लोकसभा में आधी रात को क्यों पास हुआ वक्फ (संशोधन) बिल, कांग्रेस ने किया जोरदार विरोध

लोकसभा में आधी रात को क्यों पास हुआ वक्फ (संशोधन) बिल, कांग्रेस ने किया जोरदार विरोध
लोकसभा में आधी रात को क्यों पास हुआ वक्फ (संशोधन) बिल, कांग्रेस ने किया जोरदार विरोध

नई दिल्ली: लोकसभा में मंगलवार को वक्फ (संशोधन) बिल, 2024 को मंजूरी दे दी गई, जिसके बाद एक लंबी और गर्मागर्म बहस का दौर चला। इस बिल को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पेश किया, जिसका उद्देश्य वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार लाना और पारदर्शिता को बढ़ावा देना है।

12 घंटे तक चले इस बहस में विपक्षी दलों, विशेषकर कांग्रेस, ने सरकार पर जल्दी-जल्दी यह बिल पारित करने का आरोप लगाया और कहा कि इस प्रक्रिया में पर्याप्त समय नहीं दिया गया और न ही किसी प्रकार की गहरी सलाह-मशविरा किया गया। कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल ने सरकार के इस कदम को हड़बड़ी में लिया गया बताया।

अमित शाह का जोरदार बचाव

वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस बिल का मजबूती से बचाव किया। उन्होंने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि इस बिल को 284 प्रतिनिधियों और 25 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों से प्राप्त सुझावों के बाद तैयार किया गया था। शाह ने कहा कि यह एक व्यापक परामर्श प्रक्रिया का हिस्सा था और विपक्ष का यह आरोप गलत है कि प्रक्रिया को दरकिनार किया गया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने भी इस मामले में सरकार को सभी पक्षों से सुझावों पर विचार करने का आश्वासन दिया, जिससे सदन में कुछ शांति बनी रही। हालांकि, विपक्षी दलों ने आरोप लगाए कि सरकार का उद्देश्य मुस्लिम समुदाय को कमजोर करना है और उसे विभाजित करना है।

‘UMEED’ बिल का उद्देश्य

सरकार ने इस बिल को अब ‘यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, एम्पावरमेंट, एफिशियंसी एंड डेवलपमेंट’ (UMEED) बिल के रूप में पुनः प्रस्तुत किया है। इसका उद्देश्य वक्फ प्रणाली में सुधार और पारदर्शिता लाना है। इस बिल के तहत वक्फ संपत्तियों के पंजीकरण, लेखा परीक्षण और मुकदमों के डिजिटलीकरण की प्रक्रिया की जाएगी, जो वक्फ प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाएगा। इसके अलावा, वक्फ ट्रिब्यूनल और बोर्डों की शक्तियों को बढ़ाया जाएगा, जिससे भूमि विवादों के समाधान और कानूनी मानकों का पालन बेहतर हो सकेगा।

विवादास्पद प्रावधान

बिल के सबसे विवादास्पद हिस्सों में से एक यह है कि इसमें गैर-मुसलमानों को वक्फ संपत्तियों के प्रशासन में शामिल किया गया है, हालांकि धार्मिक गतिविधियों में उन्हें कोई भूमिका नहीं दी गई है। इस प्रावधान का समर्थन करते हुए गृह मंत्री शाह ने कहा कि यह कदम वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में गैर-मुसलमानों को शामिल करने का तरीका है, बिना धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप किए।

साथ ही, इस बिल के तहत कलेक्टर को वक्फ भूमि के स्वामित्व की स्थिति का निर्धारण करने का अधिकार भी दिया गया है, जिससे यह चिंता उत्पन्न हो रही है कि राज्य धार्मिक संपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है। इस पर शाह ने कहा कि ऐसे प्रावधान अन्य धार्मिक संदर्भों में भी लागू होते हैं, जैसे मंदिरों और चर्चों में होते हैं।

कांग्रेस ने किया विरोध

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस बिल के खिलाफ कड़ा बयान देते हुए अपने X सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, “यह विधेयक मुस्लिमों को हाशिए पर डालने और उनके व्यक्तिगत कानूनों और संपत्ति अधिकारों का उल्लंघन करने का प्रयास है। यह संविधान पर हमला है और इसका उद्देश्य आज मुस्लिमों को निशाना बनाना है, लेकिन भविष्य में इसका उपयोग अन्य समुदायों के खिलाफ भी हो सकता है।”

यह बिल अब कानून बनने के बाद वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में सुधार का दावा करता है, लेकिन इसके साथ ही राजनीतिक और धार्मिक दृष्टिकोण से कई सवाल खड़े हो गए हैं।