सुनील साहू कहते हैं कि उन्हें जिंदगी भर इस बात का अफसोस रहेगा कि उन्होंने अपने पांच महीने के बेटे अव्यान को गाय का दूध पानी में मिलाकर पिलाया था। अव्यान मुख्य रूप से मां का दूध पीता था, लेकिन इंदौर (मध्य प्रदेश) में रहने वाले परिवार ने उसके आहार में थोड़ा पतला किया हुआ गाय का दूध शामिल करने का फैसला किया, जो भारत के कई घरों में आम बात है।
अक्सर माना जाता है कि गाय का दूध छोटे बच्चों के लिए भारी होता है और पाचन संबंधी दिक्कतें पैदा कर सकता है, इसलिए उसे पानी मिलाकर दिया जाता है। परिवार का कहना है कि उन्हें पता था कि नल का पानी सुरक्षित नहीं है, इसलिए उन्होंने दूध और पानी के मिश्रण को उबालकर ठंडा करने के बाद बच्चे को पिलाया था।
26 दिसंबर को अव्यान को तेज दस्त शुरू हो गए। स्थानीय डॉक्टर से इलाज कराने के बावजूद उसकी हालत तेजी से बिगड़ती गई और तीन दिन के भीतर उसकी मौत हो गई। सुनील साहू का मानना है कि उनके बेटे की मौत दूषित नल का पानी पीने से हुई।
अव्यान उन कई लोगों में शामिल है जिनकी मौत इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में प्रदूषित पेयजल पीने के कारण होने की आशंका है। प्रशासन अभी मामले की जांच कर रहा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि एक क्षतिग्रस्त पाइपलाइन के कारण सीवर का पानी शहर की जल आपूर्ति में मिल गया, जिससे दस्त की बड़ी महामारी फैल गई।

मौतों की सही संख्या अभी स्पष्ट नहीं है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर अब तक चार मौतों को दूषित पानी से जोड़ा गया है। हालांकि वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है। राज्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने आठ मौतों की जानकारी मिलने की बात कही है, जबकि स्थानीय पत्रकारों ने बीबीसी हिंदी को बताया कि मृतकों की संख्या लगभग 14 तक हो सकती है। शहर भर में 200 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक सप्ताह में भागीरथपुरा के करीब 40,000 लोगों की स्वास्थ्य जांच की गई। यह इलाका मुख्य रूप से गरीब और निम्न-मध्यम वर्गीय परिवारों का है। इनमें से लगभग 2,450 लोगों में उल्टी और दस्त के मामले पाए गए।
इस घटना ने इंदौर में भारी नाराजगी पैदा कर दी है। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर में हुई इस घटना के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर सवाल उठ रहे हैं।
जिलाधिकारी शिवम वर्मा ने बताया कि जिस पाइपलाइन में लीकेज के कारण पानी दूषित हुआ था, उसे ठीक कर दिया गया है और अन्य खामियों की भी जांच की जा रही है। एक नगर निगम अधिकारी को सेवा से हटा दिया गया है, जबकि दो अन्य अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा, “यह घटना कभी नहीं होनी चाहिए थी। मामले की गहराई से जांच के लिए एक समिति बनाई गई है और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।”
अगले आदेश तक नगर निगम भागीरथपुरा के लोगों को टैंकरों के जरिए पानी उपलब्ध करा रहा है। साथ ही लोगों को नल का पानी इस्तेमाल न करने की सलाह दी गई है।
जांच जारी रहने के बीच इलाके के परिवार अपने प्रियजनों को खोने के दुख से जूझ रहे हैं। दर्जी संजय यादव ने बताया कि उनकी 69 वर्षीय मां को 26 दिसंबर की शाम उल्टियां शुरू हुई थीं। उन्होंने कहा, “हम उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए, लेकिन एक दिन के भीतर उनकी मौत हो गई।” उनका 11 महीने का बेटा भी बीमार है।
एक अन्य निवासी सुधा पाल ने बताया कि उनके 76 वर्षीय पिता नंदलाल पाल की भी तेज दस्त के बाद मौत हो गई। उनका कहना है कि उनके घर में आने वाला पानी अब भी दूषित है और उससे बदबू आती है।
अरुण प्रजापत, जिनका दावा है कि उनकी मां सीमा की मौत दूषित पानी पीने से हुई, कहते हैं, “पानी से बदबू आ रही थी, लेकिन हमने कभी नहीं सोचा था कि यह जानलेवा साबित हो सकता है।”
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इलाके के लोग पिछले दो महीने से अधिक समय से गंदे और बदबूदार पानी की शिकायत कर रहे थे। इन आरोपों पर भाजपा पार्षद कमल वाघेला ने कहा कि इंदौर की सीवर और जल आपूर्ति व्यवस्था को बड़े स्तर पर मरम्मत की जरूरत है और कई इलाकों में काम जारी है।
वहीं, कांग्रेस नेता जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर खराब प्रशासन और घटना की वास्तविक गंभीरता छिपाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “इंदौर के लोगों ने बार-बार भाजपा को वोट दिया, लेकिन बदले में उन्हें जहरीला पानी मिला।”












