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Etawah News: कथावाचक मुकुट मणि को लेकर क्या है पूरा विवाद? इटावा में पुलिस पर क्यों हुआ हमला

Etawah News: कथावाचक मुकुट मणि को लेकर क्या है पूरा विवाद? इटावा में पुलिस पर क्यों हुआ हमला
Etawah News: कथावाचक मुकुट मणि को लेकर क्या है पूरा विवाद? इटावा में पुलिस पर क्यों हुआ हमला

इटावा: उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के दांदरपुर गांव में आयोजित भागवत कथा का आयोजन अब धार्मिक आयोजन से हटकर जातीय और सामाजिक विवाद का कारण बन गया है। कथावाचक मुकुट मणि अग्निहोत्री और उनके सहयोगी संत सिंह यादव के साथ कथित दुर्व्यवहार, मारपीट और जातिगत अपमान का मामला गरमाया हुआ है। अब यजमान जय प्रकाश तिवारी ने इस प्रकरण में एनडीटीवी के माध्यम से नया मोड़ ला दिया है।

“कथावाचकों ने मेरी पत्नी से की थी छेड़खानी” – यजमान का आरोप

जय प्रकाश तिवारी ने दावा किया है कि 21 जून को भागवत कथा के पहले दिन कथा के बाद जब कथावाचक और उनके सहयोगी उनके घर भोजन के लिए आए, तभी मुकुट मणि और संत सिंह यादव ने उनकी पत्नी रेणु तिवारी से छेड़छाड़ की। उन्होंने कहा, “कथावाचक ने मेरी पत्नी से कहा कि वह अपने हाथों से उन्हें खाना खिलाएं, और जानबूझकर उनकी उंगली छूने की कोशिश की। जब विरोध किया गया तो उन्होंने माफी मांगी।”

“दो आधार कार्ड से हुआ शक, जाति पूछी गई”

तिवारी दंपति के अनुसार, कथावाचक अपने झोले से सामान निकालते समय दो आधार कार्ड गिरा बैठे, जिनमें एक पर नाम मुकुट सिंह और दूसरे पर मुकुट मणि अग्निहोत्री लिखा था। इसी से उन्हें कथावाचकों की जाति पर संदेह हुआ। रेणु तिवारी ने कहा कि उन्हें कथावाचक के ‘यादव’ होने की जानकारी पहले होती, तो वह उन्हें बुलाती ही नहीं।

वीडियो वायरल

आपको बता दें कि 21 जून की रात एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथावाचकों के साथ मारपीट करते हुए, उनका सिर मुंडवाया गया, नाक रगड़वाई गई, नकदी और चेन छीनी गई, और उन्हें शपथपूर्वक गांव से निकाल दिया गया। यह दृश्य अब जातीय हिंसा का प्रतीक बन गया है।

पुलिस कार्रवाई और विरोध-प्रदर्शन

कथावाचकों की तहरीर पर आशीष तिवारी, उत्तम अवस्थी, निक्की अवस्थी और मनु दुबे नामक चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। साथ ही 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। वहीं, 26 जून को यादव संगठनों और ‘अहीर रेजिमेंट’ के समर्थकों ने बकेवर थाने का घेराव किया, पुलिस पर पथराव हुआ और 13 वाहन जब्त किए गए। करीब 20 लोगों को हिरासत में लिया गया है।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और NHRC की दखल

  • अखिलेश यादव ने इसे PDA समुदाय पर हमला बताते हुए पीड़ितों को ₹51,000 की सहायता देने की घोषणा की।
  • मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस प्रकरण को गंभीर मानते हुए कठोर कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
  • पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि “समाजवादी पार्टी ने मामले को जातीय रंग दिया है, जबकि सरकार निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है।”
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले को संज्ञान में लेते हुए इटावा पुलिस से रिपोर्ट मांगी है।

आगे क्या?

इस विवाद ने प्रदेश में जातीय सहिष्णुता और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। एक ओर कथावाचक पक्ष इसे मानवाधिकार और जातिगत उत्पीड़न बता रहा है, तो दूसरी ओर यजमान पक्ष छेड़खानी और पहचान छिपाने का आरोप लगा रहा है।

अब आगे देखना होगा कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया में किस पक्ष के दावे मजबूत साबित होते हैं। लेकिन इतना तय है कि दांदरपुर की यह कथा, अब केवल धर्म की नहीं, समाज की सोच, सहिष्णुता और न्याय की परीक्षा बन चुकी है।

Bhavishya
एक विचारशील लेखक, जो समाज की नब्ज को समझता है और उसी के आधार पर शब्दों को पंख देता है। लिखता है वो, केवल किताबों तक ही नहीं, बल्कि इंसानों की कहानियों, उनकी संघर्षों और उनकी उम्मीदों को भी। पढ़ना उसका जुनून है, क्योंकि उसे सिर्फ शब्दों का संसार ही नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगियों का हर पहलू भी समझने की इच्छा है।