
नई दिल्ली: गणेश चतुर्थी का पर्व पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि भगवान गणेश का जन्म भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मध्यान्ह काल में हुआ था। हर साल यह उत्सव अगस्त या सितंबर के महीने में आता है। वर्ष 2025 में यह पर्व 27 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा।
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
गणेश चतुर्थी 2025 की चतुर्थी तिथि 26 अगस्त को दोपहर 1:54 बजे से शुरू होकर 27 अगस्त को दोपहर 3:44 बजे तक रहेगी।
गणपति स्थापना का सबसे शुभ मुहूर्त 27 अगस्त को मध्यान्ह काल में रहेगा, जो सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक होगा।
क्यों खास होता है मध्यान्ह काल?
वेदों और धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भगवान गणेश का जन्म मध्यान्ह काल में हुआ था। इसलिए इस समय पर की गई स्थापना और पूजा को विशेष फलदायक माना गया है।
गणेश स्थापना की विधि
- पूजा स्थल पर सबसे पहले स्वस्तिक चिन्ह बनाएं
- गणेश प्रतिमा को उत्तर दिशा की ओर मुख करके स्थापित करें
- फूल, अक्षत (चावल), दूर्वा, मोदक, लड्डू और घी के दीपक से पूजन करें
- प्रतिदिन आरती करें और 10 दिन तक विधिवत पूजा करें
गणेश विसर्जन 2025
गणेश चतुर्थी का समापन अनंत चतुर्दशी को गणेश विसर्जन के साथ होता है। वर्ष 2025 में गणेश विसर्जन 6 सितंबर (शनिवार) को मनाया जाएगा। इस दिन भक्त गणपति बप्पा की प्रतिमा को नाच-गाकर, भक्ति और आशीर्वाद के साथ जल में विसर्जित करते हैं।
क्यों मनाई जाती है गणेश चतुर्थी?
गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्म की खुशी में मनाई जाती है। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और बुद्धि का देवता माना जाता है। यह पर्व विशेष रूप से महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात और उत्तर भारत में धूमधाम से मनाया जाता है।
महत्वपूर्ण FAQs:
प्र. गणेश चतुर्थी 2025 कब है?
उ. 27 अगस्त 2025, बुधवार को।
प्र. गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त कब है?
उ. 27 अगस्त को सुबह 11:05 बजे से दोपहर 1:40 बजे तक।
प्र. गणेश विसर्जन कब किया जाएगा?
उ. 6 सितंबर 2025, शनिवार को अनंत चतुर्दशी के दिन।
प्र. गणेश स्थापना की मुख्य बातें क्या हैं?
उ. स्वस्तिक बनाएं, उत्तर दिशा की ओर मूर्ति रखें, पूजा में मोदक, लड्डू, दूर्वा और दीपक चढ़ाएं।
प्र. यह पर्व क्यों मनाया जाता है?
उ. भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में, जो ज्ञान, समृद्धि और बाधा नाशक के प्रतीक हैं।
गणेशोत्सव 2025 का यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से भी लोगों को जोड़ने का कार्य करता है।