
भुवनेश्वर: कालींगा इंस्टीट्यूट ऑफ इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी (KIIT) में पढ़ने वाली 20 वर्षीय नेपाली छात्रा प्रकृति लाम्साल की आत्महत्या के मामले ने भारी विरोध, राजनयिक हस्तक्षेप और विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीसरे वर्ष की बीटेक छात्रा लाम्साल का शव 16 फरवरी को उनके छात्रावास के कमरे में मिला। आरोप है कि उन्हें उनके सहपाठी अद्विक श्रीवास्तव द्वारा लगातार प्रताड़ित और ब्लैकमेल किया जा रहा था।
विरोध प्रदर्शन और जबरन निकाले गए नेपाली छात्र
इस घटना के बाद KIIT के नेपाली छात्र समुदाय में जबरदस्त आक्रोश फैल गया। 500 से अधिक छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने उन्हें जबरन बाहर निकालने की कोशिश की। यह मामला तब और गरमाया जब नेपाल और भारत सरकारों को हस्तक्षेप करना पड़ा।
प्रदर्शन के दौरान, लाम्साल के चचेरे भाई सिद्धांत सिग्देल ने खुलासा किया कि उन्होंने अद्विक श्रीवास्तव के खिलाफ इंटरनेशनल रिलेशंस ऑफिस में शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन उसे केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया गया।
इसके अलावा, ब्लैकमेलिंग और एक ऑडियो क्लिप जिसमें कथित तौर पर श्रीवास्तव लाम्साल को गाली दे रहा था, उसने विश्वविद्यालय प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अद्विक श्रीवास्तव गिरफ्तार, पुलिस जांच जारी
प्रकृति लाम्साल की आत्महत्या के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए अद्विक श्रीवास्तव को उस समय हिरासत में लिया जब वह कथित तौर पर शहर से भागने की कोशिश कर रहा था।
श्रीवास्तव को आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment of suicide) के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने लाम्साल का मोबाइल और लैपटॉप जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा है।
नेपाल सरकार और कूटनीतिक हस्तक्षेप
लाम्साल की मौत के बाद KIIT प्रशासन ने सभी नेपाली छात्रों को परिसर खाली करने का आदेश दे दिया, जिससे विश्वविद्यालय पर नस्लीय भेदभाव (racial insensitivity) के आरोप लगे।
इस कदम की कड़ी आलोचना हुई, और नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस मामले में भारत सरकार से हस्तक्षेप की मांग की। नेपाल दूतावास ने भी छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दखल दिया।
दबाव बढ़ने पर KIIT प्रशासन ने अपना फैसला वापस लिया और नेपाली छात्रों को वापस लौटने की अनुमति दी। ओडिशा सरकार ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए हस्तक्षेप किया है।
जांच जारी, प्रशासन पर उठे सवाल
यह मामला अब राजनयिक स्तर तक पहुंच चुका है और पूरे घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखी जा रही है। पुलिस जांच जारी है, और आगे की कार्रवाई फॉरेंसिक रिपोर्ट और सबूतों पर निर्भर करेगी।
इस घटना ने विश्वविद्यालयों में यौन उत्पीड़न और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है, जिससे भारतीय शिक्षा संस्थानों में छात्र सुरक्षा की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।