Pandit Ravi Shankar Birth Anniversary: सितार के सम्राट, जिन्होंने भारतीय संगीत को पश्चिमी दुनिया में चमकाया

Pandit Ravi Shankar Birth Anniversary: सितार के सम्राट, जिन्होंने भारतीय संगीत को पश्चिमी दुनिया में चमकाया

Pandit Ravi Shankar Birth Anniversary: सितार के सम्राट, जिन्होंने भारतीय संगीत को पश्चिमी दुनिया में चमकाया

रविशंकर (7 अप्रैल 1920 – 11 दिसंबर 2012) भारतीय संगीत के महान सितार वादक, संगीतकार और रचनाकार थे। उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई। रविशंकर का संगीत भारतीय संस्कृति का अद्वितीय हिस्सा बन गया और वे भारतीय संगीत के वैश्विक दूत माने जाते हैं।

प्रारंभिक जीवन और करियर

रविशंकर का जन्म 7 अप्रैल 1920 को वाराणसी (तत्कालीन बनारस) में हुआ। वे एक बंगाली ब्राह्मण परिवार से थे। शुरूआत में उन्होंने नृत्य की शिक्षा ली और अपने बड़े भाई उदय शंकर के साथ भारत और यूरोप में नृत्य मंडली के साथ यात्रा की। हालांकि, 18 वर्ष की आयु में उन्होंने नृत्य छोड़कर सितार सीखने का निर्णय लिया और प्रसिद्ध संगीतकार उस्ताद अल्लाउद्दीन खान से सितार की शिक्षा ली।

उपलब्धियाँ

रविशंकर ने 31 रागों की रचना की, जिनमें बैरागी, रसिया, और बंजारा शामिल हैं। वे भारतीय फिल्म संगीत के भी महान रचनाकार थे और उन्होंने प्रसिद्ध फिल्म “गांधी” (1982) के लिए संगीत रचना की। इसके अलावा उन्होंने “नीचा नगर” (1946), जो कान फिल्म महोत्सव में पुरस्कृत हुई, और सत्यजीत रे की “अपु त्रयी” (1955-59) के लिए भी संगीत दिया।

याहूदी मेनुहिन और जॉर्ज हैरिसन के साथ सहयोग

1960 के दशक में रविशंकर का पश्चिमी दुनिया में भी प्रभाव बढ़ने लगा, जब उन्होंने प्रसिद्ध अमेरिकी वायलिन वादक याहूदी मेनुहिन के साथ प्रदर्शन शुरू किए। साथ ही, ब्रिटिश संगीतकार जॉर्ज हैरिसन (बीटल्स) के साथ उनका सहयोग भारतीय संगीत को पश्चिमी दुनिया में लोकप्रिय बनाने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना। हैरिसन ने रविशंकर से सितार की शिक्षा ली, और इसके बाद दोनों का संगीत संबंध और गहरा हुआ।

1971 में रविशंकर और जॉर्ज हैरिसन ने “कॉनसर्ट फॉर बांगलादेश” का आयोजन किया, जिसमें बॉब डिलन, एरिक क्लैप्टन, और रिंगो स्टार ने भी भाग लिया।

सम्मान और पुरस्कार

रविशंकर को उनके योगदान के लिए कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 1999 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया। इसके अलावा, उन्हें पद्म विभूषण (1981), पद्म भूसन (1967) और संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1962) भी मिले। रविशंकर को चार बार ग्रैमी पुरस्कार मिला, जिसमें “वेस्ट मीट्स ईस्ट” (1966) और “द कॉन्सर्ट फॉर बांगलादेश” (1971) शामिल हैं।

व्यक्तिगत जीवन

रविशंकर की शादी 1941 में सितार वादिका उस्ताद अल्लाउद्दीन खान की बेटी Annapurna Devi से हुई थी, लेकिन 1960 के दशक में दोनों के बीच अलगाव हो गया। 1989 में उन्होंने तंबुरा वादिका सुकन्या राजन से शादी की, जिनसे उनकी बेटी अनुष्का शंकर का जन्म हुआ, जो खुद एक प्रसिद्ध सितार वादिका हैं। रविशंकर की एक और बेटी नोरा जोन्स भी एक Grammy Award विजेता गायिका हैं।

धरोहर

रविशंकर का योगदान न केवल भारतीय शास्त्रीय संगीत में था, बल्कि उन्होंने पश्चिमी संगीतकारों के साथ सहयोग कर भारतीय संगीत को एक नया आयाम दिया। उनका संगीत आज भी संगीत प्रेमियों के दिलों में जीवित है, और उनकी धरोहर आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती रहेगी।

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