस्थिति की जानकारी अंतिम समय तक स्कूल को नहीं दी गई, जो असामान्य माना जा रहा है।

अचानक इस्तीफा और उसके बाद की घटनाएं

21 जुलाई को उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही की अध्यक्षता की, दोपहर 12:30 बजे बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक की अध्यक्षता की, और 4:30 बजे फिर बैठक बुलाई। लेकिन इसके बाद शाम को राष्ट्रपति से एक अनिर्धारित मुलाकात के बाद उन्होंने रात 9 बजे इस्तीफा दे दिया।

कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा कि वे 5:30 बजे तक उपराष्ट्रपति के साथ थे और 7:30 बजे आखिरी बार बात की, लेकिन तब तक धनखड़ ने किसी अस्वस्थता की शिकायत नहीं की।

राजनीतिक हलकों में उठ रहे सवाल

वरिष्ठ अधिवक्ता और सांसद कपिल सिब्बल ने सवाल उठाते हुए कहा:

“धनखड़ साहब अब न किसी से मिलते हैं, न कोई उनसे बात कर पा रहा है। कहीं ऐसा तो नहीं कि वे नजरबंद हैं?”

उन्होंने यहां तक कहा कि अगर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई तो FIR दर्ज करने की नौबत आ सकती है।

शिवसेना (UBT) के सांसद संजय राउत ने भी यही आशंका जताई और गृह मंत्री अमित शाह से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

राजनीतिक संपर्क में सिर्फ एक व्यक्ति

रालोद नेता और केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी, जो कि धनखड़ परिवार के पुराने पारिवारिक मित्र हैं, एकमात्र व्यक्ति बताए जा रहे हैं जिन्हें परिवार से मिलने की अनुमति है। खबरों के अनुसार, प्रधानमंत्री का संदेश धनखड़ को इस्तीफा देने का जयंत चौधरी ने ही पहुंचाया था।

भाजपा में भी चुप्पी, आलोचक को किया निष्कासित

राजस्थान भाजपा के प्रवक्ता जे.के. जानू ने धनखड़ के साथ हुए व्यवहार की आलोचना की थी, जिसके चलते उन्हें पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित कर दिया गया। इसके बाद पार्टी के भीतर भी कोई इस मुद्दे पर बोलने को तैयार नहीं है।

जगदीप धनखड़ जैसे राजनीतिक रूप से सक्रिय और सामाजिक रूप से जुड़ी हुई हस्ती का अचानक गायब हो जाना, सार्वजनिक रूप से न दिखना, और किसी भी आधिकारिक स्पष्टीकरण का न आना, देश की राजनीति में एक रहस्यमयी सन्नाटा पैदा कर चुका है। क्या यह सिर्फ स्वास्थ्य से जुड़ी बात है या कोई गंभीर राजनीतिक दबाव? इस पर अब देश की नजरें टिकी हैं।

अब सवाल उठता है, क्या वाकई में पूर्व उपराष्ट्रपति नजरबंद हैं? और अगर नहीं, तो सरकार चुप क्यों है?