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महाराष्ट्र में मराठी नहीं बोलने पर महिलाओं की पिटाई, Excuse Me, कहने पर हुआ था बवाल

महाराष्ट्र में मराठी नहीं बोलने पर महिलाओं की पिटाई, Excuse Me, कहने पर हुआ था बवाल
महाराष्ट्र में मराठी नहीं बोलने पर महिलाओं की पिटाई, Excuse Me, कहने पर हुआ था बवाल

डोम्बिवली, महाराष्ट्र: महाराष्ट्र में मराठी और गैर-मराठी भाषी समुदायों के बीच बढ़ते तनाव ने एक दर्दनाक हमले को जन्म दिया, जब दो महिलाओं को केवल “excuse me” कहने पर सड़कों पर पीटा गया। यह घटना डोम्बिवली के एक हाउसिंग सोसाइटी के गेट पर हुई, और इस पर बनी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई, जिससे पूरे राज्य में गुस्से की लहर फैल गई है।

घटना की गंभीरता

पीड़ित महिलाएं पूनम गुप्ता और गीता चौहान स्कूटर पर सवार होकर अपनी सोसाइटी में प्रवेश करने की कोशिश कर रही थीं, तभी एक व्यक्ति ने रास्ता रोक लिया। जब पूनम और गीता ने शालीनता से उस व्यक्ति से “excuse me” कहा तो वह गुस्से में आ गया और उन्हें मराठी में बात करने की धमकी दी। जब गीता ने इसका विरोध किया, तो मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

हमला

पूनम ने बताया कि उस व्यक्ति ने गीता का हाथ मोड़ दिया और फिर उसके परिवार के लोग भी आकर दोनों महिलाओं पर हमला करने लगे। पूनम अपने 9 महीने के बच्चे को गोद में लेकर इस हमले का शिकार हुईं। इसके अलावा, पूनम के पति अंकित चौहान और उनके दोस्त ने बचाव में आकर हस्तक्षेप किया, लेकिन उन्हें भी मारा गया। अंकित को एक लाठी से सिर में चोट आई।

पुलिस की कार्रवाई

विष्णुनगर पुलिस, जिनकी अगुवाई वरिष्ठ निरीक्षक संजय पवार कर रहे हैं, उन्होंने मामले की प्रारंभिक जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है और पुलिस यह पता लगा रही है कि क्या इस हमले का कारण पहले से चल रहे विवाद से जुड़ा हुआ था।

राज ठाकरे और मराठी-गैर मराठी विवाद

यह घटना राज ठाकरे की पार्टी MNS द्वारा महाराष्ट्र में मराठी भाषा के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के अभियान के बीच सामने आई है। हाल ही में, MNS ने बैंकों में मराठी बोलने की मांग को लेकर एक अभियान चलाया था, जिसने कई जगहों पर विवाद को जन्म दिया था। राज ठाकरे ने इस अभियान को कुछ समय के लिए रोक दिया था, यह दावा करते हुए कि उन्होंने पर्याप्त जागरूकता पैदा कर दी है।

क्या है पीछे का विवाद?

हालांकि, इस हमले को केवल एक भाषा विवाद नहीं माना जा सकता। यह राज्य में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ बढ़ते सांप्रदायिक तनाव और भाषाई राजनीति की एक गंभीर परिणति हो सकती है, जो पिछले कुछ समय से विभिन्न रूपों में सामने आ रही है। यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि भाषा और संस्कृति के नाम पर होने वाले विवादों में मानवाधिकारों की धज्जियां उड़ना कोई नई बात नहीं है। फिलहाल पुलिस जांच कर रही है, लेकिन यह सवाल उठता है कि क्या हम ऐसे विभाजनकारी हमलों से बच पाएंगे या इस तरह की घटनाएं और बढ़ेंगी?

Bhavishya
एक विचारशील लेखक, जो समाज की नब्ज को समझता है और उसी के आधार पर शब्दों को पंख देता है। लिखता है वो, केवल किताबों तक ही नहीं, बल्कि इंसानों की कहानियों, उनकी संघर्षों और उनकी उम्मीदों को भी। पढ़ना उसका जुनून है, क्योंकि उसे सिर्फ शब्दों का संसार ही नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगियों का हर पहलू भी समझने की इच्छा है।