Google search engine
Homeव्यक्ति विशेषकौन थे टी.एन. शेषन, इनके नाम से क्यों कापंते थे बड़े- बड़े...

कौन थे टी.एन. शेषन, इनके नाम से क्यों कापंते थे बड़े- बड़े नेता

कौन थे टी.एन. शेषन, इनके नाम से क्यों कापंते थे बड़े- बड़े नेता

कौन थे टी.एन. शेषन, इनके नाम से क्यों कापंते थे बड़े- बड़े नेता

तिरुनेल्लई नारायण अय्यर शेषन नाम तो सुना होगा, जिन्हें टी.एन. शेषन के नाम से जाना जाता है। शेषन, एक भारतीय ब्यूरोक्रेट थे, जिन्होंने 1990 से 1996 तक भारत के 10वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में काम किया। लेकिन उनका यहां तक आने का सफर आसान नहीं था, उन्हें 1 दिन में 6 अलग अलग जगहों पर ट्रासंफर किया गया और जब चंद्रशेखर पीएम बने तो उन्हें मुख्य चुनाव आयुक्त बना दिया गया।

अपने कार्यकाल के दौरान, टी.एन. शेषन ने भारत में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण सुधार लागू किए। उनके मुखर और बकवास रहित दृष्टिकोण के कारण उन्हें “द इलेक्शन कमीशन टॉरनेडो” उपनाम भी मिला। बात यहीं खत्म नहीं होती है, एक बार टी.एन. शेषन ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि “I Eat Politician For Breakfast” मतलब मैं नेताओं को अपने नास्तें में खाता हुॅं, वो चुनाव को लेकर इतने सख़्त थे कि उनको चुनाव में थोड़ी भी गड़बड़ी दिखती वो चुनाव वापस से करा देते, और यही काम उन्होने बिहार में किया जिससे लालू यादव इतने परेशान हो गए की उन्होने ये तक कह दिया कि शेषन को भैसिंया पर बिठा के गंगा जी में हेला देंगे, और उन्होंने नारा दिया “शेषन वरशेज़ द नेशन”

उन्होंने मतदाताओं की भागीदारी बढ़ाने और लोकतंत्र में चुनावों के महत्व के बारे में नागरिकों को शिक्षित करने के लिए व्यापक मतदाता जागरूकता अभियान चलाया। जिसके बाद शेषन ने डुप्लिकेट और फर्जी मतदाताओं को हटाने के लिए मतदाता सूची को साफ करने और संशोधित करने की प्रक्रिया शुरू की, जिससे चुनावी प्रक्रिया की अखंडता सुनिश्चित हुई। जिसमें मतदाता उन्होंने मतदाता पहचान पत्र के माध्यम से मतदाता पहचान की अवधारणा पेश की, जिससे मतदाताओं के जगह पर कोई और ना वोट दे इसको रोकने के लिए मतदान केंद्रों पर पहचान दिखाना अनिवार्य कर दिया। आगे शेषन ने चुनावों के दौरान बूथ कैप्चरिंग, धांधली और बाहुबल के इस्तेमाल जैसे चुनावी कदाचार पर नकेल कसी। उन्होंने कानून और व्यवस्था बनाए रखने और मतदाताओं और मतदान कर्मियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त प्रवर्तन उपाय लागू किए। जिसके बाद टी.एन. शेषन ने आदर्श आचार संहिता को सख्ती से लागू करने और चुनावों में धन बल के उपयोग पर अंकुश लगाकर सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाए।

आपको बता दें कि टी.एन. शेषन के कार्यकाल को अक्सर “चुनावों का स्वर्णिम काल”, “ Golden Period Of Elections” कहा जाता है क्योंकि उन्होंने चुनावी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण सुधार लाये थे। उनके साहसिक और सक्रिय नेतृत्व ने भारत के चुनाव आयोग को एक दुर्जेय संस्थान में बदल दिया, जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मान और प्रशंसा का पात्र है। शेषन की विरासत चुनाव आयुक्तों और नौकरशाहों को चुनाव संचालन में उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने और भारत के लोकतांत्रिक सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए प्रेरित करती रहती है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments